Bundi Riyasat
24/06/2026
बून्दी स्थापना दिवस के अवसर पर प्रकाशित समाचार पत्र।
24/06/2026
बून्दी के 785वें स्थापना दिवस पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं
बून्दी नगर तथा हाड़ौती राज्य के संस्थापक "राव देवराज हाड़ा" को कोटि-कोटि नमन
इतिहास-
बम्बावदा ठिकाने के शासक राव देवराज हाड़ा ने विक्रम संवत 1298 आषाढ़ कृष्ण नवमी,मंगलवार (24 जून 1241) को बन्धु घाटी में जैता मीणा को पराजित कर बून्दी की स्थापना की थी।
राव देवराज हाडा की पुत्री के विवाह में जोगणिया माता, जोगण का वेश धारण कर पधारी थी अतः वे जोगणिया माता के नाम से प्रसिद्ध हुई। जोगणिया माता के आदेशानुसार राव देवराज हाडा ने बंधु घाटी के क्षेत्र को जीतकर बून्दी की स्थापना की थी।
प्रसिद्ध इतिहासकार जेम्स टॉड, सूर्यमल्ल मिश्रण व जगदीश सिंह गहलोत के अनुसार बून्दी स्थापना से पूर्व यहाँ मीणा जनजाति का कबीला निवास करता था।जिसके सरदार जैता मीणा थे। इस स्थान के पहाड़ी क्षेत्र को बन्धु घाटी व वर्तमान बून्दी जहाँ बसी है उसे बन्धु का नाल कहा जाता था।
राणा कुम्भा के रणकपुर के अभिलेख में बून्दी के तत्कालीन नाम वृंदावती का उल्लेख है।
राव देवराज हाडा द्वारा उमरथूना में महल, बावड़ी और हिंगलाज माता के मंदिर का निर्माण करवाया तथा उमरथूना के समीप वर्तमान भवानीपुरा में बांगा माता के मंदिर व बावड़ी का निर्माण करवाया गया।
स्थापना-
किसी शहर की स्थापना का अर्थ है वहाँ प्रशासन कायम करना तथा उस भूभाग की सुरक्षा के दायित्व का निर्वहन करना।किसी शहर को स्थापित करते समय वहाँ सभी जाति-वर्गों के लोगों को वहाँ लाकर बसाया जाता था जैसे ब्राह्मण,वैश्य,सैनी,धोबी,हरिजन आदि सभी समाज।उस समय सभी लोग नए भूभाग में तभी रह सकते थे जब उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।
राव देवराज हाडा द्वारा बून्दी शहर एवं रियासत की स्थापना के बाद उनके सभी हाड़ा वंशजो ने कठिन परिश्रम से बन्धु नाल के भयानक जंगल को काटकर इस शहर में लगातार सुधार किया, नाल में तालाब गाँव के पहाड़ को काटकर भरती भरवाई गयी व नाळ के प्रवाह को रोककर नवलसागर झील का निर्माण भी करवाया गया।इसके पश्चात अधिकाधिक लोगों को यहाँ बसाया गया इस प्रकार बून्दी शहर की स्थापना हुई।
तारागढ़ व गढ़ पैलेस-
सन 1354 में राव बर सिंह हाड़ा ने बढ़ते बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा हेतु पहाड़ी पर तारागढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया।
16वीं शताब्दी के बाद तारागढ़ किले के नीचे तलहटी में भव्य महलों का निर्माण करवाया गया, जो समस्त राजस्थान में राजपूत स्थापत्यकला का अनूठा उदाहरण है।
जग जाणी रे शूरमा,मुच्छा तणी आन।
रमणी रमता रम रमी,झुक्या न हाडा चौहान।।
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तारागढ़ बूंदी
Bundi
323001