Ashwanikayog

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11/12/2025

"सच्चा योग केवल शरीर की मुद्राएँ नहीं, बल्कि चित्त की मुद्राओं का भी विज्ञान है। आज अपने अभ्यास में वह सब लाएँ जो आप हैं - आपके प्रश्न, आपकी आशाएँ, आपकी चुनौतियाँ।"

विशेष संकल्पना:
"जैसे योग में हर आसन संतुलन सिखाता है, वैसे ही जीवन में भी विचार और कर्म के संतुलन से ही सच्ची आध्यात्मिक उन्नति संभव है।"

अभ्यास का सूत्र:
"आज प्राणायाम के समय इस भावना से साँस लें - 'मैं ग्रहण कर रहा हूँ जो मेरे विकास के लिए आवश्यक है' और साँस छोड़ते समय - 'मैं त्याग रहा हूँ जो मेरे मार्ग में बाधक है'।"

ध्यान बिंदु:
"आपकी बिचारधारा सागर की लहरों के समान है, और आत्मा उसके नीचे की गहराई। आज का ध्यान इस गहराई को पहचानने का अभ्यास है।"

याद रखें:
आपका आध्यात्मिक पथ uniquely yours है, और आज का दिन उसे और गहराकरने का अवसर लेकर आया है।

11/06/2025

“ॐ की तरंगों में स्थिरता – शून्य मुद्रा के माध्यम से”

जब मन बहुत बोलता है, तब ध्यान गहरा नहीं होता।
लेकिन जब हम शून्यता का अनुभव करते हैं — भीतर और बाहर दोनों मौन हो जाते हैं — तब आत्मा का द्वार खुलता है।
“ॐ” का उच्चारण और शून्य मुद्रा (Shunya Mudra) का अभ्यास मिलकर हमें उसी मौन की अवस्था में पहुँचाते हैं, जहाँ केवल “मैं हूँ” का साक्षात्कार होता है।

आज का मुद्रा अभ्यास:

शून्य मुद्रा (Shunya Mudra)

विधि:
अपने दाएँ हाथ की मध्यमा (मिडिल फिंगर) को मोड़कर उसके सिरे को अंगूठे के आधार से लगाएँ।
अंगूठे से हल्का दबाव दें।
बाकी तीन उंगलियाँ सीधी रखें।
हाथ घुटनों पर रखें, आँखें बंद कर गहरी श्वास लें।
प्रत्येक श्वास छोड़ते हुए “ॐ” का उच्चारण करें।

समय:
10 से 15 मिनट प्रतिदिन, विशेषकर ध्यान या भजन से पहले।

लाभ:
• कान, नाक, गला व सिर से जुड़ी वायु असंतुलन की समस्याओं को संतुलित करता है।
• मन को मौन और शांति की दिशा में ले जाता है।
• अत्यधिक विचार, बेचैनी या अनिद्रा में अत्यंत लाभकारी।
• ध्यान में गहराई और स्थिरता लाने में सहायक।

“जब मन शून्य होता है, तभी ब्रह्मांड की ध्वनि ‘ॐ’ भीतर स्पष्ट सुनाई देती है।”
अश्वनी योग फाउंडेशन

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