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24/06/2026

हाल ही में मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक शहर मांडू की प्रसिद्ध खुरासानी इमली (Khurasani Imli GI Tag) को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया। यह भारत के प्रतिष्ठित जीआई टैग (GI Tag India) सूची में शामिल होने वाला एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद बन गया है। 

खुरासानी इमली से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु: 

उत्पत्ति: यह फल वास्तव में अफ्रीका के विशाल बाओबाब वृक्ष (Baobab tree) का फल है।

ऐसा माना जाता है कि 14वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान अफगान और अरब व्यापारी इस वृक्ष को मांडू लेकर आए थे।

भौगोलिक क्षेत्र: वर्तमान में मध्य प्रदेश का मांडू क्षेत्र भारत में इन दुर्लभ वृक्षों का सबसे बड़ा केंद्र है। यह स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली एक स्वदेशी उपज (Indigenous Produce) के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी है।

विशेषताएँ और स्वाद: सामान्य इमली की तुलना में खुरासानी इमली का स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है।

इसका फल हल्के हरे रंग का होता है जिसके गूदे में प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक खनिज पाए जाते हैं। 

औषधीय महत्व: स्थानीय आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से इस कृषि विरासत (Agricultural Heritage) को संजोए हुए हैं। आदिवासी वैद्य इसके गूदे, बीज और सूखी छाल का उपयोग पाचन संबंधी बीमारियों, बुखार, थकान और मधुमेह के इलाज में करते हैं। 

आर्थिक प्रभाव: जीआई मान्यता (GI Recognition) मिलने से स्थानीय स्तर पर निर्मित बाओबाब जूस और छाल से बने उत्पादों की ब्रांडिंग मजबूत होगी।

इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को गति मिलेगी और अब तक सड़क किनारे उत्पाद बेचने वाले आदिवासियों को सही मूल्य मिलेगा।

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