Acharya Anoopdev
24/05/2025
लखन बाबा की उम्र 103 साल , 43 साल जेल में रहने के बाद आख़िर निर्दोष साबित होकर बाइज़्ज़त रिहा हुए हैं , मतलब जो गुनाह किया नहीं था उसकी 43 साल की सज़ा काटी !
ग़नीमत है कि बाबा 103 साल तक ज़िंदा रहे , जेल में मार गए होते तो मरने के बाद भी वो गुनहगार रहते !
अब प्रश्न बनता है कि जिस क़ानून ने एक निर्दोष को सज़ा दी है , क्या उसपर कोई कार्यवाही होगी ???
बाबा 43 साल जेल में रहा , ग़लत फैसला सुनाने वाले जज को 5 साल तो जेल होनी चाहिए !
अनाप सनाप फैसले सुनाने वाले जजों पर लगाम लगेगी ! साथ ही साथ बाबा को इतने साल बिना जुर्म के सज़ा मिलने पर तगड़ा मुआवज़ा मिलना चाहिए !
11/05/2025
"नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गतिः।
नास्ति मातृसमं त्राणं नास्ति मातृसमा प्रपा॥"
माता के समान कोई छाया नहीं, कोई आश्रय नहीं, कोई सुरक्षा नहीं। माता के समान इस विश्व में कोई जीवनदाता नहीं॥
#मातृदिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ❤️🙏🏻
09/05/2025
मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए जीवन पर्यंत संघर्ष करने वाले महाराणा प्रताप की जयंती पर शत्-शत् नमन।
महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-
1... महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।
2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे । तब उन्होने अपनी माँ से पूछा कि- हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर आए ? तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना, जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ।”
लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था |
“बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ‘ किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं |
3.... महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था|
कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।
4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |
5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है, तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे, पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी|
लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |
6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |
7.... महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है, जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |
8.... महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फौज के लिए तलवारें बनाईं | इसी समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है| मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को |
9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पाई गई।
आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था |
10..... महाराणा प्रताप को शस्त्रास्त्र की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी, जो 8000 राजपूत वीरों को लेकर 60000 मुसलमानों से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे । जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |
11.... महाराणा के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था |
12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में
अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था । वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे ।
आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं, तो दूसरी तरफ भील |
13..... महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है, जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है |
14..... राणा का घोड़ा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके
मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए हाथी की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे|
15..... मरने से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे ।
16.... महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में।
महाराणा प्रताप के हाथी की कहानी:
मित्रो, आप सब ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हुँ।
रामप्रसाद हाथी का उल्लेख अल- बदायुनी, जो मुगलों की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।
वो लिखता है की- जब महाराणा प्रताप पर अकबर ने चढाई की थी, तब उसने दो चीजो को ही बंदी बनाने की मांग की थी । एक तो खुद महाराणा और दूसरा उनका हाथी रामप्रसाद।
आगे अल बदायुनी लिखता है की- वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था की उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था ।
वो आगे लिखता है कि- उस हाथी को पकड़ने के लिए हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यूह बनाया और उन पर14 महावतो को बिठाया, तब कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये।
अब सुनिए एक भारतीय जानवर की स्वामी भक्ति।
उस हाथी को अकबर के समक्ष पेश किया गया ।
जहा अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा।
रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने और पानी दिया।
पर उस स्वामिभक्त हाथी ने 18 दिन तक मुगलों का न तो दाना खाया और न ही
पानी पिया और वो शहीद हो गया।
तब अकबर ने कहा था कि- जिसके हाथी को मैं अपने सामने नहीं झुका पाया,
उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाउँगा.?
इसलिए मित्रो हमेशा अपने भारतीय होने पे गर्व करो।
पढ़कर सीना चौड़ा हुआ हो तो शेयर कर देना।
ाराणा_प्रताप
07/05/2025
का नेतृत्व करने वाली भारत की शेरनी कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने साबित कर दिया की महिलाएं किसी से कम नहीं है।
जय हिंद 🇮🇳
🇮🇳
#जयहिंद 🇮🇳
08/04/2025
जल्लादों ने मंगल पांडे को फांसी देने से कर दिया था इंकार, तब अंग्रेजों ने चली ये चाल
स्वतंत्रता सेनानी 'हुतात्मा' मंगल पांडे ने विद्रोह का बिगुल फूंका उससे अंग्रेजी सल्तनत कांप उठी थी।
कम लोग जानते हैं कि कहीं अंग्रेजो द्वारा गिरफ्तार ना हो जाए इसलिए इन्होंने खुद को गोली मार ली थी।
मगर चिकित्सा मिल जाने से ये बच गये। विद्रोह की शुरुआत से लेकर विरात्मा के शहीद होने तक आइये जानते हैं
मंगल पांडे से जुड़ी कुछ ख़ास और अनसुनी बातें।
स्वतंत्रता की देवी पुकार रही है 29 मार्च 1857 को अपनी मूंछो पर ताव देकर कमरे में बैठे मंगल पांडे के
दिमाग में कुछ चल रहा था। कमरे में फिर वे अचानक उठ खड़े हुए, बंदूक को माथे से लगा के चूमा,
गोली भरी और भारत माता की जय बोल कर बैरकपुर छावनी के उस कमरे से निकल गए।
बाहर आकर परेड ग्राउंड की तरफ जाने लगे। जब अन्य सिपाही साथियों ने उन्हें रोकना चाहा तो बोले
"स्वतंत्रता की देवी पुकार रही है, व्यर्थ प्रतीक्षा मत करो, फिरंगियो का सफाया करने का वक़्त आ गया है।"
इसके बाद किसी ने उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं की। कर्नल व्हीलर को उल्टे पांव लौटना पड़ा मंगल पांडे ने
पहले सार्जेंट मेजर ह्युसन को गोली मारी। फिर दूसरा अफसर लेफ्टिनेंट बॉब जो घोड़े पर सवार था
वो मंगल पांडे की और बढ़ा। मंगल ने दूसरी गोली चलाई जो घोड़े को लग गयी,
अफसर नीचे गिर पड़ा और फिर मंगल पांडे ने तलवार से उसका काम तमाम कर दिया।
विद्रोह की खबर बड़े अफसरों तक पहुच गयी। कर्नल व्हीलर घटना स्थल पर पंहुचा और गरजते हुए
सिपाहियों को आदेश दिया - "मंगल पांडे को बंदी बना लो।" पर कोई सिपाही हिला तक नहीं।
उल्टे एक सिपाही ने भी उतनी ही गरज के साथ कहा,
"हम आखिरी सांस तक अपने इस ब्राह्मण सिपाही की रक्षा करेंगे।"
सिपाहियों के बदले रुख को देखकर व्हीलर समझ गया की यहां से चले जाना ही बेहतर होगा।
30/03/2025
सभी को हिन्दू #नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ 🚩
जय श्री राम 🙏
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