Knowledge kings
24/10/2021
COOKING COMPETITION 2021-22
नगर स्थित PLODDER FOR SCHOOL(Nur to 8th,9th & 11th) में कोरोना जैसी महामारी के समाप्त होने के बाद 100 करोड लोगों के टीकाकरण की कंप्लीट होने की खुशी में PLODDER FOR SCHOOL में COOKING COMPETITION का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । आज के कार्यक्रम में प्रथम विजेता रही ''स्मार्ट क्लास किचन चैंपियंस''की छात्राएं अदिति सिंह ,पलक मिश्रा, आयुषी सिंह ,विनीता चौहान, तथा द्वितीय विजेता ''अन्नपूर्णा ग्रुप'' की छात्राएं पायल मिश्रा ब्यूटी शर्मा, अंजली प्रजापति साधना, अनामिका , छात्राएं रही इसी क्रम में तृतीय विजेता कुलदीप, अंकित ,अभिषेक, कृष्णा, शिवम, इरफान आदि छात्र रहे।
विद्यालय के प्रबंधक अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि COOKING COMPETITION से बच्चों में समानता एहसास होता है । इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य मि.पंकज गुप्ता ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के विकास में सहायक होते है,साथ ही बच्चों के विकास हेतु ऐसे कई कार्यक्रम कराने का आश्वासन दिया । इस दौरान विद्यालय के अन्य शिक्षक विकास त्रिपाठी ,सत्यजीत त्रिपाठी, अक्षय,काली पांडे, विकास राव,अर्चना मेंम, गोल्डी मेम, नीतू मेम,चांदनी मेम,अनीता मेम,आदि लोग मौजूद रहे ।
25/08/2021
_एक यादव IAS अधिकारी जो इतिहासकार भी हैं, के द्वारा लिखा गया कटु सत्य,,,,,,,_
*_मै ब्राम्हणों का बहुत सम्मान करता हूँ, इसलिए इस सत्य को सभी से साझा करने से, अपने आप को रोक नहीं पाया।_*
*ब्राह्मणों ने समाज को तोड़ा नही अपितु जोडा है।*
ब्राम्हणों ने विवाह के समय समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े *दलित* को जोड़ते हुये अनिवार्य किया कि *दलित* स्त्री द्वारा बनाये गये चूल्हे पर ही सभी शुभाशुभ कार्य होगें।
इस तरह सबसे पहले *दलित* को जोडा गया।
*धोबन* के द्वारा दिये गये सुहाग से ही कन्या सुहागन रहेगी इस तरह धोबी को जोड़ा।
*कुम्हार* द्वारा दिये गये मिट्टी के कलश पर ही देवताओ के पुजन होगें यह कहते हुये कुम्हार को जोड़ा।
*मुसहर जाति* जो वृक्ष के पत्तों से पत्तल/दोनिया बनाते है यह कहते हुये जोड़ा कि इन्हीं के बनाए गये पत्तल/दोनीयों से देवताओं का पुजन सम्पन्न होगे।
*कहार* जो जल भरते थे यह कहते हुए जोड़ा कि इन्हीं के द्वारा दिये गये जल से देवताओं के पूजन होगा।
बिश्वकर्मा* जो लकड़ी के कार्य करते थे यह कहते हुये जोड़ा कि इनके द्वारा बनाये गये आसन/चौकी पर ही बैठकर वर-वधू देवताओं का पुजन करेंगे।
फिर वह *हिन्दु* जो किन्हीं कारणों से *मुसलमान*बन गये थे उन्हें जोड़ते हुये कहा गया कि इनके द्वारा सिले हुये वस्त्रों (जामे-जोड़े) को ही पहनकर विवाह सम्पन्न होगें।
फिर उस *हिन्दु से मुस्लिम बनीं औरतों* को यह कहते हुये जोड़ा गया कि इनके द्वारा पहनाई गयी चूडियां ही बधू को सौभाग्यवती बनायेगी।
*धारीकार* जो डाल और मौरी को दूल्हे के सर पर रख कर द्वारचार कराया जाता है,को यह कहते हुये जोड़ा गया कि इनके द्वारा बनाये गये उपहारों के बिना देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिल सकता।
*डोम* जो गंदगी साफ और मैला ढोने का काम किया करते थे उन्हें यह कहकर जोड़ा गया कि *मरणोंपरांत* इनके द्वारा ही प्रथम मुखाग्नि दिया जायेगा।
इस तरह समाज के सभी वर्ग जब आते थे तो घर कि महिलायें मंगल गीत का गायन करते हुये उनका स्वागत करती है।और पुरस्कार सहित दक्षिणा देकर बिदा करती थी।
*ब्राह्मणों का दोष कहाँ है*?...हाँ *ब्राह्मणों* का दोष है कि इन्होंने अपने ऊपर लगाये गये निराधार आरोपों का कभी *खंडन* नहीं किया, जो *ब्राह्मणों* के अपमान का कारण बन गया। इस तरह जब समाज के हर वर्ग की उपस्थिति हो जाने के बाद ब्राह्मण *नाई* से पुछता था कि क्या सभी वर्गो कि उपस्थिति हो गयी है...?
*नाई* के हाँ कहने के बाद ही *ब्राह्मण* मंगल-पाठ प्रारम्भ किया करते हैं।
*ब्राह्मणों* द्वारा जोड़ने कि इस क्रिया को विदेशी मूल के लोगो ने अपभ्रंश किया।
देश में फैले हुये समाज विरोधी *साधुओं* और *ब्राह्मण विरोधी* ताकतों का विरोध करना होगा जो अपनी अज्ञानता को छिपाने के लिये *वेद और ब्राह्मण* की निन्दा करतेे हुये पूर्ण भौतिकता का आनन्द ले रहे हैं।
वस्तुतः हम यादव भी क्षत्रिय ही हैं और हमारा धर्म है ब्राह्मणों की रक्षा करना और मैं इससे सदा वचनबद्ध हूँ।
*अशोक कुमार यादव* (आई ए एस) *इतिहासकार*
कृपया ध्यान से सोचे वाकई ब्राम्हण ने हमेशा त्याग किया है समाज के सभी लोगों को जोड़ा है कभी तोड़ा नहीं है। यह भ्रम मन से, सोच से ,निकाल दीजिए।
इसके पास हमेशा राजा बनने की कुबत थी ।लेकिन मंत्री बन कर समाज का उद्धार किया है🙏🙏🙏🙏🙏
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