Bezal Media

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26/12/2025

😢 “वह बेंच आज भी खाली है”
हर शाम ठीक छह बजे
वह वृद्ध आदमी पार्क में आता था।

वही पुरानी बेंच…
वही थकी हुई चाल…
और हाथ में एक छोटा सा थैला।

लोग उसे रोज़ देखते थे,
लेकिन कोई यह नहीं जानता था
कि वह वहाँ क्यों आता है।

आज भी वह आया।
धीरे से बेंच पर बैठा
और पास की खाली जगह को देखने लगा।

फिर हल्की मुस्कान के साथ बोला —
“आज फिर देर कर दी तुमने…”

कोई उत्तर नहीं आया।

उसने थैले से एक टॉफ़ी निकाली,
आधी खुद खाई
और आधी बेंच पर रख दी।

आँखों में नमी भर आई।

फिर आसमान की ओर देखते हुए बोला —
“तुझे तो ये बहुत पसंद थी ना…”

हवा चल रही थी,
लेकिन उसके मन के अंदर
एक अजीब-सी खामोशी थी।

तभी पास से एक लड़का गुज़रा।
रुककर बोला —
“बाबा, आप रोज़ यहाँ क्यों आते हो?”

वृद्ध ने कुछ पल चुप रहकर कहा —

“यहीं आख़िरी बार मेरा बेटा मेरे साथ बैठा था…
उसने कहा था —
‘कल फिर आएँगे पापा।’”

उसकी आवाज़ भर्रा गई।

“कल कभी आया ही नहीं…
एक हादसे ने सब खत्म कर दिया।”

अब वह रोज़ आता है…
उसी समय…
उसी बेंच पर…

क्योंकि उसे लगता है —
शायद आज देर हो गई हो,
पर बेटा ज़रूर आएगा।

💔 सच यही है…

जो रोज़ साथ होते हैं,
उनकी अहमियत
उनके जाने के बाद ही समझ आती है।

👉 अगर इस कहानी ने दिल छू लिया हो
तो शेयर जरूर करें

क्योंकि कोई न कोई
आज भी किसी का इंतज़ार कर रहा है… 😔
कमेंट में उनका नाम जरूर लिखें

25/12/2025

😢 “माँ का आख़िरी मैसेज”
रात के 11 बजे थे। मोबाइल अचानक बजा। स्क्रीन पर लिखा था — “माँ”
मैंने कॉल काट दी।
सोचा, कल बात कर लूँगा… अभी बहुत थक गया हूँ।
माँ रोज़ यही करती थी। बिना वजह कॉल, बिना बात के मैसेज।
मुझे लगता था, माँ को क्या काम होता है? वो तो घर पर ही रहती है…
सुबह उठा तो मोबाइल में एक मैसेज था:
“बेटा, आज तेरी बहुत याद आ रही है… खाना टाइम से खा लेना।
मैंने तेरे लिए तेरी पसंद की सब्ज़ी बनाई है…
जब आएगा तो खिला दूँगी।”
मैं मुस्कुरा दिया।
सोचा, माँ भी ना…
दोपहर में ऑफिस से कॉल आया — “जल्दी घर आ जाओ…”
घर पहुँचा तो माँ चुपचाप लेटी हुई थी।
डॉक्टर ने बस इतना कहा —
“हम कुछ नहीं कर पाए…”
मेरे हाथ काँपने लगे। मोबाइल गिर पड़ा।
उसी मोबाइल में माँ का वो आख़िरी मैसेज चमक रहा था…
“खाना टाइम से खा लेना…”
आज भी खाना सामने रखा होता है लेकिन निगल नहीं पाता।
आज भी मोबाइल बजता है तो लगता है माँ ही होगी…
काश… उस रात कॉल उठा लिया होता।
काश… एक बार बोल दिया होता — “हाँ माँ, मैं ठीक हूँ।”

💔 अगर आपकी माँ ज़िंदा है…
तो आज ही:
उन्हें कॉल करें
उनसे प्यार से बात करें
और कहें — “माँ, मैं आपसे बहुत प्यार करता/करती हूँ”
⏳ समय बहुत बेरहम होता है… ये दोबारा मौका नहीं देता।

👉 अगर ये कहानी दिल को छू गई हो तो comment में सिर्फ़ “माँ ❤️” लिख दीजिए। शायद ऊपर कहीं… एक माँ मुस्कुरा दे।
😢

04/09/2025

कोई शेयर नहीं करेगा इसको वरना आईडिया चोरी हो सकता है 😂😂

09/06/2025

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