Prof. Chetankumar Solanki

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30/11/2020

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें क्या थी:-
सभी पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए स्वामीनाथन आयोग ने अपने कुछ सुझाव सरकार को दिए थे.

1.भूमि सुधार:-
आजादी के समय से ही देश में भूमि आवंटन असामान्य रहा है| देश में गरीबी स्तर के 50% लोगों के कुल भूमि आवंटन की केवल 3% भूमि थी, जबकि 54% भूमि का आवंटन, 10% अमीरों की थी|

स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में भूमि सुधारों को बढ़ाने पर जोर दिया गया रिपोर्ट में कहा गया कि अतिरिक्त और बेकार जमीन को भूमिहीनो में बांटो और आदिवासी क्षेत्रों में पशु चराने का हक दिया जाना चाहिए|

2.सिंचाई सुधार:-
भारत में कुल बुवाई योग्य भूमि 141.4 मिलीयन हेक्टेयर का करीब 52% भाग अभी भी सिंचाई की व्यवस्था से वंचित है और वर्षा जल पर निर्भर है पूरे भारत में अभी भी केवल 35% भूमि की नियमित सिंचाई की सुविधा है|

आयोग ने सलाह दी थी कि सिंचाई के पानी की उपलब्धता सभी किसानों के पास होना चाहिए इसके साथ ही पानी की सप्लाई और वर्षा जल के संचय पर भी जोर दिया गया था, आयोग ने पानी के स्तर को सुधारने पर जोर देने के साथ ही कुआ शोध कार्यक्रम शुरू करने की बात भी कही थी इसके अलावा ”मिलियन वेल्थ रिसर्च स्कीम” को प्राइवेट क्षेत्र के माध्यम से विकसित करने के बाद आयोग ने की थी|

3.कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर:-
भारत में कृषि उत्पादों के प्रति हेक्टेयर विश्व के अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है यदि धान का ही उदाहरण लें भारत में धान का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2929 किलो/हेक्टेयर है लेकिन जापान में 6414 चीन में 6321 और दक्षिण अफ्रीका में 662 किलो/हेक्टेयर है|

आयोग ने कहा कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और विकास पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है इसके साथ ही आयोग ने कहा था कि कृषि से जुड़े सभी कामों में जन सहभागिता की जरूरत होगी चाहे वह सिंचाई हो जल निकासी हो भूमि सुधार हो जल संरक्षण हो या फिर सड़कों और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के साथ शोध से जुड़े काम हो|

4.किसानों के लिए सस्ता कर्ज:-
किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाला सबसे बड़े कारणों में से एक है इसलिए सरकार को किसानों की समस्या पर जरूरत के हिसाब से ऋण देने की सुविधाओं का विकास करना होगा आयोग ने कहा कि-

फसल ऋण के लिए 4% की आसान दर पर ऋण की सुविधा उपलब्ध करानी होगी|
कृषि ऋण को गरीब और जरूरतमंद तक पहुंच सुनिश्चित करना होगा इसके अलावा लगातार प्राकृतिक आपदाओं के बाद किसानों को राहत प्रदान करने के लिए कृषि जोखिम कोष स्थापित करें|
आपदाओं के दौरान किसानों को ऋण वसूली में छूट और सरकार की ओर से ऋण पर ब्याज की छूट की सुविधा देनी होगी|
5.जैव संसाधनों को विकसित करना:-
भारत में ग्रामीण लोग अपने पोषण और आजीविका सुरक्षा के लिए जल संसाधनों की एक विस्तृत श्रृंखला पर निर्भर करते हैं इसलिए आयोग ने इस दिशा में सुधार करने की आवश्यकता पर बल देने का सुझाव दिया था आयोग ने सुझाया की-

जैव विविधता तक पहुंच के पारंपरिक अधिकारों को संरक्षित करना जिसमें गैर लकड़ी के वन उत्पादों तक पहुंच शामिल है जिसमें औषधि पौधे, तेल पैदा करने वाले पौधे, और लाभकारी सूक्ष्मजीव शामिल है| ब्रांडिंग के माध्यम से खेती के लिए उन्नत जानवर पैदा करना साथ ही मछली पालन और मधुमक्खी पालन जैसे कृषि संबंधित क्रियाओं को बढ़ावा देना|

6.फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य:-
न्यूनतम समर्थन मूल्य के कार्यवाही में सुधार, धान और गेहूं के अलावा अन्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था की जानी चाहिए इसके अलावा पीडीएस में बाजरा और अन्य पौष्टिक अनाज स्थाई रूप से शामिल किए जाने चाहिए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य उसकी उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक होना चाहिए|

7.किसानों की आत्महत्या की रोक:-
दोस्तों किसानों की आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए उन्हें किफायती स्वास्थ्य बीमा प्रदान करें और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाओं को ठीक करें राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को प्राथमिकता के आधार पर इलाकों में और सक्रिय रूप से लागू करें जिन इलाकों में किसान आत्महत्या की घटनाएं ज्यादा हो रही है|

किसानों की समस्याओं को ठीक से समझने के लिए राज्य स्तरीय किसान आयोग की स्थापना करें जिनमें किसानों भी शामिल हो
इन किसानों को कृषि के अलावा अन्य साधनों जैसे पशुपालन इत्यादि के द्वारा धन अर्जित के लिए प्रेरित करना होगा|
वृद्धावस्था पेंशन और स्वास्थ्य बीमा के प्रावधान ठीक से लागू किए जाएं ताकि किसानों में सामाजिक असुरक्षा की भावना पैदा ना हो|
इस प्रकार ऊपर दिए गए सात बिंदुओं से स्पष्ट हो जाता है कि स्वामीनाथन कमीशन ने किसानों की हर तरह की समस्याओं का समाधान करने के लिए अपने सुझाव दिए थे कुछ सुझाव को सरकार द्वारा लागू भी कर दिया गया था किसानों की समस्याएं राजनीतिक दलों को इतनी खास नहीं लगती जितनी होनी चाहिए इसलिए राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में इन सभी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया और किसान राजधानी में सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए घूम रहे हैं इस बात की संभावना भी कम दिखाई देती है कि सरकार इनके कल्याण के लिए कुछ जरूरी कदम उठाएंगे|

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