Rahul Sengar Blogger
31/07/2025
"कसूर सिर्फ इतना है कि ये जानवर पैदा हुए... इंसान नहीं!"एक-एक सांस में कैद का दर्द, हर दिन सिर्फ लोहे की सलाखें और जंजीरों में सिमटी आज़ादी।
ये चिड़ियाघर नहीं, कब्रगाह है ज़िंदा आत्माओं की, जहां हर कैदी बेगुनाह है।
कभी खुले जंगल में दौड़ने वाला भालू, अब दीवार से सिर टिका कर ज़िंदगी को कोस रहा है।
कभी उछलती-कूदती बंदर की नस्लें, अब पिंजरे में बैठी सिर्फ इंसानों को घूर रही हैं – जैसे कह रही हों, "क्या हमारा जीना गुनाह था?"
इंसानों के मनोरंजन के लिए, इन मासूम जानवरों को उम्रकैद की सजा दे दी गई – बिना किसी अपराध के।
कहते हैं जेल में कैदियों को सज़ा मिलती है उनके गुनाह की...
पर चिड़ियाघर – एकमात्र ऐसी जेल है, जहां सभी कैदी मासूम होते हैं।
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