Shiksharth Foundation
We promote learner-friendly inclusive environments by effective community participation and active learning methodologies. Our work involves creating inclusive learning environments in schools and elsewhere so that the most marginalised children can reach school and get quality education.Implement the Right to Education Act, 2009 so that children of the most marginalised sections of society receiv
07/04/2018
हमने सुना था एक है भारत (दीदी -1959)
हमने सुना था एक है भारत सब मुल्कों से नेक है भारत
लेकिन जब नजदीक से देखा सोच समझ कर ठीक से देखा
हमने नक्शे और ही पाए बदले हुए सब तौर ही पाए
एक से एक की बात जुदा है, धर्म जुदा है जात जुदा है
आप ने जो कुछ हम को पढाया, वह तो कही भी नज़र न आया |
जो कुछ मैंने तुम को पढाया, उसमे कुछ भी झूठ नहीं
भाषा से भाषा न मिले तो इसका मतलब फूट नहीं
इक डाली पर रह कर जब फूल जुदा है पात जुदा
बुरा नहीं गर यूँ ही वतन में धर्म जुदा हो जात जुदा |
वही है जव कुरआन का कहना, जो है वेद पुरान का कहना
फिर ये शोर - शराबा क्यों है, इतना खून - खराबा क्यों है ?
सदियों तक इस देश में बच्चो रही हुकूमत गैरों की
अभी तलक हम सबके मुँह पर धुल है उनके पैरों की,
लडवाओ और राज करो, यह उन लोगो की हिकमत थी
उन लोगों की चल में आना हम लोगों की जिल्लत थी,
यह जो बैर है इक दूजे से यह जो फुट और रंजिश है
उन्ही विदेशी आकाओं की सोची समझी बखशिश है |
कुछ इन्सान ब्रहान क्यों है, कुछ इंसान हरिजन क्यों है,
एक की इतनी इज्जत क्यों है, एक की इतनी ज़िल्लत क्यों है ?
धन और ज्ञान को ताकत वालों ने अपनी जागीर कहा
मेहनत और गुलामी को कमजोरों की तक़दीर कहा,
इन्सानों का यह बटवारा वहशत और जहालत है
जो नफ़रत की शिक्षा दे वह धर्म नहीं है , लानत है,
जन्म से कोई नीच नहीं है, जन्म से कोई महान नहीं
करम से बढ़कर किसी मनुष्य की कोई भी पहचान नहीं |
ऊँचे महल बनाने वाले फुटपाथों पर क्यों नहीं रहते है,
दिन भर मेहनत करने वाले फाकों का दुख क्यों सहते है ?
खेतों और मिलों पर अब तक धन वालों का इजारा है
हमको अपना देश प्यारा, उन्हें मुनाफा प्यारा है,
उनके राज में बनती है हर चीज़ तिजारत की खातिर
अपने राज में बना करेगी सब की जरुरत की खातिर,
अब तो देश में आज़ादी है अब क्यों जनता फरियादी है,
कब जएगा दौर पुराना, कब आएगा नया जमाना ?
सदियों की भूख और बेकारी क्या इक दिन में जाएगी,
इस उजड़े गुलशन पर रंगत आते आते आएगी,
ये जो नये मनसूबे है ये जो नई तामीरे है
आने वाली दौर की कुछ धुधली -धुधली तस्वीरे है,
तुम ही रंग भरोगे इनमें तुम ही इन्हें चमकाओगे
नवयुग आप नहीं आएगा नवयुग को तुम लाओगे ।
https://www.youtube.com/watch?v=jraa6lw8GXw
[Composer: N. Dutta; Singer: Md. Rafi, Asha Bhonsle; Actor: Sunil Dutt]. Post inspire by LinkedIn Member Associate Coordinator Dissemination _Eklavya, Rajesh Parashar.
Hamne Suna tha Ek hai Bharat - DIDI 1959 1959 में बनी फ़िल्म का यह गीत आज भी सटीक बैठता है .. एक बार पूरा गीत जरूर सुनें ...
14/11/2017
जीवन ताश के पत्तों के खेल की तरह है। आपके हाथ में जो है वो नियति है, जिस तरह से आप खेलते हैं, वो आपकी स्वतंत्र इच्छा है।
26/01/2017
Republic Day honors the date on which the Constitution of India came into force on 26 January 1950 replacing the Government of India Act as the governing document of India.
2016 Date: 26 January 2016
2017 Date: 26 January 2017
Observances: Republic Day Celebrations
Type of holiday: National day
Date: 26 January
Source: Wikipedia
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