Dheerendra Kumar

Dheerendra Kumar

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11/06/2024

जब मैं मरूँगा

अपने साथ अपनी सारी प्रिय किताबों को ले जाऊँगा
अपनी क़ब्र को भर दूँगा
उन लोगों की तस्वीरों से जिनसे मैंने प्यार किया।
मेर नए घर में कोई जगह नहीं होगी
भविष्य के प्रति डर के लिए।

मैं लेटा रहूँगा। मैं सिगरेट सुलगाऊँगा
और रोऊँगा उन तमाम औरतों को याद कर
जिन्हें मैं गले लगाना चाहता था।

इन सारी प्रसन्नताओं के बीच भी
एक डर बचा रहता है :
कि एक रोज़, भोरे-भोर,
कोई कंधा झिंझोड़कर जगाएगा मुझे और बोलेगा --
'अबे उठ जा सबीर, काम पे चलना है।'

अनुवाद - गीत चतुर्वेदी

30/04/2024

स्त्री तो ख़ुद डूब जाने को तैयार रहती है, समदंर अगर उसकी पसंद का हो!

~ अमृता प्रीतम

06/02/2024
01/01/2024

वर्ष नव,
हर्ष नव,
जीवन उत्कर्ष नव।

नव उमंग,
नव तरंग,
जीवन का नव प्रसंग।

नवल चाह,
नवल राह,
जीवन का नव प्रवाह।

गीत नवल,
प्रीति नवल,
जीवन की रीति नवल,
जीवन की नीति नवल,
जीवन की जीत नवल!

हरिवंशराय बच्चन

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