Navy Buff
25/12/2023
मेवाड़ के महाराणा सांगा राजपूताने केे अंतिम नेतृत्वकर्ता थे। कई ज़ख्मों की वजह से इनको "मानवों का खण्डहर" कहा जाता है।
कर्नल जेम्स टॉड ने महाराणा सांगा को "सैनिकों का भग्नावेश" व "सिपाही का अंश" कहा। महाराणा सांगा ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को परास्त करने के बाद "हिन्दुपत" की उपाधि धारण की।
#इतिहास
25/12/2023
"बूंदी राव सुरतन सिंह हाड़ा से संबंधित एक ऐतिहासिक भ्रम"
इन्हें राव सुल्तान सिंह हाड़ा के नाम से भी जाना जाता है।
भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप धारावाहिक में बूंदी के राव सुरतन सिंह हाड़ा को बेहद खराब तरह से दर्शाया गया था। अब जानते हैं वास्तविकता....
1554 ई. में राव सुरतन ने किसी कुसूर पर नाराज़ होकर अपने सामंत सहसमल हाड़ा व सांतल की आँखें फुड़वा दीं। इस कुकृत्य की ख़बर जब मेवाड़ नरेश को लगी, तो महाराणा उदयसिंह जी ने फ़ौरन राव सुरतन हाड़ा को बूंदी की राजगद्दी से खारिज कर राव सुर्जन हाड़ा को बूंदी का राज दिलाया।
राव सुर्जन हाड़ा वीर अर्जुन हाडा (चित्तौड़ के दूसरे साके में वीरगति पाने वाले) के पुत्र थे।
सगारथ झल्लन के हित सोध, बढ्यो मरुमाल महीप विरोध।
पदच्युत बुन्दियतें सुल्तान, दियो नृप सुर्जन को वह थान।।
कुछ वर्षों बाद राव सुरतन हाड़ा मेवाड़ आए और अपनी पुत्री शाहमति बाई हाड़ा का विवाह कुँवर प्रताप से करवाकर महाराणा उदयसिंह जी से अपने अपराधों की क्षमा मांगी, पर ऐसा करने के बाद भी उन्हें बूंदी का राज नहीं मिला। इन्हीं रानी शाहमति बाई हाड़ा से महाराणा प्रताप के पुत्र पुरणमल हुए, जिनके वंशज पुरावत कहलाते हैं।
(फोटो बूंदी के तारागढ़ दुर्ग का है)
पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत
#इतिहास
25/12/2023
जब महारानी अजबदे कंवर जी ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को वन में जीवन यापन करते हुए अकबर से संघर्ष करने की सलाह दी, तो महाराणा को अपनी प्रिय रानी पर बड़ा गर्व हुआ।
लेकिन फिर महाराणा प्रताप को चिंतित देखकर महारानी अजबदे बाई जी समझ गईं और उन्होंने महाराणा से कहा कि "आप हमारी चिंता न करें। हम सहर्ष इस पथ पर आपके साथ उसी प्रकार रहेंगे, जिस तरह भगवान राम के साथ माता सीता ने बनवास काटा था"
#इतिहास
14/12/2023
1945 में दिल्ली के सरकारी मुलाज़िम अपने दफ़्तर से लौटते हुए।
#इतिहास
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