Prem Ka Intezar
18/04/2025
*मोमबत्ती*
(दिकुप्रेम के प्रेम की लौ में)
अंधेरे में भी जलती रही,
ख़ामोशी में भी कहती रही।
बूँद-बूँद पिघल कर भी,
किसी की राह तकती रही।
थी नाजुक, मगर कमज़ोर नहीं,
हर तूफ़ान में भी डरी नहीं।
अपने अंत की परवाह छोड़,
किसी के लिए उजाला बनती रही।
वो मोमबत्ती...
जैसे मेरा प्रेम दिकु के लिए,
जो हर मोड़ पर खुद को मिटा कर,
उसकी ख़ुशी की रोशनी बनता गया।
हर बार जलते हुए भी मुस्कराया,
हर पिघलन में बस उसका चेहरा नजर आया।
लोग कहते हैं— "ये पागलपन है,"
मैं कहता हूँ— "ये पागलपन नही, ये दिकुप्रेम है।"
प्रेम ठक्कर "दिकुप्रेमी"
सूरत, गुजरात
16/04/2025
*मैं मजबूर हो गया हूँ*
अब खुद से ही नज़रों को चुराने लगा हूँ,
तेरे बाद बहुत कुछ दिल में छुपाने लगा हूँ।
जो लफ़्ज़ थे दिल के, अब खामोश हैं,
कभी जो रोशन था, वो अब अंधेरे में मदहोश हैं।
हर सुबह तेरा इंतज़ार लेकर आती है,
और हर रात मुझे तुझसे जुदा कर जाती है।
तू थी तो हर बात थी आसान यहाँ,
अब हर बात में बस तेरा ही नाम आता है यहाँ।
बहुत कोशिश करता हूँ, मगर ये मन,
तेरे बिन जी नहीं पाता है अब तनिक भी क्षण।
*दिकु, लौट आ...*
तेरे प्यार में चूर-चूर हो गया हूँ,
लोग कहते हैं – "तू बदल गया है",
क्या बताऊँ उन्हें… मैं मजबूर हो गया हूँ।
*प्रेम का प्यार सिर्फ अपनी दिकु के लिए*
— प्रेम ठक्कर "दिकुप्रेमी"
9023864367
सूरत, गुजरात
05/04/2025
Thanks for being a top engager and making it on to my weekly engagement list! 🎉 Kamleshwari Yadav, Prabha Sharma, Rajni Mangla, Sunita Devendra Rajput
30/03/2025
मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है, अब तो चली आओ,
मेरी साँसें गभरा रही हैं, अब तो चली आओ।
साए की तरह हर पल तुम संग रहना चाहता हूँ,
ये जुदाई मेरी हस्ती मिटा रही है, अब तो चली आओ।
तेरी दूरी मेरी रूह को तड़पा रही है,
शरीर से धीरे-धीरे जान जा रही है, अब तो चली आओ।
*प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए*
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