Vinay Rai Official
किसी जंगल के एक घने वृक्ष की शाखाओं पर चिडा-चिडी का एक जोडा रहता था। वो दोनों अपने घोंसले में बडे सुख से रहते थे।
सर्दियों का मौसम था। एक दिन ठंडी हवा चलने लगी और साथ में बूंदा-बांदी भी शुरु हो गई। उस समय एक बन्दर बर्फीली हवा और बरसात से ठिठुरता हुआ उस वृक्ष की शाखा पर आ बैठा। जाडे के मारे उसके दांत कटकटा रहे थे।
उसे देखकर चिडिया ने कहा, "अरे! तुम कौन हो? देखने में तो तुम्हारा चेहरा आदमियों का सा है, हाथ-पैर भी हैं तुम्हारे। फिर भी तुम यहाँ बैठे हो, घर बनाकर क्यों नहीं रहते?"
बन्दर बोला, "अरी! तुम से चुप नहीं रहा जाता? तू अपना काम कर। मेरा उपहास क्यों करती है?"
चिडिया फिर भी कुछ न कुछ कहती गई। इससे बन्दर चिड गया। क्रोध में आकर उसने चिडिया के घोंसले को तोड डाला।
इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हर किसी को उपदेश नहीं देना चाहिये। बुद्धिमान को दी हुई सलाह का ही फल होता है, मूर्ख को दी हुई सलाह का फल कई बार उल्टा निकल आता है।
Vinay Rai
21/08/2023
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