Satsang
VB2217:
সহ্য কর, কিন্তু দেখো—
মুহ্যমান্ না হ'তে হয় তা'তে—
আর তা' যেন মৃত্যু-আমন্ত্রণী
না হয়।
~ শ্রীশ্রীঠাকুর অনুকূলচন্দ্র
শাশ্বতী, বাণী সংখ্যা - ৪৮৪
#শাশ্বতী
VH2210:
अच्युत इष्टनिष्ठ होकर ही
बीजमंत्र जप करना चाहिए,
नहीं तो वह विकेन्द्रिकता में
विक्षेप ही लाता है;
अतः, योग का सार्थक कला-कौशल ही है—
अच्युत इष्टानुराग
अर्थात् इष्ट में अच्युतढंग से युक्त होना,
एवं करना-सार्थकता के साथ।
~ श्रीश्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
शाश्वती, वाणी संख्या - ३१३ (अनुवाद)
#शाश्वती
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