Satyendra Kumar
ज्ञानी और अज्ञानी
समर्पण
धर्म का भूसा
देह देवालय में और चित्त संसार में—भीतर पाखंड और बाहर भक्ति? बिना सजगता और अंतःकरण की शुद्धि के की गई प्रार्थना ईश्वर की स्तुति नहीं, अपितु उनका सीधा अपमान है।
समाज के दोहरे चरित्र पर आचार्य श्री का सबसे प्रखर प्रहार। सत्य को स्वीकार करने का साहस है तो यह वीडियो अवश्य देखें।
#आत्मबोध #धर्म #पाखंड_पर_प्रहार
कर्म और साक्षीभाव
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