Manoj Viplav
न देवा दण्डमादाय रक्षन्ति पशुपालवत।
यं तु रक्षितमिच्छन्ति बुद्धया संविभजन्ति तम्।।
अर्थ–देवता कभी मनुष्यों की रक्षा चरवाहों की भांति डंडा लेकर नहीं करते। जिसकी देवता रक्षा करना चाहते है, उसे उसकी रक्षा के लिए स्वरक्षा के लिए सद्बुद्धि प्रदान करते है।
स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम्।
परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते।।
अर्थ– संसार में जन्म मरण का चक्र चलता ही रहता है। लेकिन जन्म लेना उसका
22/05/2026
🌸 जय माँ संतोषी / जय माँ वैभव लक्ष्मी 🌸
"या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
शुक्रवार का पावन दिन हमारे जीवन में संतोष, सुख और समृद्धि लेकर आए। माँ लक्ष्मी और माँ संतोषी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।
आपका आज का दिन मंगलमय और आनंदमय हो! 🙏✨
#शुक्रवार #शुभ_शुक्रवार #माँलक्ष्मी #भक्ति #सुप्रभात
13/05/2026
गणपति बप्पा मोरया! 🐘🙏
मन को शांति देने वाली एक बहुत ही मधुर गणेश वंदना। 🎶
सुनने के लिए लिंक पर क्लिक करें: https://youtu.be/SaX-5wbVTC8
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05/05/2026
🚩 जय श्री राम! जय हनुमान! 🚩
"हनुमान निराले भक्त बड़े, रघुवर की धुन में खोए हैं...
प्राणों में जिनके राम बसे, वो राम लगन में पिरोए हैं।" 🙏✨
दोस्तों, मनोज विप्लव जी की सुरीली आवाज़ में संकटमोचन हनुमान जी का एक बहुत ही सुंदर भजन रिलीज हो गया है। इस भजन को सुनकर आप प्रभु श्री राम और बजरंगबली की भक्ति में सराबोर हो जाएंगे।
हनुमान जी की कृपा पाने के लिए इस भजन को अभी सुनें और अपने प्रियजनों के साथ शेयर करें! 🌹
📺 पूरा भजन यहाँ देखें:
https://youtu.be/HB0R-CnSt04
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29/04/2026
श्रीमद्भगवद्गीता का सार मुख्य रूप से निष्काम कर्म, भक्ति और आत्म-ज्ञान के संतुलन में निहित है। यदि इसे कुछ मुख्य बिंदुओं में समझा जाए, तो इसका संदेश इस प्रकार है:
१. निष्काम कर्म (बिना फल की इच्छा के कर्म)
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" इसका अर्थ है कि जब हम परिणाम की चिंता छोड़कर वर्तमान कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तब हम तनावमुक्त होकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं।
२. आत्मा की अमरता
भगवान कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा अमर है। न इसे शस्त्र काट सकते हैं, न अग्नि जला सकती है। इसलिए मृत्यु या नुकसान का भय व्यर्थ है। यह बोध व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में साहसी और स्थिर बनाता है।
३. स्थितप्रज्ञ (मानसिक संतुलन)
सफलता-विफलता, सुख-दुख और लाभ-हानि में समान भाव रखना ही योग है। जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों और मन पर नियंत्रण पा लेता है, वह 'स्थितप्रज्ञ' कहलाता है और शांति को प्राप्त करता है।
४. ईश्वर के प्रति समर्पण
गीता के अंत में कृष्ण कहते हैं कि सभी धर्मों (कर्तव्यों) को मुझमें अर्पित कर मेरी शरण में आओ। इसका सार यह है कि जब हम अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर या ब्रह्मांड की शक्ति पर विश्वास रखते हैं, तो हम हर पाप और भय से मुक्त हो जाते हैं।
५. परिवर्तन ही संसार का नियम है
जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का था और परसों किसी और का होगा। परिवर्तन को स्वीकार करना ही जीवन की प्रगति का आधार है।
संक्षेप में: गीता का सार है—अपना कर्तव्य निभाओ, मोह का त्याग करो और ईश्वर पर विश्वास रखो। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक व्यावहारिक कला है।
28/04/2026
🙏🌹✨️ जय श्री महाकाल ✨️🌹🙏
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन
28-04-2026 कण-कण में महादेव हर हर महादेव 🌹🙏
28/04/2026
श्री मौर्विनंदन खाटू श्याम चालीसा
https://youtu.be/OxVZelwBhwM
आज दिन की शुरुआत करते है श्याम चालीसा से, आप भी अवश्य सुने और श्याम प्रभु की अनंत कृपा पाने का सौभाग्य प्राप्त करें✨️🌹🙏
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