Omprakash Rajbhar
Cabinet Minister
at UP Government of Panchayati Raj, Minority Welfare, Muslim Waqf and Haj MLA From Zahoorabad
National President, Founder of
Suheldev Bhartiya Samaj Party.
सदस्यता ग्रहण समारोह एवं प्रेस वार्ता
प्रदेश कार्यालय लखनऊ
19/05/2026
30 मार्च 2015
“महल खड़े हैं जिन हाथों से, उन हाथों में छाले क्यों हैं…?”
ये सवाल पूरे अति पिछड़ा समाज की ओर से सीधे Akhilesh Yadav से है... वही अखिलेश यादव जिनके राज में 'ऐतिहासिक नियुक्ति घोटाला' हुआ, जिसने प्रदेश के न जाने कितने गैर-यादव पिछड़े समाज के लाखों ऊर्जावान युवाओं के सपनों को तहस-नहस कर के रख दिया।
हममे से बहुतों ने वो दौर देखा है। गांव की मिट्टी से आता हूं, लम्बे समय तक टेम्पू चलाकर परिवार और समाज के लिए संघर्ष किया है... गरीबी जिया हूं, गरीबी समझता हूं..
हमने देखा है, जब हम अति पिछड़े घरों की माताएं, जिनके पास गिनती के गहने होते थे, वो भी अपना गहना-गुड़िया गिरवी रख के बेटे को सरकारी नौकरी लगवाने के लिए दे देती थी। लालटेन और ढिबरी की रोशनी में बेटा- बेटी रात-रात भर पढ़ाई करते रहते थे... कुछ बनना है की ललक होती थी। मगर, सपा राज ने अति पिछड़ा समाज के युवाओं के जितने घाव दिये हैं, उन सब का हिसाब-किताब यहीं भरना होगा उसे।
कुशवाहा हों, राजभर हों, निषाद, मौर्य, लोहार, कहार, बिंद, प्रजापति, गोंड या कश्यप हों... इनके बच्चों को नौकरी दिलाने के लिए खुलेआम मोटा रेट तय होता था। हर विभाग में बकायदे इनके गुंडे और दलाल टाइप के एजेंट फिक्स होते थे, इसी काम के लिए...
हमने देखा है वो समय और अति पिछड़ा समाज के लिए लाठियां भी खाई हैं...इनके राज में वो हाल था कि कोई वेकेंसी निकलते ही गांव गांव में सेटिंग कराने वाले इनके दलाल काम पर लग जाते... 'ऊपर' तक पैसा पहुंचाता था...
एसडीएम से लेकर चपरासी तक की भर्ती में पूरा गैंग बनाकर वसूली होती थी... गांव गिरांव के गरीब यादव परिवारों को भी इन लोगों ने नहीं छोड़ा। हम अति पिछड़ों का तो कोई पूछनहार ही नहीं था...हमारे घरों के मेहनती बेटे-बेटियों की गलती बस इतनी थी कि उनके पास नौकरी के लिए घूस देने के पैसे नहीं थे... बेचने के लिए गहने और जमीन नहीं थीं... और सोर्स-पैरवी की ताकत भी नहीं थी...
कई बार रुपया-पैसा सब देने के बाद भी नौकरी नहीं मिलती थी। अपना पैसा मांगने गये तो सपाई गुंडों ने गरीब को गरिया के भगा दिया..., न थाना सुनता था न प्रशासन...
हम उस दौर की बात कर रहे हैं जब यूपी को 'उलटा प्रदेश' बनाकर यहां 'गुंडाराज', 'जंगलराज', 'माफियाराज' जैसे बहुत से 'राज' चला करते थे... और इन सबके 'महाराजा' थे यही...'चाचा-भतीजा'।
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