ा परिवार से हैं। वे स्वयं एक शिक्षिका रही हैं। शौर्य का विवाह भी टिहरी के नौटियाल परिवार में जन्मी दिव्या के साथ हुआ है जो आज एक ख्याति प्राप्त कैंसर की डॉक्टर हैं।
शिक्षा
पढ़े-लिखे, अनुशासित माहौल में शौर्य की शिक्षा का शुभारंभ 'आर्मी पब्लिक स्कूल' से हुआ। उच्चतर शिक्षा के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदु कॉलेज में दाखिला लिया। जहाँ से उन्होनें अर्थशास्त्र (ऑनर्स) में प्रथम श्रेणी में डिग्री पाई। शौर्य हमेशा खेल-कूद, वाद-विवाद व अन्य शैक्षिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में अग्रणी भूमिका निभाते रहे।
प्रोफेशनल कैरियर
उनकी प्रतिभा को देख मात्र 20 वर्ष की आयु में 'आर्थर एंडरसन' में उन्हें नौकरी दी। साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने का अवसर दिया। 23 वर्ष की उम्र में यह डिग्री हासिल कर वह सी.ए बने। उनकी क्षमता, योग्यता व प्रतिभा को देख कर दुनिया के दस अग्रणी बिजनेस स्कूलों में शामिल इंग्लैण्ड के ‘लंदन बिजनेस स्कूल’ तथा अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय ने उन्हें M.B.A का प्रस्ताव दिया। M.B.A. की डिग्री हासिल कर वह कामयाब प्रोफेशनल बने। उन्होनें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कम्पनियों जैसे मोर्गन स्टेनले, जी.ई कैपिटल आदि में उच्च पदों पर काम किया जहां उन्हें व्यावसायिक श्रेष्ठता हासिल करने का मौका मिला।
उपलब्धियां
हर कदम पर अपनी प्रतिभा के बल पर पद, सम्मान व उपलब्धियाँ हासिल करते हुए कालांतर में शौर्य ने वित्तीय सलाहकार फर्म बनाई और बड़े-बड़े उद्योगों को विलय व अधिग्रहण तथा वित्त संबंधी सलाह व सहयोग दिया। देश के पॉवर सेक्टर में कितनी ही कम्पनियों ने उनकी सेवाएँ लीं। वर्ष 2012 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित ‘इन्स्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज’ ने ‘उद्योग रत्न’ अवॉर्ड दिया। वर्ष 2015 में शौर्य को अमेरिका में प्रतिष्ठित ‘आइजनहॉवर फैलोशिप’ के लिए चुना गया। यह समान दुनिया भर में कुछ गिने-चुने लोगों को मिलता है। जो अपने प्रसायों से दुनिया की बेहतरी के लिए कुछ अलग, अनूठा करने का प्रयास करते हैं।
आज शौर्य एक परिपक्व युवा, कामयाब पेशेवर, जिम्मेदार पति, पिता और बेटे के साथ-साथ देश के कर्तव्य परायण, राष्ट्रवादी व संवेदनशील नागरिक भी हैं।
व्यापक सोच, गंभीर मुद्दे
अपने समाज, राष्ट्र व संस्कृति को हर पल मन में बसाए शौर्य अनेकों संस्थाओं, कार्यक्रमों, विषयों से जुड़े हैं। हमेशा सस्ती लोकप्रियता से दूर वह काम को अंजाम देने की नीति में विश्वास रखते हैं। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से प्रेरित तथा राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए ‘इंडिया फाउण्डेशन’ जैसे थिंक टैंक के संस्थापक हैं। उसके माध्यम से वे सामाजिक उत्थान व देश से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण विषयों, मुद्दों, योजनाओं के मूर्तिकार भी हैं।
एक अन्य संस्था 'धर्मा लाइफ फाउण्डेशन' के माध्यम से शौर्य नए-नए विचारों व प्रयोगों से युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों तथा ग्रामीणों के सशक्तिकरण व रोजगार उन्नयन पर काम कर रहे हैं।
गढ़वाल के लिए
देश-दुनिया घूमने और एक सफल प्रबन्धक व एक सफल व्यवसायी बनने के बाद शौर्य को लगता है कि उन्हें अपने ही देश में, देशवासियों के लिए कुछ करना चाहिए। जिसमें वह अपनी पढ़ाई-लिखाई, दूरदृष्टि के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीकी, विचार और क्रियान्वयन का व्यवहारिक समावेश कर सकें। अपने समाज, राज्य, राष्ट्र के लिए नए विचार, नए आइडिया देकर भारत के सुखद, संपन्न भविष्य के निर्माण में योगदान देते हुए। शौर्य ने गढ़वाल और उत्तराखंड को केंद्र में रखकर एक अनूठे आंदोलन, अनूठे मंच की कल्पना की है। उसे ‘बेमिसाल गढ़वाल’ का नाम दिया है। यह उनकी अपनी संस्कृति और समाज के प्रति उमड़ती-घूमड़ती भावनाओं का एक दर्पण है। जो शौर्य को पल-पल गौरव का अनुभव कराता है और अपनी इस मातृभूमि, मिट्टी के लिए कुछ करने को उकसाता है। इस मिशन और मंच पर सभी गढ़वाल प्रेमियों, हितैषियों, शुभ-चिंतकों को वह सादर भागीदार बनाने के लिए तत्पर हैं।