Anand Mohan

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19/06/2026

आज द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) की इस विशेष रिपोर्ट में EWS के बहाने UPSC सीटों की लूट पर एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। उसका सार यह है-
प्राइवेट स्कूल, महंगी कोचिंग, पारिवारिक व्यवसाय, MNC की नौकरियां: इन्होंने भी यूपीएससी परीक्षा में EWS सूची में बनाई जगह।
आईआईटी स्नातक व बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) के कर्मचारी तक EWS में शामिल। 8 लाख रुपये की आय सीमा पात्रता की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।
मुख्य आंकड़े (The Quota Data)
104 EWS उम्मीदवार: साल 2025 की सिविल सेवा परीक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत 104 उम्मीदवार चुने गए।
67 उम्मीदवारों ने की महंगी कोचिंग: इनमें से 67 उम्मीदवारों ने दिल्ली और अन्य शहरों के जाने-माने कोचिंग संस्थानों (जैसे Vajiram & Ravi, Vajirao & Reddy, Drishti IAS) से पढ़ाई की, जिनकी सालाना फीस 2.65 लाख रुपये तक है।
28 उम्मीदवारों के माता-पिता का बिजनेस: कम से कम 28 उम्मीदवारों के परिवारों के अपने व्यवसाय हैं—जैसे दुकानें, स्टील फैब्रिकेशन, कपड़ा और कन्फेक्शनरी का व्यापार।
10 उम्मीदवारों के पास कॉर्पोरेट नौकरियां: 10 उम्मीदवार पहले से ही निजी क्षेत्र (MNCs) में अच्छे वेतन पर काम कर रहे थे।
14 आईआईटी (IIT) स्नातक: चयनित उम्मीदवारों में से 14 आईआईटी के स्नातक या स्नातकोत्तर हैं, और कम से कम 3 एनआईटी (NIT) से हैं।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
योजना के उद्देश्य और वास्तविकता में अंतर: EWS कोटे की सूची में ऐसे उम्मीदवार हैं जो संपन्न पृष्ठभूमि (जैसे बड़े बिजनेसमैन के बच्चे, प्राइवेट स्कूलों से पढ़े छात्र) से आते हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच से पता चलता है कि योजना के मूल उद्देश्य और इसका लाभ उठाने वालों के प्रोफाइल में एक बड़ा अंतर है।
प्राइवेट स्कूलों से पढ़ाई: कम से कम 46 उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और राज्यों की राजधानियों (जैसे लखनऊ, रायपुर, जयपुर) के महंगे प्राइवेट स्कूलों से पढ़ाई की है, जिनकी सालाना फीस ₹45,000 से ₹1.5 लाख तक है।
'उद्देश्य ही विफल हो जाएगा': पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त और डीओपीटी (DoPT) के पूर्व सचिव सत्यनारायण मिश्रा ने अखबार को बताया कि EWS कोटा केवल आय और संपत्ति के मानदंडों पर निर्भर करता है। अगर संपन्न लोग इस कोटे का लाभ उठा लेते हैं, तो EWS आरक्षण का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। अधिकारियों को दावों की जांच करते समय केवल स्व-घोषणा (self-declarations) पर निर्भर न रहकर कड़ी जांच करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: अक्टूबर 2021 में नीट-पीजी (NEET-PG) दाखिलों से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार से पूछा था कि उसने EWS आरक्षण के लिए 8 लाख रुपये सालाना की आय सीमा किस आधार पर तय की है। कोर्ट ने कहा था कि बिना किसी सामाजिक या जनसांख्यिकीय डेटा (sociological, demographic data) के इस आंकड़े को मनमाने ढंग से नहीं थोपा जा सकता।
मगर सरकारी पक्ष ने जनवरी 2022 में इसे उचित माना था।

Photos from Akhilesh Yadav's post 06/06/2026
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