Journalist Rupesh Kumar Singh

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31/05/2026

साथी Satyam Varma जी की रिहाई जल्द से जल्द हो ✊️

05/01/2026

Rupesh Kumar Singh की एक कविता-

नववर्ष की बधाई
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अन्याय और जुल्म के खिलाफ
डटकर खड़े साथियों
तुझे नववर्ष की बहुत बधाई।

इजराइली, तोपों, युद्धक विमानों
मिसाइलों व ड्रोनों के सामने
तनकर खड़े ‎गाजा के बहादूरों
तुझे नववर्ष की बहुत बधाई।

रुसी सेना का दंभ तोड़ने वालों
अपनी मातृभूमि को बचानेवालों
हिम्मती व बहादूर यूक्रेनियों
तुझे नववर्ष की बहुत बधाई।

भारत के मूलवासी - आदिवासियों
खनिज सम्पदा के असली वारिसों
जल-जंगल-जमीन के रखवालों
अपने मान-सम्मान की खातिर
जान की बाजी लगाने वालों
तुझे नववर्ष की बहुत बधाई।

फासीवादी सरकार के विरोधियों
किसान मजदूर छात्र नौजवानों
संघर्षरत मेहनतकश महिलाओं
अल्पसंख्यक समुदाय व बुद्धिजीवियों
दुनिया के प्यारे प्यारे बच्चों
सच को सच व झूठ को झूठ कहने वालों
हमारे पत्रकार कवि लेखक साथियों
तुझे नववर्ष की बहुत बधाई।

न्याय के खातिर लड़‌ने वालों
दुनिया की जेलों को भरने वालों
जेलों में अपने अधिकार खातिर
सरकार व अधिकारियों से लड़ने वालों
हमारे प्यारे हमराहियों
तुझे नववर्ष की बहुत बहुत बधाई।
तुझे नववर्ष की बहुत बहुत बधाई।
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रूपेश कुमार सिंह
01 जनवरी 2025.
आदर्श केन्द्रीय कारा, बेऊर, पटना।

28/09/2025

शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिवस (28 सितम्बर) पर उनके सपने, शोषणमुक्त समाज की स्थापना की लड़ाई लड़ रहे जनयोद्धाओं को इंकलाबी सलाम ✊✊

बिना किसी लय, मात्रा या फिर तुकबंदी के
कुछ पंक्तियां शहीद-ए-आजम के वारिसों के लिए।

जो लड़ रहे हैं दिन-रात
अपने जल-जंगल-जमीन को बचाने के लिए
जो चल रहे हैं आज पथरीली राहों पर
शहीद-ए-आजम के सपनों के लिए
जिन्होंने भर दी है हुंकार
जात-पात के खिलाफ समानता के लिए
जिन्होंने कर दिया है एलान
साम्प्रदायिकता के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता के लिए
जो कर रहे हैं बात
अंधराष्ट्रवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीयता के लिए
ये चंद पंक्तियां मैं कर रहा हूं पेश
शहीद-ए-आजम के ऐसे ही वारिसों के लिए।

ना तो भगवाधारी हो सकता है
शहीद-ए-आजम का सच्चा वारिस
और ना ही सुअरबाड़े के जरिए
क्रांति का ख्वाब देखनेवाले
उनके असली वारिस सिर्फ हैं वो ही
जो लड़ रहे हैं एक शोषणमुक्त समाज की लड़ाई
छान रहे हैं जंगलों-पहाड़ों की खाक
दे रहे हैं शहादत पर शहादत
झेल रहे हैं जेल में भी
अपने शरीर पर बर्बर टाॅर्चर।

शहीद-ए-आजम के सच्चे वारिस तुम ही हो बहन
जो झेल रहे हो लगातार
सैन्यबलों के द्वारा बलात्कार पर बलात्कार
फिर भी नहीं हुए हो लाचार
लड़ रहे हो और भी मजबूती से लगातार
और इस लड़ाई में
जो भी हैं तेरे हमकदम
चाहे वो हो छात्र-युवा
या फिर मजदूर-किसान
या हो यहां के दलित-मुसलमान
वही हैं शहीद-ए-आजम के सच्चे वारिस
और मैं करता हूं उनके वारिसों को सलाम।।..............
Rupesh Kumar Singh

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