Alok mishra
20/06/2026
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार से बातचीत के दौरान भरत तिवारी का एनकाउंटर करने वाले थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने कहा कि "भरत की किस्मत में मरना लिखा था।" यह बात कहते समय उनके चेहरे पर न कोई दुःख दिखाई दिया और न ही किसी तरह का पछतावा।
राजेश मालाकार ने यह भी कहा कि भरत तिवारी ने उनके जवानों पर गोली चलाई थी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में उसकी मौत हो गई।
हालांकि वायरल वीडियो में भरत तिवारी आत्मसमर्पण करता हुआ दिखाई देता है। ऐसे में आत्मसमर्पण के बाद क्या हुआ, यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब जांच से ही सामने आ सकेगा।
अश्विनी चौबे पहुंचे भरत तिवारी जी के यहाँ
बोले बहुत जल्द हम लोग गुं'डा को कुर्सी से हटाएंगे ...
नोएडा श्रमिक आंदोलन में शामिल होना एक 16 साल के लड़के को इतना भारी पड़ा कि वह 2 महीने तक वयस्क अपराधियों के साथ जेल में बंद रहा!
14 अप्रैल को नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन के दौरान पुलिस ने एक 16 वर्षीय लड़के को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि पुलिस ने पहले उसे फोन कर कहा कि उसके नाम का एक पार्सल आया है और उसे एक लोकेशन पर बुलाया। लड़का वहां पहुंचा तो पार्सल की जगह पुलिस उसका इंतजार कर रही थी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
हैरानी की बात यह है कि पुलिस रिकॉर्ड में उसकी उम्र 16 साल की जगह 25 साल दर्ज कर दी गई। इसी आधार पर उसे नाबालिगों के लिए बने सुधार गृह की बजाय सीधे वयस्क कैदियों वाली जेल भेज दिया गया, जहां वह पूरे दो महीने तक रहा।
मामला तब सामने आया जब पेशी के दौरान वकील माणिक गुप्ता की नजर उस पर पड़ी। कम उम्र देखकर उन्होंने उसकी जानकारी जांची और फिर अदालत में उसकी ओर से पैरवी की। ऑसिफिकेशन टेस्ट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट में 6 जून को स्पष्ट हो गया कि लड़के की उम्र वास्तव में 16 साल है।
इसके बाद लड़के को जमानत मिल गई है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में नोटिस जारी किया है।
सोचिए, अगर एक वकील की नजर उस बच्चे पर न पड़ती तो वह और कितने समय तक एडल्ट जेल में बंद रहता?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या किसी व्यक्ति की उम्र की पुष्टि किए बिना उसे वयस्क जेल भेज देना सिर्फ एक गलती है, या किसी बच्चे के अधिकारों के साथ गंभीर खिलवाड़?
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