Surender Mohan HAS
संगत
हमारा चरित्र कितना ही दृढ़ हो, पर उस पर संगति का असर अवश्य होता है।
सपने तब खत्म होते हैं जब हम देखना बंद कर देते हैं,
और हार तब तय होती है जब हम अपनी ही आवाज़ से हार मान लेते हैं!
हर दिन हमारे अंदर
एक आवाज़ गूंजती है,
जो हमें बताती है
कि हम हार चुके हैं,
कि यह सब बेकार है,
कि आगे बढ़ने का कोई फायदा नहीं।
लेकिन सच यह है कि
जब तक हम अपने सपनों को देखना
और उनके लिए लड़ना जारी रखते हैं,
तब तक असली हार हो ही नहीं सकती।
एक वादा करो-
"मैं तब तक नहीं रुकूंगा, जब तक अपनी जीत की कहानी खुद नहीं लिख लेता!"
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