Astro Ganesh
26/07/2023
25/02/2023
भगवान शिव, शंकर, महादेव, भोलेनाथ से जुड़े 18 रोचक तथ्य---
1. भगवान शिव का कोई माता-पिता नही है. उन्हें अनादि माना गया है. मतलब, जो हमेशा से था. जिसके जन्म की कोई तिथि नही.
2. कथक, भरतनाट्यम करते वक्त भगवान शिव की जो मूर्ति रखी जाती है उसे नटराज कहते है.
3. किसी भी देवी-देवता की टूटी हुई मूर्ति की पूजा नही होती. लेकिन शिवलिंग चाहे कितना भी टूट जाए फिर भी पूजा जाता है.
4. हम शिवरात्री इसलिए मनाते है क्योंकि इस दिन शंकर-पार्वती का ब्याह हुआ था.
5. शंकर भगवान की एक बहन भी थी अमावरी. जिसे माता पार्वती की जिद्द पर खुद महादेव ने अपनी माया से बनाया था.
6. भगवान शिव और माता पार्वती का 1 ही पुत्र था. जिसका नाम था कार्तिकेय. गणेश भगवान तो मां पार्वती ने अपने उबटन (शरीर पर लगे लेप) से बनाए थे.
7. भगवान शिव ने गणेश जी का सिर इसलिए काटा था क्योकिं गणेश ने शिव को पार्वती से मिलने नही दिया था. उनकी मां पार्वती ने ऐसा करने के लिए बोला था.
8. भोले बाबा ने तांडव करने के बाद सनकादि के लिए चौदह बार डमरू बजाया था. जिससे माहेश्वर सूत्र यानि संस्कृत व्याकरण का आधार प्रकट हुआ था.
9. शंकर भगवान पर कभी भी केतकी का फुल नही चढ़ाया जाता. क्योंकि यह ब्रह्मा जी के झूठ का गवाह बना था.
10. शिवलिंग पर बेलपत्र तो लगभग सभी चढ़ाते है. लेकिन इसके लिए भी एक ख़ास सावधानी बरतनी पड़ती है कि बिना जल के बेलपत्र नही चढ़ाया जा सकता.
11. शंकर भगवान और शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नही चढ़ाया जाता. क्योकिं शिव जी ने शंखचूड़ को अपने त्रिशूल से भस्म कर दिया था. आपको बता दें, शंखचूड़ की हड्डियों से ही शंख बना था.
12. भगवान शिव के गले में जो सांप लिपटा रहता है उसका नाम है वासुकि. यह शेषनाग के बाद नागों का दूसरा राजा था. भगवान शिव ने खुश होकर इसे गले में डालने का वरदान दिया था.
13. चंद्रमा को भगवान शिव की जटाओं में रहने का वरदान मिला हुआ है.
14. जिस बाघ की खाल को भगवान शिव पहनते है उस बाघ को उन्होनें खुद अपने हाथों से मारा था.
15. नंदी, जो शंकर भगवान का वाहन और उसके सभी गणों में सबसे ऊपर भी है. वह असल में शिलाद ऋषि को वरदान में प्राप्त पुत्र था. जो बाद में कठोर तप के कारण नंदी बना था.
16. गंगा भगवान शिव के सिर से क्यों बहती है ? देवी गंगा को जब धरती पर उतारने की सोची तो एक समस्या आई कि इनके वेग से तो भारी विनाश हो जाएगा. तब शंकर भगवान को मनाया गया कि पहले गंगा को अपनी ज़टाओं में बाँध लें, फिर अलग-अलग दिशाओं से धीरें-धीरें उन्हें धरती पर उतारें.
17. शंकर भगवान का शरीर नीला इसलिए पड़ा क्योंकि उन्होने जहर पी लिया था. दरअसल, समुंद्र मंथन के समय 14 चीजें निकली थी. 13 चीजें तो असुरों और देवताओं ने आधी-आधी बाँट ली लेकिन हलाहल नाम का विष लेने को कोई तैयार नही था. ये विष बहुत ही घातक था इसकी एक बूँद भी धरती पर बड़ी तबाही मचा सकती थी. तब भगवान शिव ने इस विष को पीया था. यही से उनका नाम पड़ा नीलकंठ.
18. भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है. इसलिए कहते है, तीसरी आँख बंद ही रहे प्रभु की.
🌺🙏🌺हर हर महादेव 🌺🙏🌺
04/02/2022
*अपने बच्चों के ग्रहों के संकेत को उनके व्यवहार से जाने*
1. सूर्य कमजोर होने पर बच्चे को सुबह जागने में परेशानी होगी और पिता से दूरी बढ़ेगी।
2. चंद्र जब कमजोर होगा तो कुछ पूछने पर रोने लगेंगे।
3. मंगल जब कमजोर होगा तो गुस्सा बढ़ेंगा और चिड़चिड़े होंगे।
4. बुध जब कमजोर होगा तो कम बात करेंगे, याददाश्त कमजोर होगी। बाजार से क्या लाना है भूल जायेगे, किताब कहाँ रखी,किसको दी भूल जायेगे।
5. गुरु जब कमजोर होगा तो बुजुर्ग का सम्मान नहीं करेंगे,जंक फूड ज़्यादा खायेगे। बच्चे बैठने के बजाय "लेटकर" किताबें पढ़ेंगे।
6. शुक्र जब कमजोर होगा तो काम करने का कोई समय नहीं होगा। सुबह उठकर चादर की घड़ी नही बनायेगे।
7. शनि जब कमजोर होगा तो एकांत में बैठने लगते हैं। पैर घिस कर चलेंगे।
8. राहु जब कमजोर होगा तो मोबाइल में ज़्यादा व्यस्त रहेंगे, चिढ़चिढ़ अधिक करेंगे और कम उम्र में हस्तमैथुन जैसी आदतों के शिकार हो जायेगे।
9. केतु जब कमजोर होगा तो बच्चे अँधेरे में अधिक समय रहते है, कम रोशनी में मोबाइल चलना और कम रोशनी में पढ़ाई करना, बिस्तर पर लेट कर किताब पढ़ना आदि।
*अंबे*
09/08/2021
Not just a warrior queen, but an amputee who got fitted with prosthetic limb during the Rig ved era, estimated about more than 10,000 yrs ago.....
And yet we forget our own sciences and praise all that is foreign.
Shame upon us and those who teach us to be bootlickers.
Not to forget, pseudo-feminists need to take a lesson in history and identify who actually curtailed the status of women in India!
धरती पर रुद्राक्ष को शिव का प्रतीक माना जाता है। रुद्राक्ष को धारण करने से आपकी सभी समस्याएं तो दूर होती ही हैं साथ ही भगवान शिव की कृपा भी बनी रहती है। शिव भक्तों को तो रुद्राक्ष अवश्य ही धारण करना चाहिए।
कुंडली में बैठे अशुभ ग्रहों का मनुष्य के जीवन पर अनुकूल-प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
कुछ ग्रह तो इतना क्रूर प्रभाव डालते हैं कि इंसान का पूरा जीवन ही तहस-नहस हो जाता है। ग्रहों की शांति के लिए ज्योतिष में अनेक उपाय बताए गए हैं। ग्रह शांति के लिए व्रत, उनसे संबंधित चीज़ों का दान और रुद्राक्ष धारण करवाया जाता है।
आज हम आपको बताते हैं कि किस रुद्राक्ष को धारण करने से किस ग्रह की शांति होती है।
रुद्राक्ष और ग्रह का संबंध
सूर्य : अगर कुंडली में सूर्य पीडित है या अशुभ प्रभाव दे रहा है तो आपको इस ग्रह की शांति के लिए एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
चंद्रमा : कुंडली में नीच स्थान में बैठे चंद्रमा को बली करने के लिए दो मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
मंगल : मंगल का अशुभ प्रभाव अत्यंत पीड़ादायक होता है इसलिए आपको इस ग्रह को शांत करने के लिए तीन और ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
बुध : बुध ग्रह कुंडली में अशुभ प्रभाव दे रहा है और यदि आपको इस ग्रह से संबंधित क्षेत्रों में नुकसान हो रहा है तो आपको चार मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
गुरु : बृहस्पति ग्रह वैवाहिक जीवन का प्रतीक है। यदि गुरु अशुभ स्थान में बैठा हो या अनुचित प्रभाव दे रहा हो तो आपको पांच मुखी या दस मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
शुक्र : शुक्र की शांति के लिए छह और तेरह मुखी रुद्राक्ष लाभदायक रहता है। ये रुद्राक्ष धारण करने से आपको शुक्र से संबंधित भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
शनि : ये तो सभी जानते हैं कि अगर कुंडली में शनि देश अशुभ स्थान में बैठे हों या कुप्रभाव दे रहे हैं तो उस इंसान का जीवन कैसा बन जाता है। शनि ग्रह की पीड़ा को शांत करना अति आवश्यक होता है। शनि की पीड़ा को शांत करने के लिए सात और चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
राहु : राहु की शांति के लिए आठ मुखी रुद्राक्ष बेहतर माना जाता है।
केतु : अगर आपको केतु के कारण परेशानियां आ रही हैं तो आपको नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
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