Point View

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03/07/2026

तुम जैसे हजार पति रख सकती हूं' कहना गंभीर और अचानक उकसावा, MP हाईकोर्ट ने हत्या नहीं बल्कि गैर-इरादतन मानव वध माना!मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में पति की सजा में राहत देते हुए कहा कि पत्नी का यह कहना कि "वह उसके जैसे हजार पति रख सकती है" पति के लिए गंभीर और अचानक उकसावे (grave and sudden provocation) का कारण बन सकता है। कोर्ट ने माना कि आरोपी को अपने कृत्य से मौत होने की जानकारी थी, लेकिन उसकी पत्नी की हत्या करने का इरादा नहीं था। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने आरोपी की दोषसिद्धि को IPC की धारा 304 भाग-I से बदलकर धारा 304 भाग-II के तहत कर दिया और उसे सात वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹1,000 जुर्माने की सजा सुनाई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- पहले अपील पर हो फैसला मामले में पति ने पत्नी द्वारा अपमानजनक टिप्पणी किए जाने के बाद गुस्से में उस पर एक पत्थर फेंक दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के समय पत्नी सात महीने की गर्भवती थी और आरोपी नशे की हालत में था। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि घटना के बाद आरोपी ने स्वयं पुलिस और अन्य लोगों को इसकी सूचना दी थी तथा उसने केवल एक बार पत्थर फेंका, जिसके बाद कोई और हमला नहीं किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मामला पूर्व नियोजित हत्या का नहीं, बल्कि गंभीर और अचानक उकसावे में किए गए गैर-इरादतन मानव वध का है। इसलिए आरोपी की दोषसिद्धि धारा 304 भाग-II के तहत की जानी चाहिए।

02/07/2026

लिव-इन रिलेशनशिप में थे दोनों, संबंध बिगड़ने के बाद दर्ज हुई FIR; रेप के आरोपी म्यूजिक डायरेक्टर को नियमित जमानत: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट! पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप समेत अन्य गंभीर आरोपों का सामना कर रहे एक म्यूजिक डायरेक्टर को नियमित जमानत देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि आरोपी और शिकायतकर्ता लिव-इन रिलेशनशिप में थे तथा दोनों की सगाई भी हो चुकी थी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि रेप और अन्य आरोप उस अवधि से संबंधित हैं, जो FIR दर्ज होने से काफी पहले की है और ऐसा प्रतीत होता है कि संबंध खराब होने के बाद मामला दर्ज कराया गया। जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने कहा कि दोनों पक्ष बालिग हैं और 6 अगस्त 2025 को उनकी सगाई हुई थी। अदालत ने कहा कि आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान होगा। एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता, जो एक अभिनेत्री है, ने आरोप लगाया कि उसकी आरोपी से 2025 में सोशल मीडिया के माध्यम से पहचान हुई। इसके बाद आरोपी ने नशीला पदार्थ देकर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए, अश्लील वीडियो रिकॉर्ड किए और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर कई बार दुष्कर्म किया। उसने शिमला और पठानकोट की यात्राओं के दौरान भी यौन शोषण, मारपीट, धमकी और जबरन नशीले पदार्थ खिलाने के आरोप लगाए। वहीं आरोपी की ओर से कहा गया कि दोनों के बीच सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप थी और शिकायतकर्ता अपनी मां के साथ भी उसके घर पर रह चुकी थी। यह भी दलील दी गई कि संबंध खराब होने के बाद झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वह एक महीने से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और मामले में कोई बरामदगी शेष नहीं है। राज्य और शिकायतकर्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं और आरोपी के रिहा होने पर वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या शिकायतकर्ता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों के लिव-इन रिलेशनशिप और सगाई में होने का तथ्य विवादित नहीं है। साथ ही, आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 12 मई 2026 से हिरासत में है। मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि का प्रश्न ट्रायल में तय होगा और उपलब्ध तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को नियमित जमानत दी जा सकती है।

02/07/2026

राजनीतिक व्यंग्य को मानहानि नहीं... राजनीतिक व्यंग्य को मानहानि नहीं कहा जा सकता, नेताओं को आलोचना सहनी होगी: दिल्ली हाईकोर्ट!दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि राजनेताओं को राजनीतिक व्यंग्य (Political Satire) सहन करना होगा और राजनीतिक फैसलों, गठबंधनों या नीतियों पर की गई हास्यपूर्ण आलोचना को स्वतः मानहानि नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को सत्ता के साथ-साथ आलोचना और व्यंग्य का भी सामना करना पड़ता है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने यह टिप्पणी भाजपा सांसद राघव चड्ढा द्वारा सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने कहा कि राजनीति में गठबंधन बदलने, नीतियों और शासन पर व्यंग्य करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। किसी भी राजनीतिक दल के नेता के फैसले आलोचना को आमंत्रित करते हैं और कई बार यह आलोचना व्यंग्य के रूप में भी सामने आती है। केवल इस आधार पर कि किसी नेता की आलोचना की गई है, उसे मानहानिकारक नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अश्लील, अभद्र और स्पष्ट रूप से आपत्तिजनक (Obscene and Explicit) सामग्री अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आती। कोर्ट ने राघव चड्ढा के खिलाफ पोस्ट की गई ऐसी पांच सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया, जिन्हें उसने अश्लील और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला पाया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अदालत AI से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो या मॉर्फ्ड तस्वीरों का समर्थन नहीं करती, यदि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति की गरिमा को नुकसान पहुंचाना हो। हालांकि, अदालत ने माना कि आज के समय में AI का इस्तेमाल राजनीतिक विचार व्यक्त करने के लिए भी किया जा रहा है। ऐसे मामलों में अदालत का दायित्व है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा के अधिकार के बीच संतुलन बनाए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति को इतना "Thin-skinned" नहीं होना चाहिए कि वह अपने हर राजनीतिक फैसले पर होने वाली आलोचना को मानहानि मान ले। अदालत ने कहा कि नेताओं को अपनी आलोचना को विनम्रता से स्वीकार करना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

30/06/2026

एक युग का सुखद समापन: श्री ओमकार सिंह जी की सेवानिवृत्ति!
"सेवा, सरलता और सदाचार की प्रतिमूर्ति"
किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की पहचान केवल उसकी कुर्सी या उसके अधिकार से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि उसने अपने कार्यकाल में कितने लोगों का हृदय जीता है। आज, जब श्री ओमकार सिंह जी, खंड शिक्षा अधिकारी (BEO), सकरन, सीतापुर, अपनी शासकीय सेवाओं से निवृत्त हुए हैं, तो यह केवल एक अधिकारी की विदाई नहीं है, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक की विदाई है जिसने शिक्षा विभाग में अपनी कार्यकुशलता और उदारता की अमिट छाप छोड़ी है।
वर्ष 2004 से खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मेरा निरंतर जुड़ाव रहा है। इन 22 वर्षों में मैंने कई अधिकारियों को आते और जाते देखा है, लेकिन श्री ओमकार सिंह जी जैसा व्यक्तित्व मुझे फिर देखने को नहीं मिला। एक अधिकारी होने के नाते वे जहाँ अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्णतः सजग और प्रतिभावान रहे, वहीं एक व्यक्ति के रूप में उनकी विनम्रता और उदारता ने उन्हें भीड़ से अलग खड़ा किया।
क्यों वे अद्वितीय हैं?
संवेदनशीलता:-प्रशासनिक जटिलताओं के बीच भी उन्होंने हमेशा मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी।
समस्या समाधान का कौशल:-जटिल से जटिल मामलों को भी उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और धैर्य से सुलझाया।
मार्गदर्शक की भूमिका:-उन्होंने न केवल शिक्षकों का मार्गदर्शन किया, बल्कि कार्यालय आने वाले हर सामान्य व्यक्ति की बात को समान सम्मान के साथ सुना।
आज वे सेवा से भले ही मुक्त हो गए हों, लेकिन उनकी कार्यशैली और उनके द्वारा किए गए सकारात्मक कार्यों की गूँज बहुत समय तक विभाग में सुनाई देती रहेगी। अधिकारी तो कई आते हैं, पर 'जन-सेवक' कम ही होते हैं।
हम सब उनके स्वस्थ, सुखद और आनंदमय सेवानिवृत्त जीवन की कामना करते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनका आने
वाला समय अपनों के बीच शांति और प्रसन्नता के साथ बीते।
आभार!🙏

29/06/2026

विश्व सोशल मीडिया दिवस पर,विचारों को सशक्त बनाने और वैश्विक स्तर पर जानकारी के आदान-प्रदान में सोशल मीडिया की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित करते हुए अपनी जिम्मेदारी को मजबूत करने के दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए!
डिजिटल जागरूकता को बढ़ावा देना, ज़िम्मेदार उपयोग और ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना, सोशल मीडिया के लाभ का सही उपयोग करते हुए व्यक्ति और समुदायों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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