Shreedham

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21/05/2026

**महामृत्युंजय मंत्र की शक्ति - हर बीमारी से जीत और उपवास का रहस्य**

`ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥`

ये ऋग्वेद का सबसे शक्तिशाली मंत्र है। "महा-मृत्यु-जय" = बड़ी मृत्यु पर भी विजय। ऋषि मार्कंडेय ने इसी मंत्र से यमराज को हराया था। आज भी लाखों लोग गंभीर बीमारी, एक्सीडेंट, ऑपरेशन के समय इस मंत्र का सहारा लेते हैं।

**डिस्क्लेमर**: मंत्र और उपवास दवा का विकल्प नहीं हैं। डॉक्टर का इलाज पहली प्राथमिकता है। मंत्र शरीर की हीलिंग पावर बढ़ाता है, दवा का असर दोगुना करता है।

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# # # **1. मंत्र का अर्थ - क्यों है ये इतना पावरफुल?**

| शब्द | मतलब | शरीर पर असर |
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| **त्र्यम्बकं** | तीन नेत्र वाले शिव | आज्ञा चक्र एक्टिव। पीनियल ग्लैंड से हीलिंग हार्मोन निकलते हैं |
| **सुगन्धिं** | दिव्य सुगंध वाले | शरीर की हर कोशिका में प्राण भरता है |
| **पुष्टिवर्धनम्** | पोषण देने वाले | इम्यूनिटी, Ojas बढ़ाता है। आयुर्वेद में Ojas = रोग प्रतिरोधक शक्ति |
| **उर्वारुकमिव बन्धनान्** | जैसे खरबूजा डंठल से अलग होता है | बीमारी का "डंठल" यानी जड़ से कनेक्शन कट जाता है |
| **मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्** | मृत्यु से मुक्त कर अमृत दो | मौत का भय खत्म। भय खत्म = 50% बीमारी खत्म |

**साइंस क्या कहती है?** मंत्र जाप से "नाइट्रिक ऑक्साइड" रिलीज होता है। ये खून की नलियां खोलता है, BP नॉर्मल करता है, सेल्स तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। 108 बार जाप = 15 मिनट का प्राणायाम।

# # # **2. बीमारी में महामृत्युंजय कैसे काम करता है?**

महाकाल का ये स्वरूप "वैद्यनाथ" भी कहलाता है - देवताओं का डॉक्टर।

**3 लेवल पर असर करता है:**

1. **शारीरिक लेवल**: मंत्र की वाइब्रेशन 432 Hz पर होती है। ये फ्रीक्वेंसी कैंसर सेल्स को तोड़ती है, हेल्दी सेल्स को बढ़ाती है। जाप करते समय नाभि से वाइब्रेशन फील करो - वहीं 72,000 नाड़ियों का जंक्शन है।

2. **मानसिक लेवल**: "मृत्योर्मुक्षीय" बोलते ही सबकॉन्शियस माइंड को मैसेज जाता है - "मैं मरूंगा नहीं"। प्लेसीबो इफेक्ट से 10 गुना। भय = कोर्टिसोल। कोर्टिसोल ज्यादा = इम्यूनिटी जीरो। मंत्र कोर्टिसोल गिरा देता है।

3. **कार्मिक लेवल**: बीमारी अक्सर पिछले कर्मों का फल होती है। महामृत्युंजय "संचित कर्म" जलाता है। इसलिए कई बार डॉक्टर हार मान लें, मंत्र काम कर जाता है।

# # # **3. बीमारी दूर करने की पूरी विधि - स्टेप बाय स्टेप**

**A. संकल्प लो**: सुबह नहाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाओ। बोलो - "हे महाकाल वैद्यनाथ, मैं [नाम] [बीमारी] से मुक्ति के लिए आपका महामृत्युंजय मंत्र 1.25 लाख जाप का संकल्प लेता हूँ।"

**B. जाप का तरीका:**
1. **समय**: ब्रह्म मुहूर्त 4-6 AM बेस्ट। न हो पाए तो सूर्यास्त के बाद।
2. **माला**: रुद्राक्ष की 108 मनके वाली। मध्यमा उंगली से फेरो।
3. **आसन**: ऊनी आसन, उत्तर या पूर्व मुख। बीमार हो तो लेटकर भी कर सकते हैं।
4. **संख्या**: रोज 11 माला = 1188 बार। 108 दिन में सवा लाख पूरा। सीरियस केस में रोज 51 माला।
5. **ध्यान**: जाप करते समय शिव को "अमृत कलश" लिए इमेजिन करो। हर मंत्र पर अमृत तुम्हारे रोग वाले अंग पर गिर रहा है।

**C. जल अभिमंत्रित करना**: तांबे के लोटे में पानी लो। 108 बार मंत्र पढ़कर पानी पर फूंक मारो। ये "मंत्र सिद्ध जल" हो गया। मरीज को दिन में 3 बार पिलाओ। दवा इसी जल से खाओ।

**D. हवन**: सवा लाख पूरा होने पर गाय के घी, तिल, जौ से 108 आहुति दो। "स्वाहा" के साथ बीमारी की राख बनती इमेजिन करो।

# # # **4. उपवास - मंत्र की पावर 100 गुना बढ़ा देता है**

आयुर्वेद कहता है: "लंघनं परम औषधं" - उपवास सबसे बड़ी दवा है। मंत्र + उपवास = कैंसर जैसी बीमारी भी हार मान लेती है।

**महामृत्युंजय के साथ 3 तरह के उपवास:**

| उपवास | विधि | कब करें | फायदा |
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| **सोमवार व्रत** | सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जल या फलाहार। शाम को शिव पूजा के बाद सेंधा नमक वाला खाना | हर सोमवार, 16 सोमवार | लिवर, किडनी, हार्मोन बैलेंस। शिव का दिन |
| **प्रदोष व्रत** | त्रयोदशी तिथि को। दिन भर फल, शाम को सूर्यास्त के 1.5 घंटे पहले से 1.5 घंटे बाद तक निर्जल | महीने में 2 बार | कालसर्प दोष, पुरानी बीमारी। प्रदोष काल में शिव तांडव करते हैं |
| **महामृत्युंजय अनुष्ठान उपवास** | 11 दिन तक। सिर्फ दूध + तुलसी, या खिचड़ी 1 टाइम | बीमारी बहुत गंभीर हो तब | शरीर डीटॉक्स होता है। कोशिकाएं खुद को खा कर कैंसर सेल्स खत्म करती हैं - "ऑटोफैजी" |

**उपवास का विज्ञान**: 16 घंटे कुछ न खाने से "ऑटोफैजी" शुरू होती है। 2016 में नोबेल प्राइज मिला इसे। शरीर खराब सेल्स, वायरस, बैक्टीरिया को खुद खा जाता है। जापान में कैंसर पेशेंट को कीमो के साथ फास्टिंग कराते हैं।

**क्या खाएं पारण में**: उपवास तोड़ते समय तला-भुना नहीं। मूंग दाल खिचड़ी + घी + सेंधा नमक। पहले 1 तुलसी पत्ता, फिर 1 चम्मच घी, फिर खिचड़ी।

# # # **5. किन बीमारियों में खास असर देखा गया है**

1. **कैंसर**: टाटा मेमोरियल के कई पेशेंट जाप + कीमो साथ करते हैं। दर्द 70% कम, कीमो का साइड इफेक्ट आधा।
2. **हार्ट ब्लॉकेज**: 108 दिन जाप + प्रदोष व्रत से बाईपास टलने के केस हैं। BP नॉर्मल होता है।
3. **किडनी फेल्योर**: डायलिसिस वाले पेशेंट का क्रिएटिनिन लेवल जाप से कंट्रोल में आया।
4. **डिप्रेशन/एंग्जायटी**: "मृत्योर्मुक्षीय" शब्द सीधा फियर सेंटर पर काम करता है। 21 दिन में नींद की गोली छूट जाती है।
5. **एक्सीडेंट/कोमा**: मरीज सुन नहीं सकता पर आत्मा सुनती है। कान में मंत्र प्ले करो। कई केस में कोमा से बाहर आए।

**जरूरी बात**: स्टेज-4 कैंसर या लास्ट स्टेज में भी मंत्र "शांतिपूर्ण मृत्यु" देता है। दर्द नहीं होता। उर्वारुकमिव = खरबूजा जैसे पककर खुद गिरता है, वैसे आत्मा शरीर छोड़ती है।

# # # **6. 5 गलतियाँ जो असर खत्म कर देती हैं**

1. **डाउट में जाप**: "होगा या नहीं" सोचते हुए 10 लाख भी कर लो, असर 0। श्रद्धा = 90% दवा।
2. **मांस-मदिरा**: जाप के 108 दिन तक पूरी तरह त्याग। एक बार भी लिया तो गिनती जीरो से शुरू।
3. **मोलभाव**: "ठीक हो जाऊंगा तो 5 किलो लड्डू चढ़ाऊंगा"। शिव भाव देखते हैं, लड्डू नहीं।
4. **बीच में छोड़ना**: संकल्प टूटा तो नेगेटिव एनर्जी अटैक करती है। शुरू करो तो पूरा करो।
5. **सिर्फ अपने लिए**: जाप के बाद "सर्वे भवन्तु सुखिनः" बोलो। जब सबके लिए मांगोगे, तुम्हें 10 गुना मिलेगा।

# # # **7. घर का इमरजेंसी महामृत्युंजय कवच**

अगर पूरा अनुष्ठान नहीं कर सकते तो ये 5 मिनट रोज करो:

1. **सुबह**: उठते ही 3 बार मंत्र बोलकर हथेली देखो, मुंह पर फेरो। "कराग्रे वसते लक्ष्मी" वाला
2. **दवा खाते समय**: दवा हाथ में लो, 11 बार मंत्र पढ़कर फूंक मारो, फिर खाओ। दवा अमृत बन जाएगी।
3. **रात**: सोने से पहले 108 बार सुनो - यूट्यूब लगा दो। नींद में हीलिंग होगी।
4. **अस्पताल में**: पेशेंट के सिरहाने "महामृत्युंजय यंत्र" रख दो। ऑनलाइन 200 रु का मिलता है।
5. **महामृत्युंजय काढ़ा**: तुलसी 11 पत्ते + गिलोय 1 इंच + काली मिर्च 3 + पानी। 108 बार मंत्र पढ़कर उबालो। बुखार, इंफेक्शन में रामबाण।

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# # # **आखिरी बात - डॉक्टर + दुआ = चमत्कार**

महामृत्युंजय मंत्र कोई जादू नहीं है। ये तुम्हारे अंदर के "वैद्यनाथ" को जगाता है। शरीर की हर सेल में शिव बैठे हैं। मंत्र उनको एक्टिवेट करता है।

उपवास शरीर साफ करता है, मंत्र मन साफ करता है, और दोनों मिलकर प्राण बढ़ाते हैं। जहां प्राण है, वहां रोग टिक नहीं सकता।

**सबसे बड़ा मंत्र**: "मानो तो गंगा, न मानो तो बहता पानी"। श्रद्धा से 1 बार भी बोलो तो काम करेगा, डाउट से लाख बार भी नहीं।

अगर घर में कोई बीमार है तो आज से ही शुरू करो। 1 माला, 1 तुलसी पत्ता, 1 लोटा जल - इतना तो सब कर सकते हैं।

**जय महाकाल। त्र्यम्बकं यजामहे।**

10/05/2026

जिसके घर में #बिल्वपत्र का पौधा होता है, उसके घर में सारे तीर्थ विराजमान होते हैं🚩
भारत में पेड़ पूजा नहीं, पेड़ को पहचानना है।
पीपल में प्राण, तुलसी में शुद्धि, नीम में औषधि — और बेलपत्र में स्वयं महादेव🔱
🌿
बेल को बिल्व, श्रीवृक्ष, शिवद्रुम कहते हैं। तीन पत्तियों वाला यह साधारण सा दिखने वाला पेड़, शास्त्रों में ब्रह्मांड का नक्शा है।

जिस घर के आंगन में बेल है, वह घर मकान नहीं, मंदिर है। वहाँ काशी, प्रयाग, केदार, सोमनाथ — सब आकर बैठ जाते हैं।

१. बेलपत्र — साक्षात शिव🔱

शिवपुराण, स्कंदपुराण, पद्मपुराण — तीनों एक स्वर में कहते हैं — बेल का वृक्ष शिव का स्थूल रूप है।

कथा है — एक बार पार्वती ने अपने पसीने से बेल का पेड़ बनाया, और शिव ने उसमें प्रवेश किया। इसीलिए बेल में माँ की ममता और पिता की शक्ति दोनों हैं।

जड़ में महादेव — क्योंकि जड़ पकड़ती है, जैसे शिव सृष्टि को पकड़ते हैं
तने में पार्वती — क्योंकि तना पोषण देता है, जैसे माँ
शाखाओं में दक्षिणायनी, कार्तिकेय, गणेश — परिवार
पत्तों में समस्त देवशक्तियाँ — ३३ कोटि देव
फल में लक्ष्मी — इसीलिए इसे श्रीवृक्ष कहते हैं
कांटों में धर्म — रक्षा

तीन पत्ती — त्रिनेत्र, त्रिशूल, त्रिगुण (सत्व, रज, तम), त्रिकाल (भूत, भविष्य, वर्तमान)। जब तुम एक बेलपत्र तोड़ते हो, तो तुम समय को छूते हो।

२. समस्त तीर्थों का वास

"दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्। अघोरपापसंहारं बिल्ववृक्षं नमाम्यहम्।।"

अर्थ — बेल को देखना, छूना, प्रणाम करना — अघोर पाप भी धो देता है।

क्यों? क्योंकि तीर्थ बाहर नहीं, भीतर हैं।

काशी — ज्ञान का तीर्थ — बेल की जड़ में शिव का ज्ञान
प्रयाग — संगम का तीर्थ — बेल की तीन पत्ती — गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम
केदार — तप का तीर्थ — बेल सर्दी, गर्मी, बारिश सहता है, तपस्वी की तरह
रामेश्वरम — भक्ति का तीर्थ — बेलपत्र राम ने भी शिव को चढ़ाया था

पद्म पुराण कहता है — जो वृद्ध है, बीमार है, गरीब है, तीर्थ नहीं जा सकता — वह अगर अपने घर के बेल के नीचे बैठ कर एक लोटा जल चढ़ा दे, "ॐ नमः शिवाय" कह दे — तो उसे चार धाम का पुण्य मिलता है।

क्योंकि तीर्थ स्थान पवित्र नहीं होते, शिव पवित्र करते हैं। और शिव बेल में हैं।

३. दरिद्रता का नाश और लक्ष्मी वास

बेल को श्रीवृक्ष क्यों कहते हैं?

श्रीसूक्त में लक्ष्मी कहती हैं — "मैं बिल्व वृक्ष में निवास करती हूँ।" जब समुद्र मंथन हुआ, लक्ष्मी निकलीं, साथ में बेल का बीज भी निकला। लक्ष्मी ने कहा — जहाँ बेल होगा, वहाँ मैं रहूँगी।

इसीलिए —

बेल के पेड़ के नीचे दीपक जलाओ — अंधेरा नहीं, दरिद्रता जाती है
बेल की जड़ में जल दो — जल नहीं, कर्ज उतरता है
बेल की पत्ती शिव को चढ़ाओ — पत्ती नहीं, तुम्हारी किस्मत चढ़ती है

गाँव में कहावत है — "जिसके द्वार बेल, उसके घर कभी न फेल।" क्योंकि बेल अन्न नहीं देता, अन्न टिकाता है। पैसा नहीं देता, पैसा रोकता है।

लक्ष्मी चंचल है, पर शिव स्थिर हैं। बेल में दोनों मिलते हैं — इसलिए धन आता भी है, रहता भी है।

४. पापों से मुक्ति और नकारात्मकता का नाश

आज लोग वास्तु दोष, पितृ दोष, शनि दोष से डरते हैं।

बेलपत्र एक ही उपाय है।

वास्तु — बेल की ऊर्जा उत्तर-पश्चिम में वायु को शुद्ध करती है। वायु तत्व मन है। मन शुद्ध, तो घर शुद्ध।
पितृ दोष — अमावस्या को बेल के नीचे तिल-जल चढ़ाओ, दीप जलाओ। पितर तृप्त होते हैं, क्योंकि बेल की जड़ पाताल तक जाती है — पितरों का लोक।
नकारात्मकता — बेल के पत्ते से निकलने वाली सुगंध में "मार्मेलोसिन" होता है — विज्ञान कहता है, यह बैक्टीरिया मारता है। शास्त्र कहता है, यह भूत-प्रेत मारता है। दोनों एक ही बात हैं — अदृश्य हानि।

बेल की छाया में बैठो — १० मिनट। मन शांत होगा। क्योंकि उसकी छाया ठंडी नहीं, शिव की गोद है।

५. लगाने के नियम — भक्ति नहीं, विज्ञान

दिशा — उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण)। वायु का कोना। बेल वायु शुद्ध करता है। ईशान (उत्तर-पूर्व) में भी लगा सकते हो — देव कोना।
दक्षिण में मत लगाओ — वह यम का कोना, बेल जीवन देता है।

दिन — सोमवार, प्रदोष, शिवरात्रि, श्रावण मास। बीज नहीं, पौधा लगाओ। बीज में अहंकार है, पौधा समर्पण।

सेवा — रोज जल दो, सोमवार को कच्चा दूध। कभी तोड़ो मत, माँगो — "हे बिल्व, एक पत्र देना।" पत्ती तोड़ने से पहले प्रणाम करो।

नियम — बेल के नीचे जूते मत रखो, थूको मत, झूठ मत बोलो। वह शिवलिंग है।

दीप दान — शाम को घी का दीपक — पितृ शांत, लक्ष्मी प्रसन्न, शिव जागृत।

६. अखंड सौभाग्य और कष्ट निवारण

स्त्रियाँ बेल की पूजा क्यों करती हैं? क्योंकि पार्वती तने में हैं।

सुहागन सोमवार को बेल को जल दे, तो अखंड सौभाग्य। कथा है — एक विधवा ने बेल सींचा, अगले जन्म में पार्वती बनी।

परिवार पर अकाल कष्ट — एक्सीडेंट, बीमारी, कोर्ट — टल जाता है, क्योंकि बेल का कांटा कष्ट को अपने ऊपर ले लेता है। इसीलिए बेल में कांटे हैं — वह तुम्हारी रक्षा के लिए।

बच्चे जो डरते हैं, उन्हें बेल के नीचे सुलाओ — डर भागेगा।

७. आधुनिक जीवन में बेल

फ्लैट में रहते हो? गमले में लगाओ। १२ इंच का गमला काफी। उत्तर-पश्चिम बालकनी में रखो।

रोज सुबह पत्ती देखो — प्रणाम करो। ऑफिस जाने से पहले एक पत्ती जेब में रखो — नकारात्मकता नहीं लगेगी।

रविवार को बेल मत तोड़ो — शिव का विश्राम। चतुर्थी, अष्टमी, चतुर्दशी को भी नहीं।

बेलपत्र चढ़ाते समय उल्टा चढ़ाओ — चिकनी सतह शिवलिंग पर। डंठल तुम्हारी तरफ। तीन पत्ती फटी न हो।

८. एक घर की कहानी

गोरखपुर के एक किसान के आंगन में बेल था। गरीबी थी। वह रोज जल देता। एक साल बाद बेटा नौकरी लगा, बेटी की शादी हुई, कर्ज उतरा।

लोग बोले — किस्मत। वह बोला — नहीं, बेल।

क्योंकि जब तुम बेल लगाते हो, तुम पेड़ नहीं लगाते, तुम तीर्थ लगाते हो। तुम काशी को निमंत्रण देते हो — "आओ, मेरे आंगन में रहो।"

और महादेव भोले हैं — बुलाओ तो आ जाते हैं।

निष्कर्ष

बेलपत्र सिर्फ पत्ता नहीं — वह त्रिशूल है जो दरिद्रता काटता है, वह त्रिनेत्र है जो पाप देखता है, वह त्रिकाल है जो समय साधता है।

जिसके घर में बेल है 🌿

उसके घर में शिव हैं
जहाँ शिव हैं, वहाँ शक्ति है
जहाँ शक्ति है, वहाँ लक्ष्मी है
जहाँ तीनों हैं, वहाँ सारे तीर्थ हैं
🌿
इसीलिए हमारे दादा कहते थे — मंदिर मत ढूंढो, बेल लगाओ। मंदिर तुम जाओगे, बेल तुम्हारे पास आएगा।

"दर्शनं बिल्ववृक्षस्य पुण्यं कोटिगुणं भवेत्।"

दर्शन मात्र से — करोड़ों तीर्थों का फल।

हर हर महादेव 🌿 बेलपत्रम समर्पयामि।

29/04/2026

नामदेव जी गोरा कुम्हार जी के यहाँ बैठे हुए थे। बड़े-बड़े महापुरुष भी वहाँ थे। मुक्ताबाई जी भी वहाँ थीं।

उन्होंने गोरा जी से कहा काका इन मटकियों में से कौन सी मटकी कच्ची है, मैं अभी बताती हूँ। बड़े-बड़े संत वहाँ बैठे थे, सब मुस्कुरा दिये।

उन्होंने नामदेव जी के सर पर मारा (जैसे एक कुम्हार मटकी को ठोक कर देखता है कि वो कच्ची है या पक्की), तो उन्होंने कहा हटिए, ये क्या कर रहीं हैं आप?

मुक्ताबाई जी ने कहा काका ये मटकी कच्ची है, बोल जो पड़ी। सब संतों ने भी हँस कर कह दिया कि हाँ, सच में कच्ची है।

नामदेव जी ने सोचा कि ठाकुर जी का दर्शन और साक्षात्कार ही एक मात्र सत्य है, और ठाकुर जी तो रोज़ मेरे साथ खेलते हैं और खाते हैं, फिर मैं कैसे कच्चा हूँ?

वो सीधा भगवान विठ्ठल जी के पास गए और कहा कि सबसे बड़ी सिद्ध अवस्था यही है कि भगवान भक्त से बात करें और आप तो मेरे साथ खेलते हो, फिर उन संतों ने ऐसा क्यों कहा कि मैं कच्चा हूँ, क्या में सच में कच्चा हूँ?

ठाकुर जी ने भी बोल दिया कि हाँ आप अभी कच्चे हैं। नामदेव जी ने पूछा फिर पक्का होना क्या होता है?

विठ्ठल जी ने कहा जंगल में एक शंकर जी का मंदिर है, वहाँ एक विसोबा खेचर नाम के संत हैं, आप उनके चरणों में बैठें और वो जो उपदेश करें, उसका पालन कीजिए, फिर आप पक्के हो जाएँगे।

नामदेव जी भगवान विठ्ठल के कहने पर विसोबा खेचर जी के पास गये। विसोबा जी शंकर जी के शिवलिंग पर पैर रख कर आराम से सोए हुए थे।

नामदेव जी ने सोचा कि कोई साधारण आस्तिक इंसान भी ऐसा नहीं कर सकता, लेकिन भगवान ने मुझे इनको गुरु बनाना को कहा, बात समझ नहीं आई।

नामदेव जी ने विसोबा जी से कहा पैर हटाइए महाराज, आप शंकर जी के ऊपर पैर रख कर क्यों सो रहे हैं? विसोबा जी ने कहा, बेटा जहाँ शंकर जी ना हों, वहाँ मेरे पैर रख दीजिए।

नामदेव जी ने उनके पैर पकड़े और जहाँ-जहाँ रखे वहाँ शिवलिंग प्रकट हो गया। नामदेव जी समझ गये कि यह तो कोई सिद्ध पुरुष हैं।

नामदेव जी ने विसोबा जी से कहा प्रभु, मैं आपकी महिमा को जान नहीं पाया, आप उपदेश कीजिए। विसोबा जी ने कहा बेटा बस इतनी बात समझनी है कि कोई ऐसा कण नहीं है जहाँ विठ्ठल ना हों। सब जगह विठ्ठल, सबमें विठ्ठल। नामदेव जी ने इस गुरु उपदेश को अपने हृदय में धारण कर लिया।

एक दिन नामदेव जी विठ्ठल जी के लिए रोटी बना रहे थे। वो रोटी रख कर घी गर्म करने गये। इतने में एक कुत्ता आया और विठ्ठल जी के लिए बनाई हुई रोटी को खाने लगा।

नामदेव जी ने कुत्ते से कहा, प्रभु ऐसे रूखी रोटी मत खाओ, मुझे इस पर घी लगा लेने दो पहले, और उस कुत्ते के पीछे दौड़ने लगे। उस कुत्ते से भगवान विठ्ठल प्रकट हो गये।

विठ्ठल जी ने कहा देखा, तुमने मुझे पहचान लिया ना। जब तुम्हें कच्ची मटकी कहा गया था तो तुम मंदिर में मुझ से शिकायत करने आये थे, और आज जब गुरु कृपा हो गई और आप पक्के हो गए तो आपने कुत्ते में भी मुझे ढूँढ लिया।

एक दिन नामदेव जी ने भगवान विठ्ठल जी से कहा कि अब आप कितना भी छुपो, मैं आपको पहचान लूँगा। विठ्ठल जी ने कहा अच्छा ठीक है, देखते हैं!

एकदम से नामदेव जी के मन में आया कि मंदिर में बड़ा कोलाहल हो रहा है, मंदिर के पीछे जाकर बैठते हैं, और शांति से प्रभु का ध्यान करते हैं।

पीछे बैठे तो कुछ लड़के वहाँ आकर खेलने लगे। उनके भजन में विक्षेप पड़ा, उन्होंने सोचा नदी किनारे चलते हैं। नदी किनारे जाकर बैठे तो वहाँ बैलगाड़ियाँ आकर रुकने लगी, नामदेव जी ने कहा शोर मत मचाओ, मैं यहाँ भजन कर रहा हूँ।

एक बैलगाड़ी से एक पुरुष और स्त्री गड़ासा (तेज धार वाला ब्लेड) लेकर निकले। वो आपस में बात करने लगे कि बड़ी भूख लगी है, आज कोई शिकार तो मिला नहीं, ये आदमी मिला है, इसी को मारकर खा लेते हैं।

दोनों नामदेव जी के पीछे भागने लगे। नामदेव जी ने भी अपनी धोती पकड़ी और भागने लगे।

नामदेव जी भागकर विठ्ठल जी के मंदिर में पहुँचे और हाँफने लगे। विठ्ठल जी ने पूछा कहाँ से भागते हुए आ रहे हो?

नामदेव जी ने कहा, बच गया प्रभु, एक स्त्री और पुरुष मुझे काट कर खाने की कोशिश कर रहे थे। विठ्ठल जी ने कहा, पहचान नहीं पाए ना, मैं ही तो था! * राधे राधे।

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