Aslehan

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17/09/2024

एक गरीब आदमी की भगवान के प्रति इतनी बड़ी आस्था थी कि वो बेचारा प्रतिदिन सादे कागज़ पर भगवान के नाम एक संदेश लिखता..." हे...प्रभु, मुझे पचास हजार रुपए भेज दो,मैं ग़रीब हूँ,आपका बहुत एहसान होगा " ।

संदेश लिखने के बाद वो आदमी प्रतिदिन उस काग़ज़ को एक गुब्बारे में बांध कर आसमान में उड़ा देता ये सोचकर कि उसका संदेश एक न एक दिन भगवान के पास जरूर पहुंच जाएगा ।

वो गुब्बारा अक्सर एक पुलिस थाने के ऊपर से गुजरता और पुलिसकर्मी उस गुब्बारे को पकड़ कर वो पर्ची पढ़ते और उस आदमी के भोलेपन पर ख़ूब हंसते।

एक दिन थाने के सारे पुलिसकर्मियों ने मिलकर सोचा कि क्यों ना उस गरीब आदमी की कुछ मदद की जाए क्योंकि वो बेचारा बड़ी गहरी आस्था से रोज़ भगवान से उम्मीद के साथ मदद मांगता है।

उस ग़रीब आदमी की मदद करने की भावना से पुलिसकर्मियों ने मिलकर पच्चीस हजार रुपए जमा किये और उस व्यक्ति को उसके घर ले जाकर दे आये।

दूसरे दिन फ़िर जब उन पुलिसकर्मियों ने गुब्बारा उड़ता देखा तो उन्हें बेहद आश्चर्य हुआ कि फिर वो आदमी ऐसा क्यों कर रहा है जबकि उसे रुपए तो मिल चुके हैं ??

इस बार पुलिसकर्मियों ने बड़ी उत्सुकता से गुब्बारा रोक कर पर्ची पढ़ी तो उनके होश उड़ गए क्योंकि उसमें लिखा था..." प्रभु.. आपके द्वारा भेजे गए पैसे तो मिल गए, लेकिन आपको पुलिसवालों के हाथों रुपए नहीं भेजने चाहिए थे...साले पच्चीस हजार खा गए "।

14/09/2024

लगातार कानों को चीरती हुई एम्बुलेंस की सायरनों के बीच अचानक तेज़ी से एक सरकारी अस्पताल के ट्रामा सेंटर के माइक से एक आवाज़ गूंजने लगी......" कृपया ध्यान देंगे , इमरजेंसी बेड नम्बर तीन के मरीज़ के साथ जो भी अटेंडेंट हैं वो कृपया तुरंत गेट पर पहुँचे " ।

तक़रीबन दो मिनट बाद माइक से फ़िर आवाज़ गूंजी..." कृपया ध्यान देंगे , इमरजेंसी बेड नम्बर तीन के मरीज़ के साथ उनके जो भी रिश्तेदार हैं ,वो बिना विलम्ब किए तुरंत गेट पर पहुंचे "।

कुछ देर के अंतराल के बाद माइक से ये आवाज़ बार बार गूंजने लगी औऱ फ़िर उसके बाद माइक ने लंबी ख़ामोशी साध ली ।

तक़रीबन पंद्रह मिनट के बाद एक युवक इमरजेंसी गेट पर पंहुचा औऱ वहाँ मौजूद सिक्युरिटी गार्ड से बोला कि " वो बेड नम्बर तीन के मरीज़ के साथ है औऱ उसे बार बार माइक से अनाउंस कर क्यों बुलाया जा रहा था "??

गार्ड ने जब अंदर जाकर ख़बर दी तो उस इमरजेंसी वार्ड में अपनी ड्यूटी पर तैनात एक नर्स दनदनाती हुई बाहर आई औऱ सबसे पहले उसने भड़कते हुए उस युवक को जबरदस्त रूप से फटकार लगाई..... " बेवकूफ इंसान , तुम्हारा बाप मर रहा है और तुम उसे छोड़कर लापता हो ? जल्दी से ब्लड बैंक भागो औऱ अपना दो यूनिट ब्लड देकर किसी तरह अपने बाप के लिए तत्काल दो यूनिट ओ निगेटिव ब्लड की व्यवस्था करो...जल्दी " ।

वो युवक सरसराता हुआ आंधियों की रफ़्तार से भागा औऱ फ़िर बिना वक़्त गवाएं जितनी जल्दी वापस आ सकता था , ब्लड लेकर लौट आया ।

ब्लड का थैला नर्स की हाथों में पकड़ाते हुए उस वक़्त वो सिर्फ़ इतना ही बोल सका...".सॉरी सिस्टम , अगर कुछ विलम्ब हुआ हो तो , लेकिन अभी उनकी हालत कैसी है " ??

नर्स ने जल्दबाजी दिखाते हुए कहा..." उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई है ,बहुत खून बह चुका है ,फ़िलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता "।

उसके बाद नर्स ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से ज़ख्मी एक बुजुर्ग मरीज़ को तुरंत ब्लड चढ़ाना शुरू कर दिया ।

कुछ देर बाद वो नर्स फ़िर बाहर आई औऱ उस युवक को अंदर अपने साथ वार्ड में ले गई...." देखिए चचा ,आपका बेटा आ गया है ,आप उसके लिए बुदबुदा रहे थे न " ....उसने धीरे से ऑक्सीजन मास्क लगे उस बूढ़े आदमी से कहा ।

बुजुर्ग की आंखें हिलने से पहले नर्स को कई बार अपने इन्ही शब्दों को दोहराना पड़ा।

सड़क दुर्घटना के बाद हुए गंभीर ज़ख्म एवं दर्द के कारण भारी बेहोशी की हालत के बावजूद हल्की आँखे हिलाकर किसी तरह उन्होंने उस युवक को धुंधले दृष्टि से अपने बिस्तर के पास खड़े होने का आभास पाया ।

अब उस युवक ने बिना देर किए अपना हाथ उनकी तरफ बढ़ा दिया।

उसके बाद फ़िर उस युवक ने अपने प्यार और स्नेह को बुजुर्ग मरीज़ तक पहुंचाने के लिए उनके बेहद क़रीब जाकर ध्यानपूर्वक उन्हें एक भावनात्मक स्पर्श देने का भरपूर प्रयास किया।

इस प्यार भरे लम्हे के बाद युवक ने उन बूढ़े हाथों को अपनी सख्त उंगलियों में, प्यार से कसकर थामा और " मैं आपके साथ हूँ , आपके पास ही हूँ ", का उन्हें एक गहरा अहसास दिलाया।

इन मार्मिक नाज़ुक क्षणों को देखते हुए नर्स ने उस युवक को मरीज़ के बेड के एक हिस्से में बैठने का इशारा किया लेकिन वो युवक खड़ा रहा ।

सारी रात वो युवक वहां, खराब रोशनी वाले इमरजेंसी वार्ड में जमा रहा। बस बुजुर्ग का हाथ पकड़े, उन्हें स्नेह, प्यार और ताकत के अनेकों शब्द बोलते, संबल देते साथ ही एक गहरे प्रेम का एहसास ।

बीच- बीच में, नर्स ने उस युवक से आग्रह किया कि "आप भी थोड़ी देर बैठ जाइए " लेकिन उसने शालीनता से इनकार कर दिया।

जब भी नर्स वार्ड में आयी हर बार वह युवक उसके आने से बेखबर बस यूँ ही बुजुर्ग का हाथ थामे खड़ा रहा।

ऑक्सीजन टैंक की गड़गड़ाहट, रात के स्टाफ सदस्यों की फुसफुसाहट का आदान-प्रदान, अन्य रोगियों के रोने और कराहने की आवाजें, कुछ भी उसकी एकाग्रता को तोड़ नही पाई थी।

नर्स ने उस युवक को हरदम, बस बुजुर्ग को कुछ कोमल मीठे शब्द कहते सुना ,दुलार करते देखा ।

गंभीर रूप से ज़ख्मी वो बुजुर्ग उस वक़्त किसी से भी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं था लेकिन रात भर उस युवक ने उनकी हाथों को कसकर पकड़े रखा।

लेकिन डॉक्टरों के लाख प्रयासों के बावजूद भोर होते ही बुजुर्ग का अंत हो गया।

उसके बाद युवक ने उन बुजुर्ग के बेजान हाथों को छोड़ दिया और नर्स को कुछ बताने के लिये उसे वार्ड के चारो तरफ खोजने लगा ।

अंततः जब नर्स वापस लौट आई और वो जबतक उस युवक से अपनी सहानुभूति जताने के लिये कुछ कह पाती , उससे पहले ही युवक ने उसे रोककर पूछा "कौन थे वे बुजुर्ग आदमी ?"

नर्स चौंक गई " क्या वे आपके पिता नहीं थे ? "

"नहीं, वे नहीं थे" युवक ने उत्तर दिया। " मैंने उन्हें अपने जीवन में पहली बार देखा है , दरअसल कल माइक में बार बार अनाउंस होने के बाद भी जब उनका कोई रिस्तेदार इमरजेंसी गेट पर नहीं पहुंचा तो वहीं गेट के पास खड़ा मैं समझ गया कि इस मरीज़ का फ़िलहाल यहाँ कोई नहीं है शायद , औऱ फ़िर अंत में मैंने ही ये जिम्मेदारी उठाने की ठान ली ।"

"तो जब मैं आपको उनके पास ले गयी थी तो आपने कुछ कहा क्यों नहीं ?" नर्स ने जानना चाहा ।

" मैं उसी समय उन्हें देखकर समझ गया था कि दुर्घटना में बेहद गंभीर रूप से ज़ख्मी उस बुजुर्ग को इस वक़्त शायद अपने बेटे की ज़रूरत है और उनका बेटा यहाँ नहीं है तो मैंने ख़ुद को उनके बेटे के रूप में समर्पित करने का दृढ़ निश्चय कर लिया ।" युवक ने अपनी बात कही ।

नर्स बेहद आश्चर्य औऱ उलझन में सब सुनती रही ।

"तो फिर इस घायल बुजुर्ग को अस्पताल में लाया कौन ?" नर्स आश्चर्य भरी भाव भंगिमा में बोल उठी ।

" हो सकता है सिस्टर कि इस बुजुर्ग को सड़क पर ज़ख्मी अवस्था में देख किसी रहमदिल इंसान ने उन्हें यहाँ भर्ती करा दिया हो औऱ फ़िर यहाँ से चला गया हो "....युवक ने आशंका व्यक्त करते हुए अनुमान लगाया ।

" लेकिन फ़िर आप यहाँ कैसे "...?? नर्स ने आश्चर्य से प्रश्न किया ।

" जी सिस्टर , दरअसल पास के ही स्त्री प्रसूति वार्ड में मेरी गर्ववती पत्नी भर्ती है , वो माँ बनने वाली है , बस उसी को लेकर मैं यहाँ कल से हूँ , फ़िलहाल मेरी पत्नी की देखभाल के लिए मेरी माँ वहाँ मौजूद है " युवक ने कहा ।

" इसका मतलब कि आपने किसी अजनबी के लिए अपना खून दिया औऱ पूरी रात उसके लिए खडे रहे...." नर्स ने फ़िर आश्चर्य भरी नज़रों से उस युवक की तरह देखा ।

युवक बिलकुल चुप रहा ।

दोनों कुछ पलों तक बिलकुल ख़ामोश खड़े एक दूसरे को देखते रहे क्योंकि दोनों को ये बखूबी एहसास था कि एक मरते हुए आदमी की जिंदगी के लिए उस वक़्त उसके लिए अपने बेटे के हाथ से ज्यादा आश्वस्त करने वाला कुछ नहीं हो सकता था।

कुछ देर की ख़ामोशी के बाद अपनी चुप्पी तोड़ती हुई डबडबाई आँखों से नर्स ने युवक को शुक्रिया कहा ।

" इसमें शुक्रिया कहने वाली कोई बात नहीं सिस्टर , हम तो फ़ौजी आदमी हैं , हर वक़्त अपने फ़र्ज़ के लिए समर्पित रहते हैं औऱ यहाँ भी हमनें अपनी फ़र्ज़ निभाई है , ये औऱ बात है कि समय समय पर हमारा सिर्फ़ जंग का मैदान बदलते रहता है "....!! ......नर्स से इतना कहकर युवक वहाँ से निकल गया ।

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