Dharmendra Rastogi Journalist at Bihar

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26/06/2026

आप लोगों को अगर परिंदों के गीत सुनना है, तो पिंजरा नहीं बल्कि पेड़ लगाना होगा..!!
Dharmendra Rastogi

Photos from Dharmendra Rastogi Journalist at Bihar's post 02/01/2026

#सदैव प्रसन्न रहना चाहिए, क्योंकि जो #प्राप्त है, वही #पर्याप्त है।
#चार #मोमबत्तियों की कहानी......
जीवन में कभी उजाला तो कभी अंधेरा रहता है, क्योंकि जीवन में समय एक जैसा नहीं रहता है। जीवन में जब भी अंधकार आए, मन अशांत हो जाए, विश्वास डगमगाने लगे और दुनिया पराई लगने लगे। तब आशा का दीपक जला लेना। जब तक आशा का दीपक जलता रहेगा, जीवन में कभी अंधेरा नहीं हो सकता हैं। आशा के बल पर जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है। इसलिए आशा का साथ कभी भी छोड़ना नहीं चाहिए।

रात का समय था। चारों ओर पूरा अंधेरा छाया हुआ था। केवल एक ही कमरा प्रकाशित था। वहां चार मोमबत्तियां जल रही थी। उक्त चारों मोमबत्तियां एकांत देख आपस में बातें करने लगी।

#पहली #मोमबत्ती बोली, “मैं शांति हूं, जब मैं इस दुनिया को देखती हूं, तो बहुत दु:खी होती हूं। चारों ओर आपा- धापी, लूट- खसोट और हिंसा का बोलबाला है। ऐसे में यहां रहना बहुत मुश्किल है। मैं अब यहां और नहीं रह सकती हूं।” इतना कहकर #पहली #मोमबत्ती बुझ गई।

#दूसरी #मोमबत्ती भी अपने मन की बात कहने लगी, “मैं विश्वास हूं, मुझे लगता है कि झूठ, धोखा, फरेब, बेईमानी मेरा वजूद ख़त्म करते जा रहे हैं। यह जगह अब मेरे लायक नहीं रही। मैं भी जा रही हूं।” इतना कहकर #दूसरी #मोमबत्ती भी बुझ गई।

#तीसरी #मोमबत्ती भी दु:खी थी। वह बोली, “मैं प्रेम हूं, मैं हर किसी के लिए हर पल जल सकती हूं। लेकिन अब किसी के पास मेरे लिए वक़्त नहीं बचा है। स्वार्थ और नफरत का भाव मेरा स्थान लेता जा रहा है। लोगों के मन में अपनों के प्रति भी प्रेम- भावना नहीं बची है। जिस कारण अब सहना मेरे बस की बात नहीं रही। मेरे लिए जाना ही ठीक होगा।” इतना कहने के बाद #तीसरी #मोमबत्ती भी बुझ गई।

#तीसरी #मोमबत्ती बुझी ही थी कि कमरे में एक बालक ने प्रवेश किया। मोमबत्तियों को बुझा हुआ देख उसे बहुत दुःख हुआ। उसकी आंखों से आंसू बहने लगा। दु:खी मन से वह बोला, “इस तरह बीच में ही मेरे जीवन में अंधेरा कर कैसे जा सकती हो तुम। तुम्हें तो अंत तक पूरा जलना था। लेकिन तुमने मेरा साथ छोड़ दिया। अब मैं क्या करूंगा?”

बालक की बात सुन #चौथी #मोमबत्ती बोली, “घबराओ नहीं बालक, मैं आशा हूं और मैं तुम्हारे साथ हूं। जब तक मैं जल रही हूं, तुम मेरी लौ से दूसरी मोमबत्तियों को जला सकते हो।” #चौथी #मोमबत्ती की बात सुनकर बालक का ढांढस बंध गया। उसने आशा के साथ शांति, विश्वास और प्रेम को पुनः प्रकाशित कर लिया।
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