Arvind kumar Mahla

Arvind kumar Mahla

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25/12/2025

अडानी जी को एक नया मुनाफे वाला धंधा ओर मिल जाए इसलिए मोदी सरकार ने बिना बहस के संसद में एक ऐसा विधेयक पास कर दिया है जिससे करोड़ों देशवासियों की जान कभी भी खतरे में पड़ सकती है

Does god exists जैसे बकवास मुद्दे पर जितनी बहस सोशल मीडिया में पिछले दिनों हुई उसकी दस प्रतिशत भी बहस इस बिल पर होती तो शायद मोदी सरकार की हिम्मत नहीं होती कि वह इस तरह से इतने महत्वपूर्ण बिल को पास करा ले

हम बात कर रहे हैं सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) बिल की ...संसद ने जो SHANTI कानून बनाया है वो यह कानून, निजी क्षेत्र की परमाणु ऊर्जा सेक्टर में भागीदारी का रास्ता खोलता है, अब निजी कंपनियां और संयुक्त उद्यम सरकार से लाइसेंस लेकर न्यूक्लियर पावर प्लांट्स का निर्माण, संचालन और डी-कमीशनिंग कर सकती हैं।

इस बिल की कमाल की बात यह है कि ये शांति बिल परमाणु दुर्घटना की स्थिति में, ऑपरेटर की अधिकतम जिम्मेदारी को 3,000 करोड़ रुपये तक ही सीमित कर देता है ....यानी चेर्नोबिल ओर फुकिशमा जैसी बड़ी दुर्घटना देश में स्थित किसी एटॉमिक पॉवर प्लांट में हो जाए तो अडानी जैसे ऑपरेटर को अधिकतम रूप में मात्र 3000 करोड़ सरकार को देने है और वो सारे दावों मुकदमों से फ्री हो सकता है जबकि 2012 में जापान में फुकुशिमा की सफ़ाई पर आने वाला ख़र्च 150 अरब डॉलर से अधिक आँका गया और 1986 में हुई चेर्नोबिल दुर्घटना का खर्च सोवियत संघ सरकार को इतना भारी पड़ा कि 1992 में देश का विघटन कर उसे इस खर्च से हाथ जोड़ना पड़ गए

लेकिन इस शांति बिल में सिर्फ अडानी जैसे प्राइवेट ऑपरेटर को ही फायदे नहीं पहुंचाया गया है !.... ......असली खेला तो यह है जो विदेशी कंपनी एटॉमिक पॉवर प्लांट बनाकर अडानी जैसे ऑपरेटर को देगी उसकी जिम्मेदारी ही नहीं होगी.... यानी इसका मतलब यह है कि अगर कोई दुर्घटना होती है - चाहे वह ख़राब डिज़ाइन, घटिया पुर्ज़ों या लापरवाही भरे निर्माण की वजह से हो- तब भी वह विदेशी सप्लायर बच निकलेगा और पूरा खर्च भारतीय टैक्सपेयर्स यानी हमको ही उठाना पड़ेगा.

यानी यह नया क़ानून विदेशी कंपनियों को अरबों डॉलर के रिएक्टर बेचने में मदद तो कर ही रहा है और साथ ही ख़राब उपकरणों से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए उन्हें "पूरी छूट" भी दे रहा है

लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय परमाणु लॉबी भारत पर अपने स्वयं के दायित्व कानून, परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 में संशोधन करने के लिए दबाव डाल रही थी जिसमें ऑपरेटर को उपकरण सप्लायर से मुआवज़ा वसूलने का अधिकार दिया गया था. लेकिन मोदी सरकार द्वारा पारित इस शांति विधेयक में इस प्रवधान को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है

यह इतनी बड़ी बात है कि इस मुद्दे पर पूरा देश एक हो सकता है लेकिन हमारा मीडिया हमें यह बात बिल्कुल भी नहीं बताता है ओर मूर्खतापूर्ण बातों में हमें उलझाए रखता है

दरअसल यह शांति विधेयक नहीं है यह महा अशांति विधेयक है

Copy paste from गिरीश मालवीय जी

05/12/2025

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