Haal e Dil
दौर msg ka भी और खत भी पुराने देखे।
यार हम लोगों ने दोनों ही ज़माने देखे।
अपने हाथों से ही फिर फोड ली आंखें अपनी, उसने जब जंग में अंधों के निशाने देखे।
एक ही शक्श पे जिसने यह लुटा दी दुनिया , ऐसे ऐसे भी यहां हमने दीवाने देखे।
वो जो देते हैं ज़माने में नसीहत हमको
ऐसे लोगों के भी कोठे पे ठिकाने देखे।
अपनी मेहनत के नतीजों पे तरस आया हमे, जब फकीरों के घर में खजाने देखे।।
"हाल-ए-दिल कहने की अब हिम्मत नहीं रही,
चुपचाप रहकर दर्द को सहने की आदत नहीं रही।
तेरे बिना जीने की ख्वाहिश थी कभी,
पर अब तो तेरे बिना जीने की ताकत नहीं रही।"
~
वैसे तो शिवरात्रि हर साल आती है,
पर इस बार की कुछ अलग है,
क्योंकि हमने महादेव से आपको पाने की अर्जी लगाई है..!!
हज़ारो बाते दिल में दफ़न करके
अब ख़ामोश रहना पसंद है मुझे..
~ Unknown
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