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05/11/2025
नानक नाम जहाज है, चढ़े सो उतरे पार..
जो श्रद्धा कर सेंवदे, गुर पार उतारणहार ||
"नाम जपो, किरत करो, और वंड छको"
जैसा उदार संदेश देने वाले, विश्व को सहिष्णुता ,बंधुत्व और सद्भावना का पाठ पढ़ाने वाले सिख धर्म के संस्थापक एवं प्रथम गुरु ,श्री गुरुनानकदेवजी के प्रकाश पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं💐💐💐
आपका दिव्य उपदेश सदा सत्य, सेवा और परोपकार के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता रहे।
आपके आशीर्वाद से मानवता की ज्योति हमारे हृदयों में सदैव प्रज्वलित रहे।
22/10/2025
"श्री कृष्ण सिखाएं ,धरती और प्रकृति का सम्मान ,
गोवर्धन पूजा का यहीं है संदेश महान"
आप सभी को गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं 💐💐💐
22/10/2025
✨ भारत के प्राचीनतम 2552 वीर निर्वाण संवत का कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से शुभारंभ ✨
22 अक्टूबर 2025 नव वर्ष प्रारंभ सभी को शुभकामनाएं💐💐💐
अजमेर जिले के बड़ली गाँव से मिला शिलालेख वीर निर्वाण संवत के प्रमाण के साथ सबसे प्राचीन ब्राह्मी शिलालेखों में से एक है। पुरातत्ववेत्ता डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने 1912 में इसकी खोज की थी, और इसमें 84 वीर संवत लिखा है, जिसका अर्थ है कि यह शिलालेख भगवान महावीर के निर्वाण के 84 वर्ष बाद (ईसा से 443 वर्ष पूर्व) अंकित किया गया था (डॉक्टर राजबलि पांडेय)। यह शिलालेख फिलहाल अजमेर के राजपूताना संग्रहालय में संग्रहित है।
भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में समय की गणना केवल वर्षों या तिथियों से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक घटनाओं और महापुरुषों के जीवन संदेशों से जुड़ी रही है और शायद इसलिए ही भारत विश्व गुरु कहलाता रहा है। ऐसी ही एक अद्वितीय और प्राचीन परंपरा है — “वीर निर्वाण संवत”, जो भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक दिवस से प्रारंभ होती है।
🕉️ भगवान महावीर स्वामी — अहिंसा और आत्मशुद्धि के प्रतीक
भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, ने संसार को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अस्तेय जैसे जीवन के शाश्वत सिद्धांतों की शिक्षा दी। उनका जीवन मानवता के लिए प्रकाशस्तंभ बन गया, जिन्होंने यह सिखाया कि मोक्ष का मार्ग बाहर नहीं, बल्कि भीतर की आत्मा में छिपा है।
🪔 निर्वाण दिवस — आत्मा की परम शांति का पर्व
भगवान महावीर स्वामी को दीपावली की रात्रि में पावापुरी (बिहार) में निर्वाण प्राप्त हुआ था ,जन्म ,जरा,मृत्यु से विहीन ,सच्चिदानंद परमात्म पद प्राप्त । इसी दिव्य घटना के उपलक्ष्य में सभी दीपों का पर्व मनाते हैं — जिससे यह संदेश मिलता है कि जब एक ज्योति (भगवान महावीर) आत्मा में विलीन होती है, तो अनंत आत्माएँ ज्ञान-प्रकाश से आलोकित होती हैं।
22 अक्टूबर 2025 — 2552वाँ वीर निर्वाण संवत प्रारंभ
इस वर्ष 22 अक्टूबर 2025 से भारत का प्राचीन पंचांग एक नया अध्याय प्रारंभ कर रहा है — 2552वाँ वीर निर्वाण संवत।
यह संवत हमें केवल कालगणना नहीं सिखाता, बल्कि संयम, सत्य और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
🔔 संदेश और महत्त्व
यह संवत भारत की सबसे प्राचीन कालगणना प्रणालियों में से एक है, जो ढाई सहस्राब्दी से अधिक पुराना है।
यह हमें याद दिलाता है कि भारत का इतिहास केवल राजाओं , युद्धों और रक्तपात का ही नहीं, बल्कि धर्म, दर्शन ,आत्मोद्धार , विश्वशांति ,विश्वबंधुत्व ,परस्परोपग्रहो जीवानाम व ब्रह्मांड के सभी जीवों और प्राणियों के प्रति दया ,करुणा और अहिंसामई सार्वभौमिक संदेश की गौरवशाली यात्रा का भी इतिहास है ,ये प्रेम ,अहिंसा व करुणा जैसे उच्च प्रत्ययों के दोहरे मापदंडों के अभाव का भी सनातन व शाश्वत इतिहास है ।
वीर निर्वाण संवत हमें हर वर्ष यह स्मरण कराता है कि सच्चा प्रकाश केवल बाहरी दीपों से ही नहीं, भीतर के आत्मदीप से प्रस्फुटित होता है ।
🌼 निष्कर्ष
जब हम 2552वें वीर निर्वाण संवत का स्वागत करें, तो संकल्प लें कि —
“हम अपने जीवन में भगवान महावीर के सिद्धांतों को उतारें,
हर जीव में आत्मा देखें, और हर क्षण में करुणा जगाएँ।”
अभिनंदन हो — 2552 वीर निर्वाण संवत का!
जय महावीर
02/10/2025
जो परिवर्तन आप दुनिया में देखना चाहते हैं ,उसकी शुरुआत स्वयं से करें : महात्मा गांधी
आज जब पूरी दुनिया के नेता अपनी महानता को पूरी दुनियां में प्रचारित करते हैं ,और तो और नोबेल जैसे पुरस्कारों को पाने की होड़ में बनाबटी शांतिदूत बनते हैं ,पद पाने की स्पर्धा में भ्रष्ट आचरण करते हैं ,कोई अच्छा कार्य भी निज स्वार्थ और सम्मान पाने की दृष्टि से करते हैं ,वहीं दूसरी ओर महात्मा गांधी इन सबकी सामर्थ्य रखते हुए भी सादा जीवन उच्च विचार पर अडिग रहे ,कभी किसी भी पुरस्कार या पदलोलुपता उनमें नहीं रही ,और सच कहें तो नोबेल जैसे पुरस्कार और कोई भी पद उनके सामने तुच्छ रहा ,न ही वो कभी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की प्रतिस्पर्धा में रहे । उनके सिद्धान्त इतने अधिक व्यापक थे कि उन्हें किसी धर्म ,सम्प्रदाय ,जाति यहाँ तक कि किसी देश की भौगोलिक सीमा में नहीं बांधा जा सकता ।महात्मा गांधी मानवता के सच्चे अग्रदूत थे ।
आज पूरे विश्व के नेता गांधी को मानना चाहें या न चाहें ,मजबूरी हो या कुटिलता लेकिन सच्चाई यही है कि गांधी के विरोधियों द्वारा भी गांधी जी को मानना उनके आगे सर झुकाना होता है ,यही गांधी की ताक़त है यही गांधी की महानता है। इस देश के जनमानस पर गांधी का असर हमेशा रहेगा यही सच्चाई है ,और गांधी की आवाज को सदैव भारत की आवाज कहा जाएगा ।
जिन्होंने कभी ग्रामप्रधान, विधायक व सांसद से उनके ग्राम, विधायकी क्षेत्र और जिले पर उनकी ज़िम्मेदारी के बारे में नहीं पूछा वे गांधी जी पूछते हैं
'आप कैसे महात्मा? आप कैसे राष्ट्रपिता? आप कैसे अहिंसा के पुजारी?'
आज नई पीढ़ी के कुछ लोग जिनको गांधी दर्शन ,विचारधारा और जीवन की a,b,c भी पता नहीं है वो गांधी के राष्ट्रपिता कहने पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं ,उन्हें शायद इसकी जानकारी नहीं कि राष्ट्रपिता का तमगा एक अन्य महान पुरूष नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा दिया गया था ,gen z के भटके हुए व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के लोग या तो खुद को नेताजी से अधिक राष्ट्रवादी मानते हैं या उनसे अधिक ज्ञानी ।
प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का महात्मा के बारे में कथन सदैव स्मरण योग्य है :
"आने वाली पीढ़ियाँ शायद ही विश्वास करेंगी कि इस धरती पर ऐसा कोई इंसान, हाड़-मांस का, कभी चला होगा।"
राष्ट्रपिता की जयंती पर अनेकों शुभकामनाएं💐💐💐
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