Rahil Rajgarhi

Rahil Rajgarhi

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28/08/2025

नई ग़ज़ल نئی غزل

हिन्दी/ اردو

ऐ चारा-गर कुछ ऐसा कर की मरज़ मेरा महफ़ूज़ रहे

ये रूह परिंदा उड़ जाये पर काशाना महफ़ूज़ रहे

اے چارہ گر کچھ ایسا کر کہ مرض میرا محفوظ رہے

یہ روح پرندہ اُد آئے پر کاشانہ محفوظ رہے

हम एक भटकते आहू हैं इस रोज़ सिमटते जंगल में

बस्ती में शोर-शराबा है वो कस्तूरा महफ़ूज़ रहे

ہم ایک بھٹکتے آہو ہیں اس روز سمٹتے جنگل میں

بستی میں شور شرابہ ہے وہ کستورا محفوظ رہے

ऐ मर्ग फरोश ऐ मलक-उल-मौत ये तेरा काम नहीं पागल

जो क़ैद है गन्दी दुनिया मैं वो हर बन्दा महफ़ूज़ रहे

اے مرگ فروش اے ملک الموت یہ تیرا کام نہیں پاگل

جو قید ہے گندی دنیا میں وہ ہر بندہ محفوظ رہے

सब बन्द दरीचे खुल जाए एक तेज़ हवा अंदर आये

जिस सफ़्हे पर सच लिक्खा हो बस वो सफ़्हा महफ़ूज़ रहे

سب بند دریچے کھل جائے ایک تیز ہوا اندر ائے

جس صفحے پر سچ لکھا ہو بس وہ صفحہ محفوظ رہے

एक तवायफ़ एक तरफ़ और एक तरफ़ एक साधु है

इस शहर को चुभता याराना ये याराना महफ़ूज़ रहे

ایک طوائف ایک طرف اور ایک طرف ایک سادھو ہے

اس شہر کو چبھتا یارانہ یہ یارانہ محفوظ رہے

- राहिल राजगढ़ी

चारा-गर* - चिकित्सक, काशाना* - घोसला, आहू* - मृग, कस्तूरा*- कस्तूरी मृग, मर्ग फरोश/मलक-उल-मौत* - मौत का देवता,

Photos from Rahil Rajgarhi's post 24/03/2025

रहता सुख़न से नाम क़यामत तलक है 'ज़ौक़'
हर साल की तरह इस साल भी के ज़ेरे एहतिमाम कराई गई अदबी और शे'री नशिस्त कामयाब रही । पूरी टीम को बहुत मुबारक 🙏 तमाम अख़बार का बहुत शुक्रिया 🙏

16/09/2023

ताज़ा ग़ज़ल  تازہ غزل

ये रोग इस दिलो जाँ को अच्छा लगा दिया
इक शख़्स ने इस 'इश्क' में नुक़्ता लगा दिया
یہ روگ اس دل و جاں کو اچھا لگا دیا
اِک شخص نے اس'عشک' میں نقطہ لگا دیا

आँसू ना रुक सके, कभी सैलाब रुक सके
जो कुछ भी अपने पास था सारा लगा दिया
آنسو نہ روک سکی، کبھی سیلاب روک سکے؟ 
جو کچھ بھی اپنے پاس تھا سارا لگا دیا

घर से चले तो मिल गया वहशत पसन्द शख़्स
किसने हमारी राह में शीशा लगा दिया
گھر سے چلے تو مل گیا وحشت پسند شخص
کس نے ہماری راہ میں شیسشا لگا دیا

वो आहटें सुकूत को ज़िन्दा निगल गयी
इक जलपरी ने झील में ग़ोता लगा दिया
وہ آہٹیں سکوت کو زندہ نگل گئی
اِک جل پری نے جھیل میں غوطہ لگا دیا

जो नब्ज़ चल रही है वो नश्तर है क़ल्ब में
मुझ में जुनूने इश्क़ ने बलवा लगा दिया

جو نبض چل رہی ہے وہ نشتر ہے قلب میں
مجھ میں جنونِ عشق نے بلوا لگا دیا

फिर से पुकारा है हमें उस ख़ूब-रू ने आज 
और दुख ये है कि जाने में लम्हा लगा दिया

پھر سے پُکارا ہے ہمیں اس خوب رو نے آج 
اور دکھ یہ ہے کی جانے میں لمحہ لگا دیا

- राहिल राजगढ़ी 

- راحل راجگٹھی

*सुकूत - सन्नाटा
*नश्तर- चाकू
*क़ल्ब-  अंतर्मन
*बलवा- दंगा, फ़साद
*ख़ूब-रू - प्रियतमा

❤❤ ♥️ ✍️

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