This Talk
13/01/2026
आपदा में अवसर और मदद
1998 में जब खन्ना-केहरी ट्रेन एक्सीडेंट हुआ, तो सैकड़ों पैसेंजर मारे गए। केरल का एक हिंदू आर्मी ऑफिसर उसी ट्रेन में सफर कर रहा था और उसकी जान बच गई। वह लिखता है, “मैंने सुना था कि पंजाब के लोग बहुत दयालु होते हैं, वे सबकी भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं, लेकिन आज मैंने यह अपनी आँखों से देखा।”
वह लिखता है कि जब एक्सीडेंट हुआ तो रात हो चुकी थी। आस-पास के गाँवों के लोग अपने ट्रैक्टर, ट्रॉली, गाड़ियाँ और कारों में भरकर घायल पैसेंजर को हॉस्पिटल ले गए, अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेनों के मलबे से लाशें निकालीं, और जैसे ही दिन निकला, एक्सीडेंट वाली जगह पर ही गुरु का लंगर शुरू कर दिया गया।
जिस जगह पर दो सौ से ज़्यादा लोग मारे गए थे, वहाँ लाशें निकालने वालों और उनकी पहचान करने आए लोगों के लिए प्रसाद का इंतज़ाम देखकर मैं रो पड़ा और बोला…
ये देवी-देवता इसी धरती पर रहते हैं। धन्य हैं उनके सतगुरु जिन्होंने उन पर इतनी कृपा की, उन्हें इतना बड़ा काम सौंपा जो वे सदियों बाद भी कर रहे हैं।
मैं अक्सर सोचता हूँ कि दूसरी तरफ़, इसी भारत में ऐसे लोग भी हैं जो कुदरती आफ़तों और हादसों के समय बेबस लोगों को लूटते हैं। याद कीजिए तीन साल पहले उत्तराखंड में कुदरती आफ़त और बाढ़ के समय, वहाँ के लोगों ने एक प्लेट चावल तीन सौ रुपये में, पाँच रुपये का बिस्किट का पैकेट सौ रुपये में बेचा था। घायलों के हाथों से सोने के गहने उतार लिए... उत्तराखंड जैसा दूसरे राज्यों में भी होता है. यही फ़र्क है सिक्खों में और दूसरे लोगो में...
30/04/2024
आजकल जो ट्रेंड चल रहा है समाज में, जल्द ही सुहागरात भी चौराहे पर मनाना आधुनिकता कहलाएगा। ये पश्चिमी आधुनिकता ले डूबेगी। क्योंकि फटी जीन्स में आपको वही लोग नही देखना चाहते जो आपके शुभचिंतक है।
बाकी दुनिया तो आपको आपकी बहन बेटियो को नंगा देखना चाहती ही है।
एक समय था जब कपड़े उतारने पर महाभारत हुई थी और आज किसी ने कपड़े पहनने के लिए बोल दिया तो महाभारत हो रही है।
आओ जड़ो की ओर लौट चले। क्योंकि जड़ो से कटने के बाद वृक्ष कहीं का नही रहता।
जागो और मर्यादा का पालन करो मॉडर्न थीम के चक्कर में विवाह जैसे पवित्र रिश्तों एवं सामाजिक वातावरण को मत बिगाड़ो।
सभी से विनम्र निवेदन🙏
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30/04/2024
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर चल रही इन reels को देखकर अहसास हो रहा है कि आखिर क्यों हमारे बजुर्गों ने औरत को पर्दे में रखा था....
अरे ये माँस के लोथड़े हैं जो प्रकृति ने पुरुषों को कम और स्त्री को थोड़े ज्यादा दे दिए हैं।
नीचता कि इतनी हद कि तुम चंद likes और views पाने के लिए कभी वक्षस्थलों और नितंबों को हिला रही हो तो कभी जांघों को खोलकर अपने जननांग की तरफ भद्दा इशारा कर रही हो....
तुम्हारी इन reels को देखकर कुछ युवा उन reels को तुम्हारे व्यक्तित्व के साथ जोड़ कर देखने लगते हैं जिसके चलते कई बार तुम्हारे साथ दुराचार हो जाता है ।
और फिर किसी टेलीविजन चैनल पर उस मुद्दे पर चर्चा में कुछ तथाकथित नारी संरक्षण संस्थाएं समस्त पुरुष जाति की मानसिकता और चरित्र को लेकर उल जलूल शब्दावली का इस्तेमाल करती हैं तो यकीन मानिए हम अपनी ही लाड़ी और बेटी के सामने खुद को उस गुनाह के लिए शर्मिंदा महसूस करते हैं जो हमने किया ही नहीं......
चलो ठीक है...आपने कैसे कपड़े पहनने हैं हमें इससे कोई वास्ता नहीं लेकिन अगर आप अपने वक्षस्थलों और नितंबों को हिला-हिला कर reels डालोगे तो हमें आपत्ति है क्योंकि यदा-कदा हमारा फोन हमारे बच्चों के पास भी होता है और आपकी इन कामुक reels से उनके दिमाग पर नकरात्मक प्रभाव पड़ सकता है .....
मुझे उम्मीद है कि चन्द औरतों की इन हरकतों के कारण हो रहे समस्त नारी जाति के अपमान को रोकने के लिए भी कोई नारी संरक्षण संस्था मुहिम छेड़ेगी....
12/03/2024
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