Haste Raho
26/06/2024
नशे में टुन्न एक शराबी घर आ रहा था। उसे एक चिकन वाला दुकान बढ़ाता दिखा, “अबे चिकन है क्या?” उसने हाँक लगायी।
“एक कच्चा रखा है, दूँ क्या? तंदूरी तो सब बिक गये” दुकानदार ने उसे टालना चाहा।
“चल कच्चा ही दे दे, बीवी पका देगी, अभी वक्त ही क्या हुआ है?” उसे अंदाज़ा ही नहीं था कि रात के बारह बज चुके थे। दुकानदार ने उसे कच्चा चिकन पैक कर दिया।
मौहल्ले के बाहर ही शराबी को कुत्ते भौंकते मिले। वह उन्हें गालियाँ देता आगे बढ़ता रहा। तभी एक बहुत बढ़ा मोटा सा कुत्ता सामने आ गया, जो भौंक नहीं रहा था। “तू बहुत अच्छा कुत्ता है मुझे भौंक नहीं रहा है तू ले चिकन खा” शराबी ने उसे पुचकारते हुए चिकन खोल कर दे दिया। वह मोटा कुत्ता मजे लेकर खाने लगा, तो शराबी ने उसकी पीठ पर हाथ फेरकर पुचकारा और अपने घर की ओर चल पड़ा। घर में जो भी बीवी ने दिया चुपचाप खाने लगा। बीबी ने कहा “मुझे फिक्र हो रही थी आपकी। बाहर गलियों में एक खूंखार तेंदुआ घूम रहा है। पिंटु शाम को पड़ोसियों के घर गया था तो, सीसीटीवी पर देखा था”।
बीवी पति को सुरक्षित पा कर निश्चिंत थी। तभी माँ के फोन पर पिंटु ने एक तेजी से वायरल होता वीडियो भेजा। कैप्शन था
"हमारी कॉलोनी का हीरो"
तेंदुए की पीठ पर हाथ फेरते पति को देख कर बीवी के होश फ़ाख़्ता हो गये।
🥃🥃🥃🥃 *मदिरा की ताकत बहत कम लोग आंक पाते हैं।*🫠🫠
यह गोरखपुर की घटना है। एक महिला का पति 25 साल की उम्र में मर गया। तब उस महिला की उम्र 22 की थी, महिला शादी के तीन साल बाद विधवा हो चुकी थी। महिला देखने में बहुत सुन्दर थी,बदन भी छरहरा था लेकिन पति के मरते ही जैसे उसके उपर मुसीबतों का पहाड टूट पडा! उपर से बुढे सास ससुर की जिम्मेदारी भी थी।
अब तो वह खाने दाने के लिए मोहताज हो गई, किसी ने सुझाया कि गांव के सरपंच से मदद मांग लों। राशन कोटे से मदद कर देगें। वह गांव के सरपंच से मदद मांगने गई, उसकी खूबसूरती देख सरपंच की नियत फिर गई। उसने मदद के बदले शारीरिक सुख की मांग रख दी।
महिला तैयार हो गई, पेट की भूख हर समझोते के लिए तैयार हो जाती है। सरपंच नें सुख भोगा और थोडी सी मदद कर दी लेकिन पेट की भूख है,बार-बार लगती है। कुछ दिन के बाद अनाज खत्म हो गया,महिला फिर सरपंच के पास गई।
सरपंच ने मदद से इनकार कर दिया और राशन कार्ड बनाने अपने वार्ड अधिकारी के पास भेज दिया। वार्ड अधिकारी भी शायद काफी दिनों से भूखा था,उसने भी अपनी भूख मिटाने की शर्त रख दी। महिला के पेट और अधिकारी के दिल की भूख में लडाई होने लगी। पेट हार गया और दिल जीत गया। फिर पटवारी ने भी हवन में आहुति देकर पुण्य कमाया!
कुछ दिन में उसका राशन कार्ड बन गया लेकिन पेट की भूख के साथ अन्य जरूरतें भी तो होती है। महिला ने अपने पति की आफिस के लिए रूख किया। पति की नौकरी की एवज में वहां कुछ बकाया पैसे मिलने की आशा था। हाय री किस्मत! पति के बाॅस ने भी समझौता करने की शर्त रख दी।
विधवा मजबूर थी,उसने शर्त मान ली, बाॅस खुश लेकिन बाॅस का भी बाॅस होता है। अब उसे भी खुश करना था,विधवा महिला ने उसको भी खुश किया। उन सबकी खुशी के बदले महिला को भी ठीक ठाक रकम मिल गई, अब वो विधवा भी खुश थी।
यह सिलसिला उस विधवा के साथ लगभग तीन साल तक चलता रहा। तीन साल तक वह सब को खुश करती रही,बदले में खुश होती रही,कभी पेट की जरूरत पूरी हुई,कभी पेट से इतर जरूरत पूरी हुई। इन तीनों सालों में उसने 13 लोगों को 107 बार खुश किया।
जनवरी 2018 में यह बात खूली कि उसके साथ जिन 13 लोगों ने शरीर सुख के लिए समझौते पर मजबूर किया,उन सबको एड्स हो गया है। सबसे पहले इस बात की जानकारी ऑफिस के बाॅस को लगी फिर धीरे धीरे सरपंच भी जांच के घेरे में आये। अब उन सब 13 पुरूषों की बदौलत उनकी 14 पत्नियों को भी एड्स हो गया था। कन्फ्यूज ना हो,पटवारी ने दो शादी की थी।
बाद में यह बात खुली की विधवा का पति 25 साल की छोटी सी उम्र में एड्स की बिमारी से मर गया था,उसकी बदौलत उस महिला को भी एड्स हो गया था और वह इस मुसीबत से अंजान थी।
बडे बुजुर्ग कह गये है,।..."आप का कर्म लौटकर वापस आता है। Karma Returns...." तेरा किया,आगे आयेगा!
18/04/2024
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05/04/2024
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