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*स्वास्थ्य एवं शिक्षा दोनों ही जीवन का आधार है...*
हमारे शास्त्रों में एक श्लोक है, "आरोग्यम धनसंपदा।" स्वस्थ तन जिसके पास है, वह दुनिया का सबसे सम्पन्न व्यक्ति है। निरोगी काया भगवान का दिया वरदान है, जिसे संजोना हमारा दायित्व है।
भौतिक सुख कम या ज्यादा हो, हम संतुलन बना सकते है किन्तु, शरीर निरोगी न हो तो हम जीवन का सम्पूर्ण आनंद नहीं ले सकते। स्वस्थ शरीर का असर मानसिक सेहत पर भी पड़ता है, जो हमारी खुशियों के लिए जिम्मेदार है। सेहतमंद होने से हम ऊर्जावान रहते है और कार्यक्षमता बढ़ती है। अच्छी सेहत जीवन की अवधि बढ़ाकर हमारी उम्र बढ़ाती है। हमारा स्वस्थ होना ही वास्तविक दौलत है, जो हमें जीवन की सभी चुनौतीयों का सामना करने के लिए समर्थ बनाती है।
नियमित व्यायाम, ध्यान-योग, संतुलित एवं सात्विक भोजन, वैयक्तिक एवं बाहरी स्वच्छता, नियमित चिकित्सीय जाँच,भरपूर सूर्यप्रकाश, आवश्यक निद्रा और तनावरहित दिनचर्या से हम शरीर संपदा हासिल कर सकते है। अपने वजन को नियंत्रित रखना बहुत आवश्यक है। वजन नियंत्रण में होने के कारण गंभीर बीमारियों का खतरा स्वस्थ व्यक्ति में कम होता है।
मनुष्य काया अनमोल है, इसकी कद्र करते हुए इसे स्वस्थ बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। हर कोई अपना यह कर्तव्य निभाए तो, यह समाज, देश और विश्व अकल्पनीय सकारात्मकता से भर जाएगा।
*उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक स्वास्थ्य की भी आवश्यकता होती है और इसे प्राप्त करने का जरिया है - शिक्षा*। पृथ्वी पर सभी प्राणियों की तरह मनुष्य भी एक प्राणी ही है, लेकिन सोचने की क्षमता ही उसे सर्वश्रेष्ठ बनाती है। शिक्षा विचारों को दिशा देने का काम करती है। शिक्षा का महत्व अनादिकाल से रहा है। हमारे धर्मग्रंथों में भी श्रीराम, श्रीकृष्ण आदि देवताओं का शिक्षा के लिए ऋषियों के आश्रम में अपना बाल्यकाल बिताने का उल्लेख हैं। आधुनिक युग में शिक्षा का महत्व और भी बढ़ गया है। धन उपार्जन तो शिक्षा का आवश्यक किन्तु साधारण उपयोग है। अच्छी शिक्षा मनुष्य का बौद्धिक विकास कर, जीवन जीने का नजरिया देती है, नीति मूल्यों के साथ बगैर कोई समझौता किए हमारा दृष्टिकोण विस्तृत कर, सकारात्मक रूप से हर पहलु को देख और परख कर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। सही शिक्षा, हमारे उठने, बैठने, चलने, सोचने सब का अंदाज बदल हमारे व्यक्तित्व को निखारती है। बेहतर शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक है, इससे आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है। शिक्षा से ही समानता की भावना जागृत हो कर देश का विकास और वृद्धि संभव है। विद्याग्रहण एक अनंत प्रक्रिया है और हम आखरी साँस तक सीख सकते हैं।
सफल और प्रसन्न जीवन जीने के लिए अच्छा स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा दोनों समान रूप से आवश्यक है। शरीर से स्वस्थ व्यक्ति अपना निजी एवं सामाजिक दायित्व एक अस्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा ज्यादा सहजता एवं अच्छी तरह से निर्वहन कर सकता है और एक शिक्षित व्यक्ति अशिक्षित व्यक्ति से ज्यादा जागरूक होने के कारण रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादा स्वस्थ, ज्यादा कार्यक्षम एवं खुशनुमा व्यक्तित्व का मालिक बनते हुए राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायक बनता है।
अच्छे स्वास्थ के बिना मनुष्य अधूरा है और अच्छी शिक्षा के बिना मनुष्य का विकास अधूरा है। इसलिए *स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ही हमारे जीवन के महत्वपूर्ण आधार है।*
मनीषा साबू
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