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17/10/2024

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#जन्मकुंडली #ज्योतिष #हिंदूधर्म

Photos from PoojaPathGuru's post 15/10/2024

वैजयन्ती माला .............

💐बैजन्ती (संस्कृत : वैजयन्ती) एक पुष्प का नाम है जिससे वैजयन्ती-माला बनती है। यह माला श्रीकृष्ण और विष्णु को सुशोभित करती है। 'वैजयन्ती माला' का शाब्दिक अर्थ है- 'विजय दिलाती हुई माला' या 'विजय दिलाने वाली माला' ।

💐वैजयन्ती माला की शास्त्रों में बड़ी महिमा है। ये श्री कृष्ण भक्ति प्रदान करने वाली मानी गयी है। इस माला से श्री कृष्ण मन्त्रो का जप किया जाता है। इसे गले में धारण करना शुभ माना गया है। यह माला भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय 6 वस्तुओं में से है - गाय, बांसुरी, मोर पंख, माखन, मिश्री और वैजयन्तीमाला । कहा जाता है कि जो भी मनुष्य इसे धारण करता है उसे जीवन में शांति एवं सुख की प्राप्ति होती है।

💐वैजयन्ती एक पौधे का नाम भी है। इसके पत्ते हाथ भर तक के लम्बे और चार पाँच अंगुल चौड़े होते हैं। इसमें टहनियां नहीं होतीं। यह हल्दी और कचूर की जाति का पौधा है। इसके सिर पर लाल या पीले फूल लगते हैं। फूल लम्बे और कई दलों के होते हैं और गुच्छों में लगते हैं। इसके काले दाने कड़े होते हैं जिनमें लोग छेदकर माला बनाकर पहनते हैं।

💐एक दूसरा मत यह है कि वैजयन्ती के पत्ते हाथ हाथ भर तक के लम्बे और एक इंच चौडे़ होते हैं। इसमें टहनियाँ नहीं होतीं, केले की तरह कांड सीधा ऊपर की ओर जाता है। इसमे कोई फूल नहीं आता, एक बीज फली के साथ निकलता है। बीज में ही जुड़ा हुआ पराग होता है। कुछ लोग बैजन्ती को कैना लिली भी समझते हैं, किन्तु दोनो पौधे अलग हैं।

💐बैजन्ती के पौधे की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसके बीज में माला बनाने के लिए कोई छेद नहीं करना पड़ता। यह माला भगवान विष्णु जी की सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है।

15/10/2024

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07/10/2024

पारद के बने शिवलिंग एंव अन्य वस्तुओं का महत्व:-
पारे को प्राकृतिक रूप से प्रबल ऊर्जा प्रदान करने वाला रासायनिक तत्व कहा गया है। यह भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। पारे से बने शिवलिंग को समस्त प्रकार की वस्तुओं से बने शिवलिंगों में सर्वश्रेष्ठ कहा गया है और इसकी पूजा सर्वमनोकामना पूर्ण करने वाली कही गई है। मूलत: पारा तरल रूप में पाया जाता है, लेकिन इसमें स्वर्ण, तांबा के साथ अन्य धातुएं और जड़ी-बूटियां मिलाकर इसे ठोस रूप दिया जाता है। वैदिक ग्रंथों में पारे को संसार के समस्त राग, द्वेष, विकार का विनाशक माना गया है। जो लोग अध्यात्म की राह पर चलना चाहते हैं, उनके लिए पारद शिवलिंग की पूजा अवश्य करना चाहिए। समस्त प्रकार के सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए भी पारद शिवलिंग की पूजा की जाती है।
आइए जानते हैं जीवन को सुखी और समृद्धिशाली बनाने के लिए पारद शिवलिंग की पूजा किस तरह की जाती है।
1. यदि आपमें आत्मविश्वास की कमी है...

यदि आपमें आत्मविश्वास की कमी है। सार्वजनिक रूप से खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते हैं, लोग आपको दब्बू की संज्ञा देते हैं तो आपको नियमित रूप से पारद शिवलिंग की पूजा करना चाहिए। इससे मस्तिष्क को उर्वरता प्राप्त होती है। वाक सिद्धि प्राप्त होती है। हजारों लोगों को अपनी वाणी से सम्मोहित करने की क्षमता आ जाती है।
2. लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए

लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए पारद के शिवलिंग की विशेष तौर पर पूजा की जाती है। आर्थिक संकटों से मुक्ति के लिए किसी भी माह में प्रदोष के दिन पारद के शिवलिंग की षोडशोपचार पूजा करके शिव महिम्नस्तोत्र से अभिषेक करें। फिर हर दिन पूजन करते रहें, कुछ ही समय में आर्थिक स्थिति ठीक होने लगती है। कर्ज मुक्ति होती है।

पारे से बने गणेश और लक्ष्मी की नियमित पूजा करने से अकूत धन संपदा का स्वामी बना जा सकता है। इससे सिद्धि-बुद्धि के साथ स्वर्ण की प्राप्ति होती है।

3. पारा समस्त रोगों की दवा के रूप में भी काम करता है

पारा समस्त रोगों की दवा के रूप में भी काम करता है। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों में पारे की माला पहनने की सलाह दी जाती है। लेकिन पहले किसी अच्छे आयुर्वेदाचार्य से सलाह अवश्य लें।

जिस घर में पारद से बनी कोई भी सामग्री जैसे शिवलिंग, पारद माला, पारद का कोई पात्र आदि मौजूद हो वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं रहती।

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