Pt Ranjan pandey
11/02/2023
ुजारी_का_जीवन
पता नहीं हमारा समाज कब बदलेगा।
दुर्गापूजा समाप्त हुई,पुजारी अपने थके हुए शरीर के साथ दुर्गा पूजा करके घर लौटे।सभी लोगों के मुंह से एक ही बात पूजा में पुजारी की अच्छी खासी आमदनी हुई है। फल फ्रूट मिठाई साड़ी धोती कुर्ता गमछा बहुत कुछ मिला होगा।लेकिन उनको कौन समझाये 2 लाख रुपये के बजट वाली पूजा में केवल 4 लाल झालर वाली साड़ी मिली वो भी एकदम जालीदार।गमछा मिला जिसका आकार देख कर रूमाल भी शर्म से पानी पानी हो जाये। सभी समितियों में एक या दो ऐसे व्यक्ति होते हैं जो पुजारी की गलती को पकड़ने के लिए घात लगाए बैठे रहते हैं। वह समय-समय पर ज्ञान देते रहते हैं कि वह पुरी के पुजारी दक्षिणेश्वर के पुजारी से भी शास्त्रार्थ कर चुके हैं और उनका स्थिती खराब कर दिये थे चाहे स्वयं पांच मंत्रों के उच्चारण में जिव्हा पर लकवा ही क्यूं न मार जाए।अब आईये दक्षिणा की ओर दसवें दिन समिति द्वारा पुजारी को दक्षिणा दिया जाता है वो भी कमेटी जो देती है पुजारी खुशी-खुशी रख लेते हैं। पूजा कराते,कराते पुजारी का गला भी बैठ चुका था।जहां हर कोई अपने पत्नी बच्चों एवम् परिवार के साथ पूजा में खुशी मना रहा होता है परिवार के साथ घूमकर पिकनिक मना रहा होता है वहीं पुजारी खाली पेट जोर-जोर से मंदिर में मंत्रोच्चारण कर रहे होते हैं।जो लोग सोचते हैं कि एक पुजारी बिना परिश्रम के ही कमाई करते हैं, तो आप में से कोई भी एक व्यक्ति 10 दिन बिना खाये-पिये खाली पेट एक मंडप से दूसरे मंडप दौड़िये और लगातार 2 घंटा उच्चस्वर में दुर्गासप्तशती का पाठ कीजिए फिर सच्चाई पूरी तरह समझ में आ जायेगी एक पुजारी कितना परिश्रम करते हैं।पुरोहित की पत्नी बच्चे एवम् उनके बूढ़े माता-पिता भी उस दशमी की प्रतीक्षा करते हैं उस दक्षिणा के पैसे से बच्चों के लिए पुस्तक, कपड़े माता-पिता के लिए दवा खरीदना होता है पूजा के बाद सभी परिवार के सदस्य उनके घर लौटने की व्याकुलता से प्रतीक्षा करते हैं। वापस लौटते समय मार्ग में कोई कहेगा आज तो बहुत कमाई हुई है पंडित जी का पूरा बैग भरा हुआ है। इसी में से कुछ हमें भी दे दो ऐसे बोलकर उपहास करेगा।फिर भी पुजारी उसको अनसुना करके आगे निकल जातें हैं। वे लोग पुजारी के जीवन की शारीरिक और मानसिक पीड़ा का किंचित मात्र भी अनुमान नहीं करते हैं। "जब किसी को रेलवे में भारी बोनस मिलता है या अन्य व्यवसायों में बहुत पैसा कमाता है, तो उनको कोई यह कहने नही जाता है कि इस बार तो काफी बोनस मिला है कुछ मुझे भी दे दो।"फिर एक कर्मकांडी ब्राह्मण को ही कोई क्यों कहता है ? कभी कोई ये नही कहता कि पन्डित जी पूजा का समय नहीं है बच्चों के कपड़े खरीदने के लिए आप ये कुछ पैसे रख लो।वे हमेशा कालीघाट, तिरुपति या जगन्नाथ मंदिरों के पुजारियों की आय की तुलना एक साधारण पुजारी से करते हुए उदाहरण देतें हैं। पर मठ से जुड़े हुए महंतों और हमारे कुल पुरोहित या जजमानी पण्डित पुजारियों में बहुत बड़ा अन्तर होता है। और हां जो लोग यह कहते घूमते हैं कि ब्राह्मणों ने पौरोहित्य को अपने जीवन यापन और लोगों को लूटने का साधन बना लिया है वे चाहें तो अपने बच्चों को कर्म काण्ड की शिक्षा दिलवाकर उन्हें इस व्यवसाय में प्रवेश दिलवा सकते हैं।अधिकांश लोग जानते हैं कि एक पुजारी का जीवन कितना कठिन होता है।पुजारी उपवास करके जोर जोर से मंत्रोच्चारण करते हैं और अपने लीवर एवम् हार्ट का समय से पहले 12 बजा देते हैं। मैंने यह भी देखा है कि घर पर मासिक आय डेढ़ लाख से अधिक है। लेकिन सत्यनारायण पूजा की दक्षिणा इक्यावन रुपये है जमीन खरीदी 30 लाख की भवन निर्माण का बजट 54 लाख पर भूमि पूजन में दक्षिणा 251₹ शादी विवाह के कार्यक्रम में खर्च 15 लाख पण्डित की दक्षिणा 251₹ मुण्डन के कार्यक्रम में खर्च 3 लाख पण्डित की दक्षिणा 151₹ छोटे छोटे कार्यक्रमों में खर्च की कोई सीमा नहीं पर दक्षिणा देते समय जेब में चूहा भी गिर जाए तो मृत्यु को ही प्राप्त होगा और अगर भविष्य में भी कुछ गड़बड़ होती है तो हो गया बंटाधार फलां पण्डित ने पूजा सही से नहीं कराई थी उसको कुछ आता जाता है ही नहीं। और अगर दक्षिणा बढ़ाने के लिए यदि पुजारी बोल दे ।तो ,लोग एक परिचित शब्द का उपयोग करते है कि "पुजारी लालची" है।पुजारी को एक पैसे से भी संतुष्ट होना चाहिए। हाँ, पुरोहित का तो ना पेट है, न पीठ, न रोग, न वस्त्र और जो खरीदने जायेगे वो भी फ्री में मिल जायेगा। जब कोई नर्सिंग होम अतिरिक्त पैसे लेता है तो ये लोग कुछ नहीं कहते। यदि स्कूल चंदा के नाम पर अधिक पैसे लेते हैं, तो भी आप चुप हैं। वे लालची नहीं हैं ?हाँ, यह समाज है। और यही न्याय है।यदि हम स्वयं गणना करें कि एक व्यक्ति को अपना परिवार चलाने के लिये कितनी राशि मिलनी चाहिए और हम पंडित को हर महीने कितनी दक्षिणा देते हैं और हमारे जैसे उनके कितने जजमान हैं? पुजरी को बोनस, पी एफ़, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, पेंशन जैसी कोई सुविधा धही मिलती। हम कैसे उनसे अपेक्षा करें कि वह श्लोक सही और सही उच्चारण से पढ़ेंगे? शास्त्रों का अध्ययन करने हेतु शास्त्र कैसे और क्यों खरीदेंगे?
🔱(वि.सं.२०८० वैशाख शुक्ल पक्ष पंचमी भौमवार)🔱
🌹🙏 धर्मनगरी बेरी झज्जर हरियाणा बड़ा महादेव मंदिर में प्राकृतिक अलौकिक अद्वितीय पूर्वाभिमुख लिंग विग्रह स्वरूप में विराजमान श्री स्वयंभू जी का आज का प्रातः कालीन दिव्य आरती दर्शन।
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