Srishti Civil Classes

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19/12/2025

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13/12/2025

#देहरादून के #घंटाघर के बनने की कहानी:

देहरादून में एक प्रसिद्ध जज हुआ करते थे लालाजी बलवीर सिंह। उनकी याद में उनके बेटे कुंवर आनंद सिंह ने देहरादून में एक घंटाघर बनवाने का निश्चय किया। पर कुछ लोग नहीं चाहते थे कि शहर के बीच में बलवीर सिंह के नाम से घंटाघर बने। वहाँ पहले से ही पानी की दो टंकियाँ थीं और एक समाज की ज़मीन से जुड़ी होने के कारण विवाद भी हुआ।

देहरादून नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष आनंद स्वरूप गर्ग इस विचार के पक्ष में थे कि शहर की सुंदरता के लिए घंटाघर का निर्माण ज़रूरी है। उन्होंने कुंवर आनंद सिंह को सलाह दी कि अगर राज्यपाल सरोजिनी नायडू इसकी नींव रखेंगी तो किसी को आपत्ति नहीं होगी। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद 24 जुलाई 1948 को सरोजिनी नायडू ने शिलान्यास किया और ज़मीन का विवाद खत्म हो गया।

घंटाघर का निर्माण कुंवर आनंद सिंह ने अपने परिवार के सहयोग से पूरा कराया। इसमें लगभग पचास हजार रुपये का खर्च आया, जो बलवीर सिंह की पत्नी श्रीमती समभरी देवी और उनके बेटों आनंद सिंह, हरि सिंह, शेर सिंह और अमर सिंह ने मिलकर दिया।

अक्टूबर 1953 में तत्कालीन रेल और यातायात मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इसका उद्घाटन किया। घंटाघर की ऊँचाई करीब 80 फीट रखी गई थी, और इसका निर्माण चौधरी नथूलाल, नरेंद्र देव सिंघल और ईश्वर प्रसाद ने किया। इंजीनियर हरिशंकर मित्तल और रामलाल ने इस काम को पूरा किया।

घंटाघर बनने के बाद कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई कि इसकी मीनार टेढ़ी है और कभी भी गिर सकती है। लेकिन बाद में वास्तु विशेषज्ञों ने थियोडोलाइट से माप कर बताया कि मीनार एकदम सीधी है और जनता को डरने की कोई जरूरत नहीं है।

आख़िरकार घंटाघर का निर्माण पूरा हुआ और इसे नगर पालिका देहरादून को सौंप दिया गया जिसमें समय के हिसाब से आज तक बदलाव ही हो रहे हैं बदलाव जरूरी है लेकिन इसकी आधारशिला उसकी वास्तविकता से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

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20/11/2025
28/10/2025

भारतीय सेना में दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार #परमवीर_चक्र किसने डिजाइन किया था? दरअसल परमवीर चक्र को डिज़ाइन करने वाला कोई पुरुष नहीं बल्कि महिला थी, जिनका नाम सावित्री खनोलकर था, असल नाम ईव यवन्नी मड़ाय मोडास था। जो एक स्विस नागरिक थीं। उन्होंने भारत फ़ौज के एक बड़े अफ़सर मेजर जनरल विक्रम रामजी खनोलकर से शादी की। और फिर भारत में ही रहने लगी। इसी दौरान उन्हें भारतीय सेना परमवीर चक्र डिज़ाइन करने का मौक़ा दिया गया, और उन्होंने डिज़ाइन किया।

ज्ञात रहे के भारत में पहला परमवीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा को मिला, जो इसी परिवार से ताल्लुक़ रखते थे।



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