Anoop Tripathi
16/03/2026
"सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ, ठीक है" 😭😭😭
ये शब्द उस मां-बाप के थे, जो अपने बेटे को जिंदगी के लिए नहीं, बल्कि मौत के लिए विदा कर रहे थे।
उन मां–बाप के लिए बेहद बेबसी के पल था, जब वो हरीश को आखिरी विदाई दे रहे थे। उन्हें पता था कि हरीश अब कभी उठ खड़े नहीं हो सकते, फिर भी वो 13 साल तक बेड पर उसकी सेवा करते रहे।
इंसान ने इंसानों को मारने के लिए एक से एक अविष्कार किए , अनुसंधान किए , एक से एक हथियार बनाए , दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य व्यापार इंसानों को मारने वाले हथियारों का है।
मगर वही इंसान एक इंसान को बचाने का इंतजाम नहीं कर सका।
गाजियाबाद के हरीश सालों से कोमा में हैं, देश के किसी भी डॉक्टर, हॉस्पिटल, रिसर्च संस्थान, करोड़पति, अरबपति ने उनके मुफ्त इलाज की पेशकश नहीं की।
हरीश राणा के साथ एक हादसा 2013 में हुआ था, जब वह पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी हुई और वे कोमा में चले गए। तब से अब तक लगभग 13 साल हो चुके हैं और वह कोमा में हैं।
लंबे समय तक बेटे की देखरेख करने, घर, जमीन बेचने, आर्थिक रूप से बदहाल होने के बाद हरीश के पैरेंट्स ने उच्चतम न्यायालय से बेटे की मौत मांगी। देश की सबसे बड़ी अदालत ने रोते हुए इच्छा मृत्यु (Mercy Killing) की मंजूरी दे दी।
बाकी लोगों को जिंदगी देने वाले दिल्ली एम्स में अब हरीश राना को मौत मिलेगी। वहां लाइफ़ सपोर्ट को हटा लिया जाएगा।
जिन लोगों को UGC बिल में कोई समस्या नहीं दिखाई दे रही उन से आग्रह है, कि इसी UGC बिल का ठीक उल्टा नियम कर दें
मतलब OBC,SC,SCT की जगह सिर्फ जनरल को रख दें और जनरल की जगह पर OBC,SC,ST को रख दें, और इस में कोई परिवर्तन न करें।
फिर इस Guideline की वास्तविक मंशा पूरे राष्ट्र को तुरंत समझ में आ जाएगी।🫠
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