Baaz
16/03/2025
यात्रा वृतांत - part 3
वापसी में सब कुछ सामान्य ही रहा और जब हम सूरज ढलने से पहले वापस पहुंचे तो हमसे ज्यादा खुश होटल और बाइक का मालिक था। हमारे रहने का इंतज़ाम तो हो ही रखा था। खैर खबर पूछने और चाय पीने के दरमियान जब मैंने कहा की इतना कुछ करने पर भी गंगा मैय्या की मूर्ति के दर्शन न हुए तो होटल का बावर्ची और मालिक ठहाके मार कर हंसने लगे। लाज़मी था, हमनें जो किया था वो मूर्खता के सिवा कुछ भी तो नहीं था। हँसते हँसते उन्होंने बताया की हर साल जो गंगा माता की मूर्ति नीचे आती है वो धराली में पुल के उस पार बने मंदिर में ही स्थापित होती है। गंगा माता शुरू से वहीं थीं। ये अलकेमिस्ट नावेल का ही अंत था, जिसे हम ढूंढ रहे थे वो वहीं था। ......
Pic Credit - Random FB Post
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