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10/12/2023
पूर्वजन्म के विविध पुण्य अथवा पाप कर्म के फलस्वरूप इस जन्म में मानव को सुख तथा दु:खों की प्राप्ति होती है। पूर्व जन्म के पाप अथवा पुण्य कर्मों का ज्ञान जन्मकुण्डली 📜 के माध्यम से ही होता है।
जन्मकुण्डली 📜 में जन्म के समय के आकाश में विराजमान ग्रह-नक्षत्रों🪐 की स्थिति का रेखाचित्र वर्णित रहता है। उस जन्म-समय के अनुसार प्राप्त ग्रहयोगों के माध्यम से गुण और दोषों की समीक्षा की जाती है। पितृ दोष मुख्य रूप से एक पितृ-श्राप है। योग्य व विद्वान् ज्योतिषी जन्मकुण्डली को देखकर इस पितृदोष के बारे में बता सकते हैं।
इस दोष के कारण जीवन में बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे- बाल्यकाल में रोग🤒, शिक्षा📖 में रूकावट, शिक्षा में मन ना लगना, युवावस्था में विभिन्न विषयों के प्रति आसक्ति तथा व्यसन में संलग्नता, योग्यता के अनुरूप नौकरी💼 ना मिलना,अथक प्रयास और संघर्ष करने के बाद भी जीवन का निर्वाह साधारण रूप से होना तथा विवाह में विलम्ब, विवाह के उपरान्त सन्तान प्राप्ति में बाधा, घर-परिवार👪 में कलह, बिना अपराध के न्यायालय🧑⚖️📝 के द्वारा कारावास आदि का दण्ड तथा पारिवारिक सदस्यों की असमय रोग, विष, आत्महत्या अथवा दुर्घटना🤕 आदि विभिन्न कारणों से मृत्यु होना अथवा असाध्य रोगों से ग्रसित होकर लम्बे समय तक बिस्तर पर पड़े रहना आदि अनेक प्रकार के विषय हैं।
इस पूजा के दौरान पितृ गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है और आपके पितरों की शान्ति के लिए प्रार्थना🙏 की जाती है। विधि पूर्वक इस पूजा को संपन्न करने से वंशवृद्धि होती है और आपकी आने वाली 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है।
Vedic Stone सुनिश्चित करता है की
✔️संकल्प में आपके नाम और गोत्र का उच्चारण किया जाएगा।
✔️विधि पूर्वक विद्वान् पुजारी द्वारा पूजा को संपन्न किया जाएगा।
Astrologer Dr Ram Swaroop Sharma
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धन्यवाद 🙏🏽
01/10/2023
!! पितृ पक्ष मे इन 3 चीजों को कभी ना खरीदें !!
अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए पितृ पक्ष का समय विशेष महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति पितृपक्ष के दौरान अपने पितरों के नाम पर दान और तर्पण करता है, उसे अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है।
कहा जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितर अपने परिवार से मिलने धरती पर आते हैं और पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए भी यह समय बहुत लाभकारी माना जाता है।
साल 2023 में पितृपक्ष 29 सितंबर से लेकर 14 अक्टूबर, 2023 तक है। हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को पितृ पक्ष का आरंभ हाेता है और अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को इसका समापन होता है।
पंचांग के अनुसार 29 सितंबर की दोपहर 03 बजकर 29 मिनट पर भाद्रपद पूर्णिमा है और अश्विन माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 30 सितंबर की दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी।
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को लेकर कई नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करने से पितर प्रसन्न होते हैं। इस समय नई वस्तुओं की खरीदारी करना अशुभ माना जाता है और नया वाहन या नया घर खरीदने आदि जैसे शुभ कार्य भी वर्जित होते हैं। अब तक आपने यही सुना होगा कि पितृपक्ष में कोई भी शुभ काम नहीं करते हैं या नई वस्तुओं की खरीदारी करना भी इस समय वर्जित होता है लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि पितृपक्ष के दौरान 3 चीज़ों की खरीदारी बिल्कुल वर्जित है।
शास्त्रों में पितृपक्ष यानी श्राद्ध के दिनों में सरसों का तेल, नमक और झाड़ू न खरीदने की सलाह दी गई है। अगर आप श्राद्ध के दिनों में इन तीनों में से कोई भी एक चीज़ खरीदते हैं, तो आपको ‘त्रिदोष’ लग सकता है। आगे जानिए कि पितृपक्ष में इन 3 चीज़ों को खरीदने से क्यों मना किया जाता है।
• झाड़ू: वैदिक ज्योतिष में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। जिस घर में साफ-सफाई रहती है, वहां पर मां लक्ष्मी वास करती हैं और अगर आप श्राद्ध में झाड़ू खरीदते हैं, तो इससे आपको धन की हानि हो सकती है।
• सरसों का तेल: सरसों के तेल को शनि देव का प्रतीक माना गया है और शनि देव की दृष्टि बहुत तीक्ष्ण मानी जाती है। इस वजह से पितृपक्ष के दौरान सरसों का तेल खरीदने से मना किया जाता है।
• नमक: शास्त्रों में नमक को तीक्ष्ण वस्तुओं में रखा गया है इसलिए इसे श्राद्ध में नमक खरीदने से मना किया गया है।
पितृ पक्ष के नियमों को लेकर इस बात का भी ध्यान रखें कि आप श्राद्ध में इन 3 चीज़ों को अपने उपयोग के लिए नहीं खरीद सकते हैं लेकिन अगर आप अपने पितरों के लिए सरसों के तेल और नमक का दान करना चाहते हैं, तो उसके लिए कोई मनाही नहीं है। आप श्राद्ध में नए कपड़े खरीद कर भी दान कर सकते हैं। पितृपक्ष में दान करने से पितर जल्दी प्रसन्न होते हैं।
शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में झाड़ू, नमक और सरसों का तेल खरीदने से त्रिदोष लग सकता है और आपको बता दें कि त्रिदोष का संबंध अकाल मृत्यु, अपमृत्यु और रोग मृत्यु से होता है। जिस व्यक्ति की मृत्यु अचानक से हो जाती है या जो अपनी आयु पूरी नहीं कर पाता है, उसे अकाल मृत्यु कहते हैं। इसके अलावा जिस व्यक्ति की हत्या की गई हो, उसे भी अकाल मृत्यु की श्रेणी में रखा जाता है।
जिन लोगों की मृत्यु किसी बीमारी की वजह से होती है, उसे रोग मृत्यु कहा जाता है और दुर्घटना जैसे कि पानी में डूबने या ऊंचाई से गिरने की वजह से मृत्यु होने काे अपमृत्यु कहते हैं।
पितृपक्ष के दौरान निम्न उपाय करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है:
• श्राद्ध में सोमवार के दिन व्रत रखें और भूखे और जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं।
• मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर जाकर बजरंगबली को चोला चढ़ाएं।
• श्राद्ध में पिंडदान करने का भी बहुत महत्व है। इससे आपके पितरों को जल्दी शांति मिलती है।
• इस समय दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं। आप अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद और गरीब लोगों को दान दे सकते हैं।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें।
धन्यवाद!
Astrologer Dr. Ram Swaroop Sharma
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12/04/2022
!! भगवान विष्णु की असीम कृपा दिलाएंगे ये राशिनुसार उपाय !!
सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान निर्धारित है। इस साल में पड़ने वाली तमाम एकादशी तिथियों में एक होती है कामदा एकादशी 2022 (Kamada Ekadashi 2022)। कहते हैं इस दिन का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन के तमाम दुख और कष्ट दूर होने लगते हैं। इसके साथ ही कामदा एकादशी का व्रत और पूजन करने से भगवान विष्णु व्यक्ति के जीवन की सभी अधूरी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यही वजह है कि इस एकादशी का एक नाम फलदा एकादशी (Falda Ekadashi) भी है।
कामदा एकादशी 2022: शुभ मुहूर्त
12 अप्रैल, 2022 (मंगलवार)
कामदा एकादशी पारणा मुहूर्त: 13:38:42 से 16:12:07 तक 13, अप्रैल को
अवधि: 2 घंटे 33 मिनट
हरि वासर समाप्त होने का समय: 11:01:23 पर 13, अप्रैल को
कामदा एकादशी महत्व
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष को कामदा एकादशी मनाई जाती है। इस एकादशी के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी व्यक्ति कामदा एकादशी का व्रत करता है उसके जीवन से सभी कष्ट और परेशानियां दूर हो जाते हैं। साथ ही यह व्रत व्यक्ति के तन और मन को संतुलन करता है। इसके अलावा अधूरी मनोकामना को पूरा करने के लिए भी यह बेहद ही उपयुक्त माना गया है।
कामदा एकादशी व्रत विधि
एकादशी का व्रत निर्जला किया जाता है।
• ऐसे एकादशी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें।
• इस दिन की पूजा में भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल, आम, खरबूजे, दूध और पेड़ा आदि अर्पित करें।
• इस दिन की पूजा में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
• इसके अलावा यदि मुमकिन हो इस दिन मंदिर जाकर किसी पुजारी को या फिर जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन करा कर उन्हें अपनी यथाशक्ति अनुसार दक्षिणा दें।
हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि कोई भी व्रत हमेशा दान पुण्य के बाद ही पूरा किया जाता है। ऐसे में कोशिश करें एकादशी के अगले दिन जरूरतमंद लोगों को दान दें और उसके बाद ही अपने व्रत का पारण करें।
कामदा एकादशी के दिन राशि अनुसार अवश्य करें यह उपाय
• मेष राशि: इस दिन शुद्ध घी में सिंदूर मिलाकर इसे भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाएं।
• वृषभ राशि: भगवान श्री कृष्ण को माखन का भोग अर्पित करें।
• मिथुन राशि: भगवान वासुकीनाथ को मिश्री का भोग अर्पित करें।
• कर्क राशि: दूध में हल्दी मिलाकर भगवान नारायण को अर्पित करें।
• सिंह राशि: भगवान मदन गोपाल को गुड़ का भोग लगाएं।
• कन्या राशि: भगवान वेणु गोपाल को तुलसी पत्र अर्पित करें। (हालांकि यहां इस बात का ध्यान रखें कि तुलसी कभी भी एकादशी तिथि के दिन ना तोडें। आप चाहें तो पूजा से 1 दिन पहले तुलसी के पत्ते तोड़ कर रख सकते हैं और फिर इसे अगले दिन पूजा में शामिल कर सकते हैं।)
• तुला राशि: भगवान विष्णु को मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाएं।
• वृश्चिक राशि: भगवान राधेश्याम को दही में शहद मिलाकर अर्पित करें।
• धनु राशि: भगवान नन्द गोपाल को चने का प्रसाद चढ़ाएं।
• मकर राशि: भगवान गोविंद को लौंग इलाइची का तांबूल चढ़ाएं।
• कुंभ राशि: भगवान नारायण को नारियल मिशरी चढ़ाएं।
• मीन राशि: भगवान विष्णु को केसर का तिलक लगाएं।
सुख समृद्धि के लिए इस दिन कर लें इनमें से कोई भी एक उपाय
• यदि आपके विवाह में दिक्कतें आ रही है तो कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के समक्ष हल्दी की दो साबुत गांठे चढ़ाएं। ऐसा करने से आपकी परेशानी जल्दी ही दूर होगी।
• कामदा एकादशी के दिन जरूरतमंद लोगों को चने की दाल और मिठाई का दान करें। ऐसा करने से आपके जीवन में खुशहाली आएगी।
• जीवन में तरक्की प्राप्त करना चाहते हैं तो कामदा एकादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार स्पष्ट उच्चारण पूर्वक जप करें।
• भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस दिन की पूजा में भगवान विष्णु को पीले गेंदे का फूल चढ़ाएं।
• कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंदिर में मोर पंख या मुकुट चढ़ाएं। ऐसा करने से आपके दुःख-दर्द दूर होंगे और सुख समृद्धि का वरदान मिलेगा।
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25/12/2021
तुलसी पूजन दिवस, राष्ट्रनायक भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेई के जन्म जयन्ती एवं महमना पंडित मदन मोहन मालवीय जी कि जन्म जयन्ती के शुभ अवसर पर उन्हें हार्दिक अभिवादन एवं सत सत नमन एवं आप सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनायें, आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो.... ❤
बेटियां ना सिर्फ बेटों से किसी तरह कम नहीं होती, बल्कि बेटों से कहीं ज्यादा अच्छी होती हैँ....!
14/10/2021
!! सच्चा प्यार पाने के उपाय !!
सच्चा प्यार पाने के उपाय के ज़रिए आप जीवन में सच्चे साथी को पा सकते है इसलिए यह लेख आपके लिए बहुत ख़ास है। हम सभी को कभी न कभी किसी न किसी से सच्ची मोहब्बत ज़रुर होती है, हालाँकि सवाल है कि कितनों को उनका सच्चा प्यार मिल पाता है? वैसे तो कहा जाता है कि सच्चा प्यार हर किसी के नसीब में नहीं होता है, लेकिन यदि उसको पाने की तमन्ना आपके दिल में है तो यह लेख आपके लिए बहुत मददगार साबित होगा। इस लेख में सच्चा प्यार पाने के आसान तरीके बताए गए हैं। जिससे आपको आपके प्यार की मंज़िल ज़रुर मिलेगी। इसके अलावा कई लोगों को अपने खोये हुए प्यार की तलाश रहती है उनके मन में यह सवाल कौंधता रहता है कि खोया हुआ प्यार कैसे पाएं? और फिर वे जहाँ-तहाँ से खोया प्यार पाने का तरीका खोजते फिरते हैं इसलिए हमने इस लेख में खोया प्यार पाने के उपाय का भी ज़िक्र किया है।
प्यार एक ख़ूबसूरत एहसास होता है और जिनको मनचाहा प्यार मिल जाए तो इस ख़ूबसूरत अहसास की ख़ुशी का अंदाज़ा लगा पाना भी मुश्किल है। इस बात पर ग़ौर करते हुए इस लेख में मनचाहा प्यार पाने के उपाय भी दिए गए हैं। प्यार में तक़रार लाज़मी है और कभी-कभी यह तक़रार काफ़ी हद तक बढ़ जाती है जिससे प्रियतम रूठ जाता है लेकिन रूठे साथी को मनाने का भी अपना मज़ा है लिहाज़ा रूठा प्यार मनाने के उपाय जानकर आप अपने प्रियतम को भी आसानी से मना सकते हैं। तो चलिए जानते हैं असली प्यार को पाने के टोटके।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण:
सच्चा प्यार पाने के उपाय को लेकर वैदिक ज्योतिष में भी विश्लेषण दिया गया है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में स्थित पंचम भाव प्रेम से संबंधित होता है। यदि किसी जातक की जन्मपत्री में पंचम भाव और पंचमेश किसी क्रूर ग्रह से पीड़ित है अथवा कमज़ोर है तो जातक को प्रेम में कठिनाई या रुकावट का सामना करना पड़ता है। वहीं कुंडली में सप्तम भाव को विवाह का कारक माना गया है। जब पंचम एवं सप्तम भाव का प्रबल संबंध हो तो प्रेम को विवाह में बदलने के योग बनते हैं। इसके अतिरिक्त प्रेम का नैसर्गिक कारक ग्रह शुक्र है। जबकि राहु ग्रह प्रेम को चरम तक पहुँचाने का कार्य करता है।
सच्चा प्यार पाने के ज्योतिषीय उपाय:
कुंडली में स्थित शुक्र ग्रह को मज़बूत करें
कुंडली में पंचम भाव एवं इसके स्वामी को अधिक बलवान बनाने के उपाय करें
सप्तम भाव और सप्तमेश में स्थित ग्रह की शांति अवश्य कराएँ
एक-दूसरे को काले रंग की वस्तु दान न करें
लाल, गुलाबी और पीले रंग की वस्तुएँ गिफ़्ट में दें
कन्या अपने हाथों में हरी चूड़ियाँ और गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करें
प्रेमी युगल शुक्रवार एवं पूर्णिमा के दिन अवश्य मिलने का प्रयास करें
वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसे करें सच्चा प्यार पाने का उपाय
घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में शौचालय अथवा किचन न हो
प्रेम की प्रगाढ़ता के लिए घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में लाल रंग न लगाएँ
सच्चे प्यार को पाने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा में लव बर्ड्स का एक जोड़ा रखें
प्रेम संबंध को मजबूत बनाने के लिए दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में नीला रंग न हो
प्यार में ताज़गी बरक़रार रखने के लिए घर में पूर्व और पूर्वोत्तर ज़ोन को साफ़ रखें
घर में पूर्व या पूर्वोत्तर की दिशा में बेडरूम न हो
घर में दक्षिण की तरफ़ शयन कक्ष हो
उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा अपने प्रियतम का फोटो रखें
अपने प्रेम पत्रों को भी उत्तर-पश्चिम दिशा में संभाल कर रखें
अपने परिवार का वातावरण शांत रखें अन्यथा आपके रिश्ते ख़राब हो सकते हैं
सच्चा प्यार पाने के टोटके:
भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की तीन माह तक पूजा करें। इस पूजा को शुक्ल पक्ष में गुरुवार के दिन से प्रारंभ करें। पूजन के बाद ‘ओम लक्ष्मी नारायण नमः’ मंत्र का तीन माला जाप करें। साथ ही इन तीन माह तक प्रत्येक गुरुवार को मंदिर में प्रसाद चढ़ाएँ। ऐसा करने से आपको आपका सच्चा प्यार अवश्य मिलेगा।
माँ दुर्गा की पूजा करें और उनकी प्रतिमा पर लाल रंग का ध्वज या चुनरी चढ़ाएँ। ऐसा करने पर मनचाहे प्यार की प्राप्ति होती है।
भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में बांसुरी के साथ पान अर्पित करें और ऐसा तब तक करें जब तक कि प्रेमी आपके प्रेम को स्वीकार न कर ले। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा जी की प्रेममय तस्वीर का ध्यान कर ॐ हुं ह्रीं सः कृष्णाय नमः मंत्र का जाप करें इस मंत्र के जाप के बाद भगवान श्रीकृष्ण के ऊपर शहद छिड़कें।
पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव रुद्राभिषेक करें।
पूरे नियमानुसार सोलह सोमवार का व्रत रखें। इससे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और मनचाहा प्यार का वरदान प्राप्त होता है
आकर्षण बीज मंत्र मंत्र ॐ क्लीं नमः का जप करें
अपने प्यार की सुरक्षा के लिए ॐ हीं नमः मंत्र का जाप करें। इस मंत्र को एक सप्ताह तक प्रतिदिन एक हज़ार बार जाप करें। जाप के दौरान लाल वस्त्र और कुमकुम की माला धारण करें
प्रेम संबंध में मधुरता बनी रहे इसके लिए कामदेव को शाबर मंत्र के द्वारा प्रसन्न करें, मंत्र- ॐ कामदेवाय विद्य्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात्। इसके अलावा ॐ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा।’ मंत्र के जाप से मानसिक एवं शारीरिक आकर्षण में तीव्रता आती है
ॐ द्रां, द्रीं, द्रौं सः शुक्राय नमः मंत्र का विधिनुसार जाप करें। इससे खोया हुआ प्यार भी वापस मिल जाता है
हम आशा करते हैं कि उपरोक्त उपाय के माध्यम से आपको जीवन में सच्चा प्यार मिले और आपके प्रेम जीवन में ख़ुशियाँ बरक़रार रहें !
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