Garhwal Express
:)
अपनी यादों से कह दो ढाई दिन छुट्टी दे दें मुझे,
आखिर इश्क के हिस्से में भी वीकेंड होना चाहिए !! :)
जैसे जैसे ठंड बढ़ रही हैं, रह-रह कर मन मे ख़्याल आता है कि अब शादी कर ही लेनी चाहिए, ये सर्दियाँ सिर्फ कम्बल-रज़ाई के सहारे तो निकलने से रहीं। ;) :)
वो नहीं करती थी कुछ भी तरीके से,
उसकी बातों में उसकी हँसी उलझती थी,
वो नाराज़ भी हो तो सताती नहीं थी,
वो लड़ती भी तो ज़रा सी बात पे हँस देती थी,
तवील मुलाक़ातों के बाद भी कहती,
लो मैंने ये तो बताया ही नहीं तुमको।
वो मिले तो कहना उसे नहीं आया
छोड़ के जाना भी मुझे। :)
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Kotdwar
Garhwal
246149