Aniket
19/08/2023
शशि श्याम रजनी के साथ साथ घूमता है
घूम घूम ढूंढता है धरती पर चांदनी
स्वर घूमे ताल पर थिरकन की चाल पर
गीतकार ढूंढे जैसे गीतों में रागनी
वन वन विचर कर तिल तिल मर कर
ढूंढे मणि जैसे कोई विचलित नागनी
ढूंढता है तुमको पण्डित भी ऐसे ही
भाग्य को ढूंढे जैसे कोई अभागनी
13/08/2023
कविता "राम पुनः रण क्षेत्र पधारो" का एक अंश
अक्षरजननी बनी कालिका, मानस राम समाए है।
हमने सदा विजय श्री पाई गीत क्रांति के गाए है।।
हम भगत सुभाष के सपने है गांधी की बिनाई है।
हम गुरुदेव के जन गण मन, बच्चन की रुबाई है।।
करते है करबद्ध निवेदन प्रभु हो प्रकट कल्याण करो।
हे राम पुनः रण क्षेत्र पधारो, पुनः शस्त्र संधान करो।।
@अनिकेत दुबे "गुरुजी"
#हिंदी #कविता 'sclub
02/06/2023
01/06/2023
गिराने में लगे है लोग जो,
वो ऊंचाई तले दब जाएंगे।
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