R P Rajak
01/03/2026
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🌺 सेमल: रिक्तता से सृजन तक का सफ़र जीवन हमें अक्सर दो अतियों के बीच लाकर खड़ा कर देता है— एक ओर मधुमास, जहाँ सब कुछ हरा-भरा, संतुलित और पूर्ण प्रतीत होत....
पढ़ाई-लिखाई से क्या ही हो जाएगा। कौन-सी नौकरी लग जाएगी। कहीं जॉब्स बची ही नहीं हैं। मैकेनिक, प्लंबर, मिस्त्री, ड्राइवर, सब्ज़ी/किराना वाले—सब डिग्रीधारी, पढ़े-लिखे गधों से ज़्यादा कमा रहे हैं।
उपरोक्त व्हाट्सएप ट्रैश बड़ी तेज़ी से हर जगह घुमाया जा रहा है। “सहमत”, “सटीक”, “क्या ख़ूब कहा”, “एकदम सही बात है”—जैसे अनगिनत कमेंट्स भी।
पर याद रखिए, इट्स अ ट्रैप।
एकदम भीषण वाला जाल। इंद्रजाल, मायाजाल से भी बड़ा—सबसे बड़ा जाल।
बस कमा लो, इतना कमा लो कि ज़िंदा रह लो, अपने परिवार को ज़िंदा रख सको—यह भी कोई ज़िंदगी हुई? इतना तो जानवर भी कर लेते हैं।
पढ़ाई के बाद पैसा सबसे ज़रूरी है, इसमें कोई शक नहीं, इस पर कोई सवाल ही नहीं बनता।
लेकिन पढ़ाई का मतलब सिर्फ़ डिग्री लेना, नौकरी पकड़ना या बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं है।
पढ़ाई तुम्हारे दिमाग़ की खिड़कियाँ खोलती है।
ऐसी खिड़कियाँ, जिन्हें ‘सिस्टम जी’ बंद ही रखना चाहते हैं।
यह उम्मीद जगाती है कि कभी तुम्हें समझ आएगा कि तुम सिर्फ़ “हम बनाम वे” करने के लिए पैदा नहीं हुए।
यह सिखाती है कि शासक चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, वह इंसान ही है।
उसके फ़ैसले भी ग़लत हो सकते हैं।
उससे सवाल किए जा सकते हैं।
तर्क और बहस की जा सकती है।
पढ़ना सिविक सेंस जगाता है।
यह समझ आता है कि सड़क पर गंदगी फैलाना, कूड़ा फेंकना, लाइन तोड़ना या किसी की आवाज़ दबाना सिर्फ़ “छोटी-सी बात” नहीं, बल्कि समाज के साथ विश्वासघात है।
यह अच्छे-बुरे की तमीज़ सिखाता है।
न सिर्फ़ किताबी नैतिकता, बल्कि वह नैतिकता, जो रोज़ की ज़िंदगी में परखी जाती है।
पढ़ाई यही हिम्मत देती है।
बराबरी पर खड़े होने के मौक़े देती है।
सवाल पूछने के, ‘न’ कहने के और सही के लिए लड़ने के।
आज के ज़माने में बिना पढ़े इंसान मशीन बन सकता है, प्यादा बन सकता है—लेकिन जी नहीं सकता।
इक़रा—पढ़ो।
इसलिए कि तुम्हारी आँखें खुली रहें, दिमाग़ जागता रहे और दिल इतना मज़बूत हो कि तुम जान सको—हम सिर्फ़ सर्वाइव करने नहीं आए, बेहतर ज़िंदगी जीने, समझने और बदलाव लाने भी आए हैं।
पढ़ाई दिमाग़ को इतना बड़ा कर देती है कि छोटी-छोटी चीज़ें अब छोटी नहीं लगतीं।
एक ग़लत फ़ैसला, एक अन्याय, एक झूठ—ये सब सिर्फ़ “होता है, चलता है” वाली बातें नहीं रह जातीं।
ये चुभती हैं, क्योंकि अब समझ आ जाती है कि हर चीज़ का असर होता है—बटरफ्लाई इफ़ेक्ट की तरह।
तुम पर, समाज पर, आने वाली पीढ़ी पर।
तुम अकेले नहीं हो।
तुम्हारी सड़क, तुम्हारा शहर, तुम्हारा देश—ये सब तुमसे जुड़े हैं।
अगर तुम चुप रहे, तो वह चुप्पी भी एक फ़ैसला है।
अगर तुमने आवाज़ नहीं उठाई, तो वह ख़ामोशी भी हिस्सेदारी है।
पढ़ाई अच्छे-बुरे की सीमा को धुंधला नहीं करती, बल्कि उसे और साफ़ करती है।
किताबें, विचार—ये सब मिलकर एक आइना बन जाते हैं, जिसमें तुम ख़ुद को देखते हो।
पढ़ाई सवाल बार-बार पूछवाती है और जवाब की ताक़त भी देती है।
ज़िम्मेदारों से सवाल करना कोई बग़ावत नहीं, ज़िम्मेदारी है।
क्यों?
कैसे?
किसके लिए?
और अगर जवाब संतोषजनक न हों, तो बदलाव की माँग।
इसीलिए पढ़ा-लिखा इंसान चुभता है।
लोग कहते हैं—पढ़े-लिखे ज़्यादा जाहिल हैं, कट्टर हैं, नफ़रती हैं, मूर्ख हैं।
होंगे।
सब कुछ होंगे।
लेकिन वे सब प्रिविलेज्ड हैं—यह भी याद रखें।
ग़रीबों के लिए, शोषितों के लिए, निचले तबकों के लिए पढ़ना बेहद ज़रूरी है।
पढ़ाई को किसी क़ीमत पर सैक्रिफ़ाइस नहीं करना है।
हर हाल में पढ़ना है—
फिर चाहे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी तुम्हें दिन, घंटे, महीने की कितनी ही कमाई का गणित क्यों न पकड़ाए।
#पढ़ाई #शिक्षा
01/01/2026
नया साल नई रौशनी लेकर आए,
बीते ग़मों को ख़ामोशी में छोड़ जाए।
हर सुबह उम्मीदों से भरी हो आपकी,
हर शाम सुकून बनकर लौट आए।
नववर्ष 2026 मुबारक हो 🌟💐🙏
31/12/2025
#आर्थिक_सहयोग_की_अपील (महत्वपूर्ण अपडेट)
आप सभी साथियों को अवगत कराना है कि आज दिनांक 31 दिसंबर 2025, दोपहर 12:00 बजे तक, दीपक कनौजिया के इलाज हेतु क्राउड फंडिंग के माध्यम से कुल ₹3,96,000 (तीन लाख छियानवे हजार रुपये) की राशि एकत्र हो चुकी है।
डॉक्टरों द्वारा जारी अनुमानित खर्च का पर्चा इस संदेश के साथ संलग्न है। चिकित्सकों के अनुसार इलाज पर कुल अनुमानित खर्च लगभग ₹10,00,000 (दस लाख रुपये) है।
कल दिनांक 1 जनवरी 2026 को दीपक का ऑपरेशन प्रस्तावित है। अतः ऑपरेशन से पूर्व शेष धनराशि जुटाना अत्यंत आवश्यक और समय-संवेदी हो गया है।
जिन सभी साथियों ने अब तक दिन-रात अथक परिश्रम कर सहयोग जुटाने में योगदान दिया है, उन सभी का हम हृदय से आभार और धन्यवाद प्रकट करते हैं। 🙏
हालाँकि अभी लक्ष्य पूर्ण नहीं हुआ है और हमें और अधिक प्रयास व सहयोग की आवश्यकता है।
आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कृपया इस अपील को पूरी गंभीरता के साथ अधिक से अधिक साझा करें और अपनी क्षमता अनुसार आर्थिक सहयोग प्रदान करें, ताकि दीपक का समय पर उपचार संभव हो सके।
सहयोग हेतु दीपक का बैंक डिटेल निम्नवत है-
खाता धारक का नाम: दीपक कन्नौजिया
खाता संख्या: 34189559186
बैंक का नाम: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई)
शाखा: इलाहबाद यूनिवर्सिटी
आईएफएससी कोड: SBIN0001621
मोबाइल नंबर: 7237891326
UPI- deepak.kannaujiya4@ybl (दीपक)
UPI- kannaujiyakavita21@oksbi (कविता, छोटी बहन)
UPI- 7235939408@ibl (शालिनी, बड़ी बहन)
UPI -6389181252@ibl(सुगम छोटी बहन
आपका छोटा सा सहयोग किसी के जीवन को बचा सकता है।
निवेदक:दीपक कनौजिया का परिवार एवं मित्रगण 🙏