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03/11/2021
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गुरु नानक जयंती’ को ‘विश्व पदयात्री दिवस’ घोषित करने का प्रस्ताव
✍️✍️संदर्भ:
हाल ही में, पंजाब पुलिस ने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की जयंती (गुरुपर्व) को ‘विश्व पदयात्री दिवस’ (World Pedestrian Day) के रूप में घोषित किए जाने का प्रस्ताव दिया है।
इस संबंध में शीघ्र ही ‘केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय’ को एक लिखित प्रस्ताव भेजा जा सकता है।
इस वर्ष 19 नवंबर को गुरु नानक की 552वीं जयंती मनायी जाएगी।
गुरु नानक देव को विश्व का सर्वाधिक सबसे स्मरणीय और श्रद्धेय पदयात्री क्यों माना जाता है?
15वीं और 16वीं शताब्दी के दौरान गुरु नानक देव ने काफी दूर दराज के स्थानों की यात्राएँ की थी। उस समय परिवहन के साधन काफी सीमित थे और लोग ज्यादातर नावों, जानवरों (घोड़े, खच्चर, ऊंट, बैलगाड़ी) से यात्रा करते थे, माना जाता है, कि गुरु नानक देव ने अपने शिष्य और साथी भाई मरदाना के साथ अपनी अधिकाँश यात्राएँ पैदल ही पूरी की थीं।
गुरु नानक देव द्वारा भ्रमण किए गए स्थान:
मक्का से हरिद्वार तक, सिलहट से कैलाश पर्वत तक, गुरु नानक ने अपनी यात्रा (जिसे ‘उदासी’ (Udaasis) भी कहा जाता है) के दौरान हिंदू, इस्लाम, बौद्ध और जैन धर्म से संबंधित सैकड़ों अंतरधार्मिक स्थलों का भ्रमण किया था।
उनके द्वारा भ्रमण किए गए कुछ स्थानों पर, उनके पधारने की स्मृति में गुरुद्वारों का निर्माण भी किया गया।
बाद के समय में, उनकी यात्रा को ‘जन्मसखियों’ नामक ग्रंथों में प्रलेखित किया गया।
गुरु नानक देव के यात्रा-स्थान, वर्तमान भौगोलिक विभाजनों के अनुसार नौ देशों – भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक, चीन (तिब्बत), बांग्लादेश, सऊदी अरब, श्रीलंका और अफगानिस्तान – में फैले हुए हैं।
प्रस्ताव का महत्व:
पंजाब पुलिस का यह प्रस्ताव “चलने का अधिकार” (Right to walk) या पैदल चलने वालों के अधिकारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शायेगा।
अपने पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली ‘समुदाय’ को विकसित माना जाता है और इस प्रकार समुदाय ‘सतत विकास लक्ष्यों’ में अपना योगदान करता है।
इसके अलावा, अकेले पंजाब में, हर साल औसतन कम से कम एक हजार पैदल चलने वालों की मौत होती है। पंजाब पुलिस का यह कदम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
गुरु नानक के बारे में:
गुरु नानक का जन्म लाहौर के निकट स्थित तलवंडी नामक एक ग्राम में हुआ था।
गुरु नानक की सबसे प्रसिद्ध शिक्षा यह है, कि ईश्वर एक है, और बिना किसी कर्मकांड या पुजारियों की मदद से हर व्यक्ति ईश्वर तक पहुँच सकता है।
उनकी सर्वाधिक उग्र सुधारवादी सामाजिक शिक्षाओं में जाति व्यवस्था की निंदा की गयी है और सिखाया कि हर व्यक्ति एक समान है, चाहे वह किसी भी जाति या लिंग का हो।
उन्होंने ‘वाहेगुरु’ के रूप में ईश्वर की अवधारणा प्रस्तुत की- जिसके अनुसार ईश्वर एक ऐसी इकाई जो आकारहीन, कालातीत, सर्वव्यापी और अदृश्य है। सिख धर्म में ‘ईश्वर’ को ‘अकाल पुरख’ और ‘निरंकार’ के नाम से भी जाना जाता है।
सिखों के सबसे पवित्र ग्रंथ ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में गुरु नानक द्वारा रचित 974 काव्य भजन शामिल किए गए हैं।
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