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Date : 1 st sep 2025,
नकद भुगतान को केवल दस्तावेजी प्रमाण (जैसे बैंक ट्रांसफर, रसीद) न होने के कारण अस्वीकार नहीं किया जा सकता, यदि प्रोमिसरी नोट पर उधारकर्ता की स्वीकारोक्ति दर्ज हो।”
केस का संक्षिप्त सारांश
मामला: Georgekutty Chacko बनाम M.N. Saji
न्यायालय: सर्वोच्च न्यायालय
पीठ: जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह एवं जस्टिस विपुल पंचोली
निर्णय दिनांक: 1 सितम्बर 2025
तथ्य (Facts):
प्रतिवादी (Borrower) ने याचिकाकर्ता (Lender) से ₹30.8 लाख का ऋण लिया।
इसमें ₹22 लाख बैंक ट्रांसफर से और ₹8.8 लाख नकद (Cash) में दिया गया।
पूरे ऋण की पुष्टि एक Promissory Note और Receipt में की गई।
कार्यवाही का क्रम (Procedural History):
1. ट्रायल कोर्ट: पूरा दावा (₹30.8 लाख + ब्याज) डिक्री कर दिया।
2. केरल हाई कोर्ट: केवल बैंक ट्रांसफर ₹22 लाख मान्य किया, Cash Payment खारिज कर दी।
3. सुप्रीम कोर्ट: हाई कोर्ट का आदेश पलट दिया और Trial Court की पूरी डिक्री पुनः स्थापित की।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (Judgment):
सिर्फ इस आधार पर कि राशि का कुछ हिस्सा Cash में दिया गया और उसका बैंक रिकॉर्ड नहीं है, उसे अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।
जब Promissory Note में पूरी राशि दर्ज है और उस पर हस्ताक्षर हैं, तो यह वैध साक्ष्य है।
उधारकर्ता (Borrower) को यह साबित करना होगा कि Cash Payment नहीं हुआ, मात्र “Bank Proof नहीं है” कहकर उसे नकारा नहीं जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि कई लेन-देन ऐसे होते हैं जिनका कोई दस्तावेजी सबूत नहीं होता, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि वे अवैध हैं।
परिणाम (Outcome):
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश दिया।
पूरी डिक्री ₹35.29 लाख (ब्याज सहित) बहाल की गई।
04/10/2024
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