Parmanand Rishideo
मैं तमाम उन सभी बन्धु बांधवों को पुनः आभार व्यक्त करता हूँ। जिन लोगों ने ,दोस्तों ने , सखा सम्बन्धियों ने ,भाइयों - बहनों ने, समर्थकों ने , अविभावकों ने तथा सलाहकारों ने या यहाँ तक की यात्रा में जिस भी स्तर पर मेरा साथ दिया है उन सभी महानुभावों को मेरा नमन और वंदन । जिनके बदौलत मेरे बच्चों ने जीवन में जो भी छोटी या बड़ी सफलता पाई है। मै पूरे परिवार के सदस्य आप सबों का आभारी हैं, शुक्रगुजार हैं। आपका आशीर्वाद ,आपका सहयोग आपका साथ ,आपकी सलाह और आपके द्वारा दी गई हिम्मत से जींवन के संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों से टकराने का एक मजबूत सम्बल का काम किया है।
दरअसल, बचपन से गरीबी भुखमरी, उपेक्षा, तिरस्कार ,अपमान और हर उन प्रतिकूल झंझावातों से संघर्ष हमारी जीवन शैली बन गई थी। बुरे से बुरे हालातों से टकराकर हमने जिंदगी के उबड़ , खाबड़ ,जर्जर ,वीरान और पथरीली जमीन पर हमने जीत के जो भी परचम लहराए हैं वे आप सबों के सहयोग के बिना सम्भव नहीं था । एक टुकडा रोटी और एक कतरा शुद्ध पानी की तड़प हमने शिद्दत से झेला है। जिंदगी भी इतनी कठोर हो सकती है उसकी तासिर बचपन से महसूस कर लिया था। भूख,बेबसी और लाचारी क्या होती है हमने बहुत कच्ची उम्र में उसका विषाक्त दंश झेलना सीख लिया है । हजारों तरह के झंझावातों के बीच छोटी उम्र में ही हमने दर्द,आंसू और कामयाबी के स्वाद चख लिये थे।हाँ ,उस उमड़ते घुमड़ते सैकड़ों विपत्तियों के बीच हमने कई बार जीत का रसास्वादन भी किया । वही छोटी छोटी सफलताओं ने हमें जीत का गुरुमंत्र दिया था,साथ मे अदम साहस और चुनौतियों को धूल चटाने का हौसला भी मिला था। कुछ मुफलिसी ,कुछ बेबसी और कुछ लाचारी के चलते हमने उस चंद खुशियों को भी नहीं जी पाया था।
आज मेरे बच्चे जो भी छोटी मोटी कामयाबी पाई है हमलोग उसे आप सबों के बीच बांट कर खुश होना चाहते हैं । जो खुशियां सिर्फ मेहनतकश कर्मवीरों को ही मिलता है। हम ने बड़े जमींदार, सबल और दबंग , सुसंगठित समाज के सपने और उम्मीदें बड़ी होती देखी है। हो सकता है हमारे बच्चों की कामयाबी लोगों को छोटी लगे और सोचे कि कौन बड़ा तीर मार दिया है ।लेकिन हमलोग जिंदगी भर जोखुशियां और सकुन की तलाश में दिन रात लगे रहते थे कि मेरे बच्चे सफल हो जाय ।जिंदगी जीने के लिए दो रोटी का इंतजाम कर ले। जो हमारे लिए यह एक टेढ़ी खीर ही थी। असफलता का डर हमेशा सजग और सतर्क करता रहा था। क्योंकि लोग आपको असफल देखने के लिए तिरछी नजर से घूर रहे थे।
आप लोगों ने हमारी खुशियों को मेरे साथ अपनाया , चंद पल के लिए ही सही , आपने हमे सराहा , मेरे बच्चों का आशीर्वाद दिया ,हम कृतज्ञ हो गए हम तो धन्य हो गये ।
उसी खुशी के कड़ी में मैं अपने लोकप्रिय सांसद आदरणीय प्रदीप कुमार सिंह जी को अपनी बच्ची की सफलता के लिए मिठाई खिलाकर उन बच्चों के लिए आशीर्वाद बटोरा।उनकी दोनों खुली हाथों से बच्चों ने शुभाशीष व शुभकामनाएं भी पाई ।
उसी खुशी के कुछ पल कैमरे में कैद हो गया है। उम्मीद है कि आप सबों का प्यार ,आशीर्वाद और blessing ताउम्र मिलता रहेगा । सभी सुधीजनों को पुनः मेरा दण्डवत ।
यहाँ मजबूत से मजबूत लोहा टूट जाता है।
कई झूठे इकट्ठे हो तो सच्चाई टूट जाता है ।
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