KALYAN ASHRAM ASSAM
31/10/2023
Kalyan Ashram Assam first time organised a basic janjati youth Training "Parichay Barg" . Three Districts included here Guwahati metro district, South Kamrup and Goalpara (Guwahati Bibhag) .
Age: 18 to 40 years .
Place : Sevabharti Janajati boys Hostal. Adingiri .
Enrollment date : 31/10/23
We request all our Janjati Sangathan kindly forward this Message to our youth to develop their personality and overall wellbeing .
Thank you .
K.A.A
29/10/2023
*पंखराज साहेब बाबा कार्तिक उरांव*
*लघु जीवन परिचय :-*
पंखराज साहेब बाबा कार्तिक उरांव जी का जन्म 29 अक्टूबर 1924 को झारखंड राज्य के गुमला जिला के करौंदा लिटाटोली ग्राम में हुआ । इनके पिता का नाम स्व. जायरा उराँव एवं माता का नाम स्व. बिरसी उराँव था। इन्होंने प्राथमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा गुमला जिला में प्राप्त कर आइ.एस.सी. की पढ़ाई पटना के साइंस कॉलेज में पूरी की । तदुपरांत इंजीनियरिंग की पढ़ाई बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज पटना से की ।
वे 1950-52 में बिहार सरकार के सिंचाई विभाग में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत रहे । इंजीनियरिंग की स्नातकोत्तर परीक्षा लंदन के विश्वविद्यालय से पास की । सितंबर 1955 से 1958 तक, ब्रिटिश रेल्वे में तकनीकी सहायक तथा ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट कमिशन, लंदन में वरीय तकनीकी सहायक आदि पदों पर भी कार्य किए । 1958 से 1961 तक विश्व के तत्कालीन सबसे बड़े आण्विक विद्युत गृह, हींकले पॉइंट अटामिक पावर स्टेशन में डिजाइनर के गरिमामय पद पर रहकर आपने कार्य किया ।
विदेश से वापस लौटने पर डॉ. कार्तिक उरांव मई 1961 से दिसंबर 1961 तक एच.ई.सी., रांची के वरीय इंजीनियर(डिजाइन) रहे । 1962 के लोकसभा चुनाव में आप लोहरदगा संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी रहे पर विजयी नहीं हो सके । 1962 से 67 तक फिर से एच.ई.सी. में उप मुख्य अभियंता के रूप में कार्यरत रहे । 1967 से 1977 तक आपने संसद में लोहरदगा संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया । 1977 से 1980 तक आप बिहार विधान सभा में विधायक भी रहे ।
1980 में तीसरी बार लोहरदगा के सांसद निर्वाचित हुए । भारत सरकार में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग में राज्य मंत्री (9 जून 1980 तक) और 8 दिसंबर 1981, मृत्युपर्यंत संचार राज्य मंत्री रहे । दिनांक 8 दिसंबर 1981 को संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने पहुंचे । वे संसद भवन में ही अचानक अस्वस्थ हो गए और हृदयगति रुकने के कारण उनकी मृत्यु हो गई *।महत्वपूर्ण योगदान* :-
वर्ष 1963 में पौराणिक पारंपरिक सामाजिक शासन व्यवस्था “पड़हा” का पुनर्गठन एवं पड़हा पत्रिका का सम्पादन आपके द्वारा हुआ । 1967-68 में रांची में सरहूल पुजनोत्सव एवं झांकी निकालने की परंपरा का शुभारंभ किया । जनजाति समाज के सांस्कृतिक उत्थान एवं उनकी पहचान को सुदृढ़ करने की दृष्टि से आपने कई कदम उठाए ।
15/10/2023
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