Uttam & Rishi
07/08/2020
राजबाड़ा कई घटनाओं का साक्षी रहा है, कई रुकावटें भी पार करी है। लेकिन, क्या आप जानते हैं की राजबाड़ा के निर्माण से लेकर अब तक यह तीन बार आग से भी घिर चुका है? दरअसल, राजबाड़ा का आग से पुराना नाता रहा है,
पहली बार, जब सन 1801 में सिंधिया के सेनापति सरजेराव घाटगे ने इंदौर पर आक्रमण किया तब इस आक्रमण में घाटगे ने राजबाड़ा के एक बड़े हिस्से को जला कर नष्ट कर दिया था।
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इसके बाद मल्हारराव द्वितीय के शासनकाल में उनके प्रधानमंत्री तात्या जोग ने एक बार फिर से राजबाड़ा का निर्माण कार्य शुरु करवाया।
इसके बाद 1834 में राजबाड़ा दूसरी बार अग्निकांड का शिकार हुआ। अचानक आग लगने के कारण इसकी एक उपरी मंजिल पूरी तरह जलकर खाक हो गईं थी।
तीसरी बार 1984 में जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद भड़के दंगों में कुछ अराजक तत्व ने इसमें आग लगा दी।
19/07/2020
Butterflies are nature's angels, they remind us what a gift it is to be alive.
- Robin Nola
28/04/2019
🌼व्हाइट चर्च🌼
व्हाइट चर्च मध्य भारत के सबसे पुराने चर्चों में से एक है। इसे भारत के गवर्नर जनरल सर रॉबर्ट एम सी हैमिल्टन ने वर्ष 1858 में बनवाया था। चर्च प्राचीन ब्रिटिश वास्तुकला को प्रदर्शित करता है, जो कि ब्रिटेन के अधिकांश विरोध चर्चों में प्रचलित था। चर्च मुख्य रूप से भारत में रहने वाले ईसाइयों और सेना के जवानों के लिए बनाया गया था, जो पूर्व ‐ स्वतंत्रता युग के दौरान अक्सर शहर में आते थे।..
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12/03/2019
पश्चिमी इंदौर में रंगवासा मार्ग पर 1884 में महाराजा शिवाजीराव होलकर ने करीब एक लाख रुपए की लागत से महल बनवाया था। होलकरों के आमोद-प्रमोद के लिए यह भवन इटालियन विला की तरह बनाया गया है। ऊंचे टीले पर इस बंगले को इस तरह बनवाया गया कि यहां पर आठों प्रहर हवा का प्रवाह बना रहता है। बंगले में खिड़की दरवाजों का निर्माण भी इसी तरह से किया गया है कि पूरे बंगले में प्राकृतिक हवा का लुत्फ लिया जा सके। इसी के चलते बंगले का नाम हवा बंगला रखा गया।
2. इस तीन मंजिला सुंदर भवन की संरचना आयताकार है। पूर्व में प्रवेश द्वार है, जिसमें स्तंभों पर आधारित पोर्च है। तराशे गए बेसाल्ट प्रस्तर से निर्मित नींव भूतल से एक मीटर ऊपर है। इसे ईंट, चूने और काप्ट से बनाया गया है। इस भवन में करीब 25 कक्ष हैं।
3. क्लासिक शैली में बनाए गए इस भवन के उत्तरी और दक्षिणी दरवाजों पर तिकोना और अर्ध वृत्ताकार अंकन है। मध्य के स्तंभ आयोनिक यानी ग्रीक शैली बने हैं। दूसरी मंजिल के दरवाजों के ऊपर का अंकन भी इसी योजना में कुछ परिवर्तनों के साथ है। पूरे बंगले में लकड़ी का काम बखूबी किया गया है।
4. भवन के मध्य दो स्तंभों का प्रयोग किया गया है। द्वितीय तल के स्तंभ कोरेथियन शैली के हैं। पश्चिमी ओर पोर्च के स्थान पर छोटा-सा बरामदा है। इसमें तीन महराबयुक्त दरवाजे हैं। संपूर्ण भवन इटालियन विला की भांति है, जो तत्कालीन समय में नगर की सुंदरतम इमारतों में से था। अब इस भवन में नगर निगम का जोनल ऑफिस संचालित हो रहा है।
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