Epic Narration
24/09/2022
●ज़रूर पढ़ें न केवल महिलाएं, पुरुष भी...
मुझे अभी भी याद है- बस में मेरी बगल वाली सीट पर एक आदमी बैठा था. धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे फ्रॉक की ओर खिसक रहा था. मैं उस वक्त थर्ड् क्लास में थी. निस्संदेह, मैं नहीं जानती थी कि ये सब क्या हो रहा है लेकिन मैं आज भी उस दौरान की असहजता को महसूस कर सकती हूं. साल गुजरते गए और फिर मुझे एहसास हुआ कि इस तरह की पीड़ा जीवन भर की चुनौती है.
-एक 32 वर्षीय कामकाजी महिला, दिल्ली.
SEXUAL HARASSMENT IN PUBLIC SPACES: आखिर क्यों महिलाएं उत्पीड़न के बावजूद भी शांत रहती हैं? - Express Adda SEXUAL HARASSMENT IN PUBLIC SPACES: मुझे अभी भी याद है- बस में मेरी बगल वाली सीट पर एक आदमी बैठा था. धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे फ्रॉक की ओर खिसक
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