Ramkumar G. Shukla

Ramkumar G. Shukla

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11/05/2024

Struggle is the Truth of life...if you want success you have to face struggle..

23/03/2024

25/02/2024

साथियों! हमें किसी के पहनावे और रहन सहन को देखकर उसके बारे में कुछ भी ऊंचा–नीचा अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।
🟢🟡🔴⚔️
इसका परिणाम क्या हो सकता है, आइए इसी के बारे में आपको एक कहानी सुनाते हैं..🔊🔊🔊

किस्सा 1920 के आसपास का है।
राजा जय सिंह प्रभाकर लंदन में थे। एक दिन वो राजा की पोशाक छोड़कर आम कपड़ों में लंदन घूमने के लिए निकले थे। इसी दौरान उनकी नज़र Rolls-Royce Motor Cars के शोरूम पर पड़ी। शोरूम के अंदर खड़ी एक शाही गाड़ी ने राजा को आकर्षित किया, तो वो उसे देखने अंदर चले गए। अब चूंकि, वो साधारण कपड़ों में थे इसलिए शो-रूम के कर्मचारी उन्हें पहचान नहीं सके, उनका #मज़ाक उड़ाया और ग़रीब समझकर बाहर जाने को कहा।
राजा ने इस बात को दिल पर ले लिया और तय किया कि वो #रॉल्सरॉयस को सबक सिखाएंगे। वो वापस अपने होटल आए और अपने सेवकों को आदेश दिया कि के शोरूम वालों को अवगत करा दो कि राजा उनके यहां आएंगे।
राजा जयसिंह प्रभाकर इसके बाद राजा की तरह 'रॉल्स रॉयस' शोरूम के अंदर दाखिल हुए। अब चूंकि, शो-रूम कर्मचारियों को पहले ही ख़बर मिल चुकी थी कि अलवर के राजा गाड़ी खरीदने आ रहे हैं, इसलिए उन्होंने राजा जय सिंह की खूब आवभगत की।
राजा ने बिना समय खराब किए एक साथ वहां खड़ी 'रॉल्स रॉयस' की सभी गाड़ियों को खरीदने का ऑर्डर दे दिया।
कहते हैं, उन्होंने सभी गाड़ियों की #पेमेंट #कैश में किया।
इतना बड़ा ऑर्डर मिलने के बाद शो रूम के सभी कर्मचारी बहुत खुश थे। लेकिन, उन्हें नहीं पता था कि राजा जय सिंह उनकी गाड़ियों के साथ आगे क्या करने जा रहे थे।
जैसे ही गाड़ियों की #डिलीवरी भारत में हुई, राजा जय सिंह ने सभी गाड़ियों को #नगरपालिका को सौंप दिया। साथ ही उन्होंने यह आदेश दिया कि आज से इसमें ही कचरा उठाया जाएगा।

राजा के इस कदम के बाद Rolls-Royce Motor Cars - Asia Pacific की गाड़ियां मज़ाक का पात्र बनने लगी।
लोग इन्हें ख़रीदने से परहेज़ करने लगे। सबको लगने लगा था कि जिस गाड़ी में भारत अपना कचरा रखता है, उसे कोई कैसे चला सकता है।
कहते हैं, अंत में #कंपनी ने पत्र लिखकर राजा जय सिंह से अपने कर्मचारी के व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी और साथ ही अनुरोध किया था कि उनकी गाड़ी से कचरा उठाना बंद कर दिया जाए।
और राजा के सम्मान में कंपनी ने उन्हें अपनी सबसे #खूबसूरत गाड़ी भेंट की।
राजा जय सिंह ने भी अपना बड़ा दिल दिखाते हुए कंपनी को माफ़ किया और गाड़ी से कचरा उठाने का काम बंद करवा दिया।
अपने इस कदम से राजा जय सिंह दुनिया को यह संदेश देने में कामयाब रहे कि इंसान की पहचान उसके कपड़ों से करना ठीक नहीं है।

शिक्षा:–
#इंसान कपड़ों से अमीर-गरीब नहीं बनता सादा जीवन जीना उस इंसान की #महानता का परिचय भी दे सकते हैं।



—राम

25/02/2024

*विनम्र अनुरोध!*
🔊🟡🟠🔴🙏
आप यहां तक आ गए हैं तो कृपया इसे पढ़कर और share कर के ही आगे जाना।🙏

आदरणीय जनता–जनार्दन!🙏
#उत्तरप्रदेश में अभी हाल ही में हुए #विश्व के सबसे बड़े #पुलिस_कांस्टेबल_भर्ती_परीक्षा में कड़ी तैयारियों के बाद भी पेपर लीक के कांड ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं के भ्रष्ट #इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
तकरीबन 50 लाख महिला एवं पुरुष अभ्यर्थियों ने #प्रशासनिक दृष्टिकोण से निम्नतम स्थान रखने वाले UP Police के नागरिक आरक्षी पदों के लिए आवेदन किया था।
गौरतलब है कि, पिछले 5 सालों से ये भर्ती परीक्षा नहीं हो रही थी।
आगामी #लोकसभाचुनाव2024 को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने यूपी पुलिस के इतिहास में सबसे बड़ी भर्ती निकाली, जिसमें #महिला एवं #पुरुष वर्ग को मिलाकर 60244 रिक्त पदों पर भर्ती सुनिश्चित की गई।

नियत समय पर भर्ती परीक्षा आयोजित हुई और उसके सभी पेपर परीक्षा से पूर्व ही विभिन्न #सोशलमीडिया और #टेलीग्राम चैनल पर लीक हो गए।
लाखों युवाओं ने सरकारी नौकरी प्राप्त करने के सपने देखे थे।
पेपर लीक की ख़बर मिलते ही अभ्यर्थियों में आक्रोश व्याप्त हो गया, क्योंकि यह कोई छोटा–मोटा मामला नहीं था।
भारत के विभिन्न राज्यों से कुल 50 लाख से भी अधिक परीक्षार्थियों ने परीक्षा में प्रतिभाग किया था।

इस अत्यंत #निंदनीय घटना के विरोध में आक्रोशित युवाओं और अभ्यर्थियों ने जगह–जगह #विरोध #प्रदर्शन, धरने और ज़िम्मेदार अधिकारियों/मंत्रियों के आवासों का घेराव किया।

छात्रों ने अपनी बात विभिन्न जनप्रतिनिधियों के माध्यम से उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
विपक्ष के होनहार नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों, 50+ साल के होनहार युवा Rahul Gandhi जी, परम् यदुवीर Akhilesh Yadav जी और पूर्व मंत्रियों ने भी इस तथाकथित पूर्वनियोजित मुद्दे पर अपनी #राजनीतिक रोटियां सेंकना शुरू कर दिया।
यह भी ज़रूरी था क्योंकि लचीले #लोकतंत्र की तथाकथित #विशेषता भी यही है।
हजारों–लाखों युवाओं के द्वारा विभिन्न माध्यमों से इस #कुकृत्य का #विमोचन भी किया एवं कराया गया।
अनहोनी की आशंका से ज़िम्मेदार #सरकार को सामने आना ही पड़ा और उन्होंने इस बेबुनियाद आरोपों के बुनियाद की मांग की।
“सांच को आंच क्या” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए #युवा समाज ने बड़ी अडिगता और ज़िम्मेदारी से साक्ष्यों का प्रस्तुतिकरण किया।

सरकार ने उपयुक्त साक्ष्यों को वैधता देते हुए अपने कड़े रुख को अपनाया और दनादन आदेश जारी करना शुरू कर दिया।

सूबे के चहेते और ज़िम्मेदार मुखिया माननीय बुलडोजर बाबा #मुख्यमंत्री MYogiAdityanath जी ने जांच समिति के गठन और दोषियों के खिलाफ़ कड़ी कार्यवाई का आदेश देते हुए परीक्षा को 6 माह के अंदर पुनः आयोजित करने का निर्णय लिया।
उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
उन्हें आगामी परीक्षा में उपयुक्त सुविधा उपलब्ध कराया जाएगा।

छात्रों ने राहत की सांस लेते हुए अपने प्रिय मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
मुझे आशा है कि वे पुनः आयोजित होने वाले परीक्षा की तैयारी में और अधिक #जोश के साथ लग जाएंगे।

मित्रों, यह कोई नया मामला नहीं है कि इसे हल्के में #नज़रअंदाज़ कर दिया जाए।
इसके पहले से ही के परीक्षा का एक और मुद्दा चल रहा है, जिसका अभी तक #न्याय नहीं हुआ, और उसके आसार भी अभी तक नहीं दिख रहे।

हे आदरणीय जनता–जनार्दन!🙏
हम सत्ता के #इंद्रासन पर विराजमान लोगों को ही हमेशा से ऐसे दोष देते आ रहे हैं, जैसे कि उन्हें दोषी ठहराना हमारा #नैतिक #कर्तव्य है, या एक #आनुवंशिक गुण है, या फिर जन्मसिद्ध अधिकार।

आपको जानकर तो आश्चर्य होता ही नहीं, पर मैं बता ही दूं, कि इस प्रकार की स्थितियों का #सार्वभौमिक कारण हम और आप ही हैं।
लुटाने वाले भी हम हैं और लूटने वाले भी हम ही हैं।
सबसे पहले और सबसे बड़े भ्रष्ट हम और आप ही हैं परन्तु स्वयं ही सहानुभूति की प्राप्ति के उद्देश्य से हम सरकार पर दोषारोपण करते हैं।
इस घटना के प्राथमिक और मुख्य दोषी वे छात्र/अभ्यर्थी स्वयं हैं, जिन्होंने अपने स्वार्थ को ध्येय में रखकर ऐसे अवैधानिक रूप से उत्तर को प्राप्त किया।
हम ऐसे लोगों से क्या उम्मीद रखें?
ऐसे लोग यदि किसी प्रकार से चयनित भी हो गए तो क्या वे हमारे देश, हमारी सभ्यता और हमारे संविधान को सुदृढ़ता प्रदान करेंगे?
हमें पता है कि ऐसे लोग हमारे अपने हैं, हमारे ही घर और समाज से निकले हुए अयोग्य और आलसी लोग हैं।
वो हमारे अपनों में से किसी के पुत्र/पुत्री, किसी के पति/पत्नी, किसी के पिता/माता, अथवा भगिनी/भ्राता हो सकते हैं।
हमें इस प्रकार से स्वार्थ में अंधे और निकृष्ट लोगों से अपने समाज की रक्षा करनी होगी।

यदि ये लोग गलत तरीके से प्रश्नपत्र न ख़रीदकर सही तरीक़े से मेहनत करें और लगन से पढ़े तो शायद सफलता ज्यादा दूर नहीं रहेगी।
इनमें से कुछ लोग, जो स्वयं संलिप्त थे, पर अब सफेदपोश बन रहे हैं, उन्होंने यदि समय रहते ही प्रशासन को सूचित किया होता तो हमारे देश के, हमारे प्रदेश के और हमारे अपने धन और यश की बचत हो जाती।
संसार भर में हमारे देश और प्रदेश की बदनामी नहीं हो पाती।

मेरे मित्रों, मेरे अग्राजों, मेरे अनुजों!
यदि आप और हम ईमानदारी से पढ़ेंगे, सीखेंगे तो कौशल स्वतः विकसित होता रहेगा, फिर न किसी भी प्रकार की लाचारी रहेगी और न ही बेरोजगारी।
जब तक हमारे विचार, हमारी नीयत और हमारी शैली विकसित नहीं होगी, तब तक हम अविकसित, असमर्थ और असभ्य ही रहेंगे।

हमें कोई आवश्यकता नहीं कि हम किसी के पीछे भागें।
यदि हम स्वयं की साधना करें तो निश्चित रूप से एक अच्छे इंसान तो बन ही जाएंगे।

यदि आप भी इस विचार से सहमत हैं, या आपको लगता है कि ऐसे ही कुछ आपके भी विचार हैं, तो कृपया इसे अपने लोगों में प्रसारित कीजिए।
मानवता का प्रचारक बनकर, अपनी संस्कृति की, अपने राष्ट्र की रक्षा ही हमारा परम् ध्येय होना चाहिए।

मेरे निजी विचार ही इस लेख के प्रणेता हैं।
यदि मेरे इस लेख में आपको कमी नज़र आती है या आपको ऐसा लगता है कि कुछ गलत है, तो कृपया उसे नज़रअंदाज़ मत कीजिएगा। मुझे बताइएगा।
मैं स्वयं में सुधार का आकांक्षी हूं।
मैं आपका अपना हूं, और अपनों की गलती को सुधारना कोई गलत बात नहीं।

इसे ज्यादा से ज्यादा share कीजिए और अपनी राय को व्यक्त कीजिए।
बात सही हो तो समर्थन कीजिए, और गलत हो तो मार्गदर्शन कीजिए। 🙏

भारत माता की जय 🚩🇮🇳🙏
जनता जर्नादन की जय 🙏🚩

आपका अपना राम

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